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Bhiwani News: 28 सितंबर तक उठाएं एकमुश्त निपटान योजना का लाभ, पुराने कर बकायों पर मिलेगी राहत
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भिवानी। उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (डीईटीसी) जगबीर सिंह ने व्यापारियों से हरियाणा सरकार की एकमुश्त निपटान योजना का लाभ उठाने का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि 1 जून से 28 सितंबर तक लागू इस 120 दिवसीय योजना के तहत पुराने कर बकायों के निपटान और विभिन्न न्यायालयों व अपीलीय मंचों पर लंबित मामलों के समाधान का अवसर प्रदान किया गया है।
डीईटीसी जगबीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2025 में छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई एकमुश्त निपटान योजना को प्रदेशभर के व्यापारियों का अभूतपूर्व समर्थन मिला था। इस योजना का लाभ 1,15,223 व्यापारियों ने उठाया था। योजना की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बार फिर एकमुश्त निपटान योजना लागू की है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत निर्धारित बकाया कर राशि के निपटान का प्रावधान किया गया है। यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत किसी एक वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे योजना के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों में उस वर्ष के लिए कर, ब्याज एवं जुर्माने की संपूर्ण राशि माफ कर दी जाएगी।
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डीईटीसी ने बताया कि आवेदक अपने बकाया कर के निपटान के लिए किसी भी अधिनियम तथा किसी भी वर्ष के लिए आवेदन कर सकता है। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत लंबित मामलों में विशेष राहत प्रदान की गई है। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2003 से हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम लागू होने के साथ निरस्त कर दिया गया था। चूंकि इस अधिनियम के अंतर्गत अधिकांश मामले काफी पुराने हैं इसलिए एक लाख रुपये से अधिक कर बकाया वाले सभी मामलों में 70 प्रतिशत कर छूट प्रदान की जा रही है।
उन्होंने बताया कि फॉर्म-सी, फॉर्म-एफ, फॉर्म-एच, फॉर्म-ई-1, फॉर्म-ई-2, टैक्स इनवॉइस, वैट सी-4, वैट डी-1 एवं वैट डी-2 जैसे वैधानिक प्रपत्र समय पर जमा न होने के कारण बड़ी संख्या में कर बकाया लंबित हैं। ऐसे मामलों के समाधान के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यापारी अब आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में सक्षम है तो दस्तावेजों के सत्यापन के उपरांत उसे योजना के अनुसार लाभ दिया जाएगा। हालांकि यह लाभ फर्जी अथवा नकली फर्मों तथा जिन मामलों में आपराधिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है उन्हें नहीं मिलेगा।
डीईटीसी जगबीर सिंह ने बताया कि योजना के तहत कर छूट की विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत एक रुपये से एक लाख रुपये तक के बकाया मामलों में 100 प्रतिशत कर, ब्याज एवं जुर्माना माफ किया जाएगा जबकि अन्य मामलों में 70 प्रतिशत कर छूट प्रदान की जाएगी।
छह अधिनियमों के अंतर्गत कर छूट की श्रेणियां इस प्रकार हैं
1 रुपये से 1 लाख रुपये तक : 100 प्रतिशत छूट
1 लाख से अधिक से 10 लाख रुपये तक : 60 प्रतिशत छूट
10 लाख से अधिक से 1 करोड़ रुपये तक : 50 प्रतिशत छूट
1 करोड़ से अधिक से 10 करोड़ रुपये तक : 40 प्रतिशत छूट
10 करोड़ से अधिक से 30 करोड़ रुपये तक : 35 प्रतिशत छूट
30 करोड़ से अधिक से 60 करोड़ रुपये तक : 30 प्रतिशत छूट
60 करोड़ रुपये से अधिक : कोई कर छूट नहीं।
डीईटीसी जगबीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2025 में छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई एकमुश्त निपटान योजना को प्रदेशभर के व्यापारियों का अभूतपूर्व समर्थन मिला था। इस योजना का लाभ 1,15,223 व्यापारियों ने उठाया था। योजना की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बार फिर एकमुश्त निपटान योजना लागू की है।
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उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत निर्धारित बकाया कर राशि के निपटान का प्रावधान किया गया है। यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत किसी एक वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे योजना के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों में उस वर्ष के लिए कर, ब्याज एवं जुर्माने की संपूर्ण राशि माफ कर दी जाएगी।
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डीईटीसी ने बताया कि आवेदक अपने बकाया कर के निपटान के लिए किसी भी अधिनियम तथा किसी भी वर्ष के लिए आवेदन कर सकता है। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत लंबित मामलों में विशेष राहत प्रदान की गई है। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2003 से हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम लागू होने के साथ निरस्त कर दिया गया था। चूंकि इस अधिनियम के अंतर्गत अधिकांश मामले काफी पुराने हैं इसलिए एक लाख रुपये से अधिक कर बकाया वाले सभी मामलों में 70 प्रतिशत कर छूट प्रदान की जा रही है।
उन्होंने बताया कि फॉर्म-सी, फॉर्म-एफ, फॉर्म-एच, फॉर्म-ई-1, फॉर्म-ई-2, टैक्स इनवॉइस, वैट सी-4, वैट डी-1 एवं वैट डी-2 जैसे वैधानिक प्रपत्र समय पर जमा न होने के कारण बड़ी संख्या में कर बकाया लंबित हैं। ऐसे मामलों के समाधान के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यापारी अब आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में सक्षम है तो दस्तावेजों के सत्यापन के उपरांत उसे योजना के अनुसार लाभ दिया जाएगा। हालांकि यह लाभ फर्जी अथवा नकली फर्मों तथा जिन मामलों में आपराधिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है उन्हें नहीं मिलेगा।
डीईटीसी जगबीर सिंह ने बताया कि योजना के तहत कर छूट की विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत एक रुपये से एक लाख रुपये तक के बकाया मामलों में 100 प्रतिशत कर, ब्याज एवं जुर्माना माफ किया जाएगा जबकि अन्य मामलों में 70 प्रतिशत कर छूट प्रदान की जाएगी।
छह अधिनियमों के अंतर्गत कर छूट की श्रेणियां इस प्रकार हैं
1 रुपये से 1 लाख रुपये तक : 100 प्रतिशत छूट
1 लाख से अधिक से 10 लाख रुपये तक : 60 प्रतिशत छूट
10 लाख से अधिक से 1 करोड़ रुपये तक : 50 प्रतिशत छूट
1 करोड़ से अधिक से 10 करोड़ रुपये तक : 40 प्रतिशत छूट
10 करोड़ से अधिक से 30 करोड़ रुपये तक : 35 प्रतिशत छूट
30 करोड़ से अधिक से 60 करोड़ रुपये तक : 30 प्रतिशत छूट
60 करोड़ रुपये से अधिक : कोई कर छूट नहीं।