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अत्यधिक ठंड से गेहूं और सरसों को नुकसान, समय रहते प्रबंधन जरूरी: डॉ. फोगाट
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बवानीखेड़ा के खेतों में मंगलवार सुबह छाई धुंध।
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भिवानी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. विनोद कुमार फोगाट ने किसानों को चेतावनी दी है कि जिले में लगातार अत्यधिक ठंड पड़ने से गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों में कई प्रकार की बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। उन्होंने कहा कि ठंड के प्रकोप से फसलों में वृद्धि रुक जाती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे उपज में गिरावट आती है।
डॉ. फोगाट ने किसानों को समय रहते वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि हल्की और बार-बार सतही सिंचाई करने से खेत का तापमान नियंत्रित रहता है और पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जहां संभव हो वहां स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का प्रयोग लाभकारी रहेगा। रात में हल्की सिंचाई करने से पाले से होने वाले नुकसान में भी काफी कमी आती है।
फसलों में होने वाली बीमारियां और उनके लक्षण
डॉ. फोगाट ने चेताया कि शीतलहर के दौरान काली रतुआ, सफेद रतुआ, लेट ब्लाइट, झुलसा रोग और अन्य फंगस बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। इससे फसलों के अंकुरण, वृद्धि, पुष्पण, दाना भराव, उपज और भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों को सलाह दी गई है कि फसलों की जड़ों और पत्तियों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से करें। रोग या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
सही दवाइयों और उर्वरकों का छिड़काव जरूरी
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि फसलों में बोर्डों मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव केवल कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार ही किया जाए। इसके साथ फास्फोरस और पोटाश युक्त उर्वरक लगाने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और जड़ों का विकास बेहतर होता है।
मौसम के पूर्वानुमान पर ध्यान रखें किसान
डॉ. फोगाट ने किसानों को सुझाव दिया कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान पर नियमित रूप से ध्यान दें और किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर तुरंत उपचार और सलाह लें। उन्होंने कहा कि समय पर सही प्रबंधन करने से ठंड से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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डॉ. फोगाट ने किसानों को समय रहते वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि हल्की और बार-बार सतही सिंचाई करने से खेत का तापमान नियंत्रित रहता है और पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जहां संभव हो वहां स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का प्रयोग लाभकारी रहेगा। रात में हल्की सिंचाई करने से पाले से होने वाले नुकसान में भी काफी कमी आती है।
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फसलों में होने वाली बीमारियां और उनके लक्षण
डॉ. फोगाट ने चेताया कि शीतलहर के दौरान काली रतुआ, सफेद रतुआ, लेट ब्लाइट, झुलसा रोग और अन्य फंगस बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। इससे फसलों के अंकुरण, वृद्धि, पुष्पण, दाना भराव, उपज और भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों को सलाह दी गई है कि फसलों की जड़ों और पत्तियों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से करें। रोग या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
सही दवाइयों और उर्वरकों का छिड़काव जरूरी
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक ने बताया कि फसलों में बोर्डों मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव केवल कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार ही किया जाए। इसके साथ फास्फोरस और पोटाश युक्त उर्वरक लगाने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और जड़ों का विकास बेहतर होता है।
मौसम के पूर्वानुमान पर ध्यान रखें किसान
डॉ. फोगाट ने किसानों को सुझाव दिया कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान पर नियमित रूप से ध्यान दें और किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर तुरंत उपचार और सलाह लें। उन्होंने कहा कि समय पर सही प्रबंधन करने से ठंड से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
