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दीक्षांत समारोह पेशेवर जीवन में प्रवेश का प्रतीक : सूर्यकांत
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सीबीएलयू में आयोजित पांचवां दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करते सुप्रीम को
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भिवानी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि दीक्षांत समारोह अकादमिक यात्रा का अंत नहीं बल्कि पेशेवर जीवन में प्रवेश का प्रतीक है। वे शनिवार को चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) में पांचवें दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे। समारोह में यूजी व पीजी के 408 विद्यार्थियों को डिग्रियां, 11 को पीएचडी की उपाधि और 36 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
दो घंटे की देरी से दोपहर एक बजे समारोह में पहुंचे न्यायमूर्ति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते कहा कि विश्वविद्यालय का जीवन पाठ्यक्रम और समय-सीमाओं से संचालित होता है जबकि पेशेवर जीवन में स्वतंत्र निर्णय लेने और अपना मार्ग स्वयं तय करने की क्षमता जरूरी होती है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे हरियाणा के राज्यपाल एवं कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि यह दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं बल्कि नए सपनों और जिम्मेदारियों को अपनाने का है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा को व्यावहारिक जीवन में उतारने और देश निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिग्री के बाद असली परीक्षा जीवन के मैदान में शुरू होती है। युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर देश की प्रगति में भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने बहुत कम समय में ही शिक्षा, अनुसंधान, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विश्वविद्यालय रोजगारपरक, गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
दीक्षांत समारोह कड़ी मेहनत का प्रमाण
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि कड़ी मेहनत का प्रमाण है। विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, कृत्रिम बुद्धिमता, मानसिक स्वास्थ्य एवं पंचकोश आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा नारी शक्ति वंदन महिला छात्र संसद में बेहतर प्रदर्शन की सराहना की। साथ ही कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों में सामाजिक समरसता व जागरूकता अभियान चलाकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ को बढ़ावा दिया जा रहा है। समारोह में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, जस्टिस रमेश चंद्र डिमरी, जस्टिस यशवीर सिंह राठौर, जस्टिस सूर्यप्रताप सिंह, जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल, जस्टिस सुदीप्ति शर्मा, जस्टिस कुलदीप तिवारी, जस्टिस एनएस शेखावत, जस्टिस त्रिभुवन दहिया, जस्टिस संजय वशिष्ठ, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय पाली के कुलगुरु प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार, पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स रोहतक के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य के अलावा विधायक घनश्याम सर्राफ, विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन शर्मा, डीसी साहिल गुप्ता, पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार औरर भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र कौशिक मौजूद रहे।
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दो घंटे की देरी से दोपहर एक बजे समारोह में पहुंचे न्यायमूर्ति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते कहा कि विश्वविद्यालय का जीवन पाठ्यक्रम और समय-सीमाओं से संचालित होता है जबकि पेशेवर जीवन में स्वतंत्र निर्णय लेने और अपना मार्ग स्वयं तय करने की क्षमता जरूरी होती है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे हरियाणा के राज्यपाल एवं कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि यह दिन केवल डिग्री प्राप्त करने का नहीं बल्कि नए सपनों और जिम्मेदारियों को अपनाने का है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा को व्यावहारिक जीवन में उतारने और देश निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिग्री के बाद असली परीक्षा जीवन के मैदान में शुरू होती है। युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर देश की प्रगति में भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने बहुत कम समय में ही शिक्षा, अनुसंधान, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विश्वविद्यालय रोजगारपरक, गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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दीक्षांत समारोह कड़ी मेहनत का प्रमाण
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि कड़ी मेहनत का प्रमाण है। विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, कृत्रिम बुद्धिमता, मानसिक स्वास्थ्य एवं पंचकोश आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा नारी शक्ति वंदन महिला छात्र संसद में बेहतर प्रदर्शन की सराहना की। साथ ही कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों में सामाजिक समरसता व जागरूकता अभियान चलाकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ को बढ़ावा दिया जा रहा है। समारोह में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, जस्टिस रमेश चंद्र डिमरी, जस्टिस यशवीर सिंह राठौर, जस्टिस सूर्यप्रताप सिंह, जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल, जस्टिस सुदीप्ति शर्मा, जस्टिस कुलदीप तिवारी, जस्टिस एनएस शेखावत, जस्टिस त्रिभुवन दहिया, जस्टिस संजय वशिष्ठ, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय पाली के कुलगुरु प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार, पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स रोहतक के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य के अलावा विधायक घनश्याम सर्राफ, विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन शर्मा, डीसी साहिल गुप्ता, पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार औरर भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र कौशिक मौजूद रहे।

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