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Ambala News: हाईकोर्ट ने सुरक्षा के लिए तीन दिन में ही फैसला लेने का दिया आदेश
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। मुलाना थाने में अधिवक्ता व उनके परिजनों के साथ पुलिस कर्मियों व अधिकारियों की ओर से की गई अभद्रता और पिटाई के मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल न करने पर नाराजगी जताई है। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों को वकीलों की सुरक्षा याचिका पर तीन दिनों के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार को नोटिस दिए जाने के बाद भी अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। कोर्ट ने इसे अंतिम रियायत बताते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। पिछले साल दिसंबर में मुलाना थाने में अधिवक्ता व उसके परिजनों से मारपीट के पुलिस कर्मियों पर आरोप लगे थे। इस मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।
याचिकाकर्ता वकील की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि 12 दिसंबर 2025 को हुई एक घटना में वे पीड़ित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसी कारण से पीड़ित अपने घर पर भी नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें अपने रिश्तेदार के घर पर रहना पड़ रहा है। ऐसे में पीड़ित अधिवक्ता ने अपनी जान, स्वतंत्रता और सम्मान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।
अदालत ने पीड़ित को निर्देश दिया है कि वे सुरक्षा की मांग को लेकर संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करें। कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि आवेदन प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर इस पर उचित दृष्टिकोण से विचार करें और सुरक्षा दें।
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कोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल न करने पर नाराजगी जताई है। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों को वकीलों की सुरक्षा याचिका पर तीन दिनों के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार को नोटिस दिए जाने के बाद भी अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। कोर्ट ने इसे अंतिम रियायत बताते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। पिछले साल दिसंबर में मुलाना थाने में अधिवक्ता व उसके परिजनों से मारपीट के पुलिस कर्मियों पर आरोप लगे थे। इस मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।
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याचिकाकर्ता वकील की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि 12 दिसंबर 2025 को हुई एक घटना में वे पीड़ित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में केवल जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसी कारण से पीड़ित अपने घर पर भी नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें अपने रिश्तेदार के घर पर रहना पड़ रहा है। ऐसे में पीड़ित अधिवक्ता ने अपनी जान, स्वतंत्रता और सम्मान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।
अदालत ने पीड़ित को निर्देश दिया है कि वे सुरक्षा की मांग को लेकर संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करें। कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि आवेदन प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर इस पर उचित दृष्टिकोण से विचार करें और सुरक्षा दें।
