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Bhiwani News: नकीपुर में कैंसर ने छीना 43 लोगों का जीवन, 12 अब भी जूझ रहे
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लोहारू (भिवानी)। क्षेत्र के गांव नकीपुर में 2013 से अब तक कैंसर के चलते 43 लोगों की मौत हो चुकी है और वर्तमान में 12 लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण इसे भूमिगत जल की खराब गुणवत्ता से जोड़ रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग से विशेष जांच की मांग कर रहे हैं। गांव की कुल आबादी 2,600 है और मतदाता संख्या 1,926 है।
ग्रामीणों के अनुसार 2013 से 2018 के बीच करीब 33 लोगों की कैंसर से मौत हुई थी जबकि 2018 से अब तक करीब 10 लोगों की जान गई है। फिलहाल गांव में 12 कैंसर पीड़ित हैं, जिनका इलाज हिसार, रोहतक, जयपुर, बीकानेर, पिलानी, सीकर, चंडीगढ़, गुरुग्राम और मुंबई तक कराया जा रहा है।
ग्रामीण सतबीर शरण और सेवानिवृत्त सैनिक सुरेंद्र ने बताया कि गांव के पानी की हालत बेहद खराब है। पानी में 20–25 दिन के भीतर हरे व खाकी रंग की काई जम जाती है जिससे आरओ फिल्टर बार-बार जाम हो जाते हैं। पानी में नमक की मात्रा भी अत्यधिक बताई जा रही है। सेवानिवृत्त मुख्य अध्यापक प्रेम सिंह ने बताया कि बीते चार-पांच वर्षों में उन्होंने कई करीबी रिश्तेदार और मित्र कैंसर के कारण खो दिए। कई परिवारों में दो-दो या तीन-तीन सदस्यों की मौत हो चुकी है।
गांव में कैंसर से इनकी हो चुकी है मौत
ग्रामीणों के अनुसार कैंसर से जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है उनमें सतवीर, प्रभु, भरत सिंह, धर्मपाल, जीवण, दुलीचंद, मूलाराम, राम सिंह, टेकचंद, दिलीप, जगराम, श्योराण, धर्मा राम, कृष्णा, रामनाथ, चंदराम, लेखराम, रोहताश, विमला, वेदकौर, नारायणी, राजबाला और चंद्रकला शामिल हैं।
एक ही परिवार से रणवीर पायल, रामानंद पायल और रामनिवास पायल जबकि दूसरे परिवार से चंदन श्योराण व उनकी पत्नी बिमला की भी मौत हो चुकी है। इसी प्रकार भरत सिंह व दुलीचंद (दोनों भाई) तथा राजपाल व उनके पिता भी कैंसर के शिकार बताए जाते हैं।
इलाज के लिए दूर-दराज तक भटक रहे मरीज
ग्रामीणों ने बताया कि कैंसर पीड़ितों को इलाज के लिए हिसार, रोहतक, जयपुर, बीकानेर, पिलानी, सीकर, चंडीगढ़, गुरुग्राम और मुंबई तक जाना पड़ता है। आर्थिक और मानसिक परेशानियों के बावजूद इलाज के बाद भी पूर्ण स्वस्थ होने की कोई गारंटी नहीं है। वर्तमान में केहर सिंह, ईश्वर, जयवीर, भगवाना राम सहित करीब 12 लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
सात साल में गांव के दस लोगों की हुई मौत
नकीपुर गांव के सरपंच प्रतिनिधि विकास ने बताया कि पहले जहां बरसाती और नालियों का दूषित पानी जमा होता था वहां से अब पानी की निकासी कराकर गांव से बाहर जोहड़ में डलवा दिया गया है। साथ ही गांव में सीवरेज लाइन भी डाली जा चुकी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को गांव में कैंसर के बढ़ते मामलों की विशेष जांच करानी चाहिए, पानी की वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को उचित चिकित्सा व सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। सरपंच प्रतिनिधि विकास ने बताया कि 2018 के बाद से अब तक करीब 10 लोगों की कैंसर के कारण मृत्यु हो चुकी है।
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ग्रामीणों के अनुसार 2013 से 2018 के बीच करीब 33 लोगों की कैंसर से मौत हुई थी जबकि 2018 से अब तक करीब 10 लोगों की जान गई है। फिलहाल गांव में 12 कैंसर पीड़ित हैं, जिनका इलाज हिसार, रोहतक, जयपुर, बीकानेर, पिलानी, सीकर, चंडीगढ़, गुरुग्राम और मुंबई तक कराया जा रहा है।
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ग्रामीण सतबीर शरण और सेवानिवृत्त सैनिक सुरेंद्र ने बताया कि गांव के पानी की हालत बेहद खराब है। पानी में 20–25 दिन के भीतर हरे व खाकी रंग की काई जम जाती है जिससे आरओ फिल्टर बार-बार जाम हो जाते हैं। पानी में नमक की मात्रा भी अत्यधिक बताई जा रही है। सेवानिवृत्त मुख्य अध्यापक प्रेम सिंह ने बताया कि बीते चार-पांच वर्षों में उन्होंने कई करीबी रिश्तेदार और मित्र कैंसर के कारण खो दिए। कई परिवारों में दो-दो या तीन-तीन सदस्यों की मौत हो चुकी है।
गांव में कैंसर से इनकी हो चुकी है मौत
ग्रामीणों के अनुसार कैंसर से जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है उनमें सतवीर, प्रभु, भरत सिंह, धर्मपाल, जीवण, दुलीचंद, मूलाराम, राम सिंह, टेकचंद, दिलीप, जगराम, श्योराण, धर्मा राम, कृष्णा, रामनाथ, चंदराम, लेखराम, रोहताश, विमला, वेदकौर, नारायणी, राजबाला और चंद्रकला शामिल हैं।
एक ही परिवार से रणवीर पायल, रामानंद पायल और रामनिवास पायल जबकि दूसरे परिवार से चंदन श्योराण व उनकी पत्नी बिमला की भी मौत हो चुकी है। इसी प्रकार भरत सिंह व दुलीचंद (दोनों भाई) तथा राजपाल व उनके पिता भी कैंसर के शिकार बताए जाते हैं।
इलाज के लिए दूर-दराज तक भटक रहे मरीज
ग्रामीणों ने बताया कि कैंसर पीड़ितों को इलाज के लिए हिसार, रोहतक, जयपुर, बीकानेर, पिलानी, सीकर, चंडीगढ़, गुरुग्राम और मुंबई तक जाना पड़ता है। आर्थिक और मानसिक परेशानियों के बावजूद इलाज के बाद भी पूर्ण स्वस्थ होने की कोई गारंटी नहीं है। वर्तमान में केहर सिंह, ईश्वर, जयवीर, भगवाना राम सहित करीब 12 लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
सात साल में गांव के दस लोगों की हुई मौत
नकीपुर गांव के सरपंच प्रतिनिधि विकास ने बताया कि पहले जहां बरसाती और नालियों का दूषित पानी जमा होता था वहां से अब पानी की निकासी कराकर गांव से बाहर जोहड़ में डलवा दिया गया है। साथ ही गांव में सीवरेज लाइन भी डाली जा चुकी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को गांव में कैंसर के बढ़ते मामलों की विशेष जांच करानी चाहिए, पानी की वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को उचित चिकित्सा व सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। सरपंच प्रतिनिधि विकास ने बताया कि 2018 के बाद से अब तक करीब 10 लोगों की कैंसर के कारण मृत्यु हो चुकी है।
