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Bhiwani News: राज्यसभा में किरण चौधरी ने उठाया दवाइयों की अनियंत्रित कीमतों का मुद्दा
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भिवानी। राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी ने मंगलवार को सदन में देश में दवाइयों की अनियंत्रित कीमतों और उससे आम मरीजों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दवाइयों की बढ़ती कीमतों से मरीजों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है और महंगी दवाइयां आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
सदन में बोलते हुए किरण चौधरी ने कहा कि कई दवाइयों की निर्माण लागत केवल कुछ पैसे या कुछ रुपये प्रति गोली होती है लेकिन वही दवाइयां बाजार में 30 से 35 रुपये तक बेची जा रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार दवाइयों की वास्तविक खरीद लागत और मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच 50 से 350 गुना तक का अंतर पाया गया है जो दवा मूल्य निर्धारण प्रणाली में गंभीर विकृतियों को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को जेनेरिक दवाइयां लिखने के लिए बाध्य करने पर चर्चा हो रही है लेकिन केवल यह कदम पर्याप्त नहीं होगा। जब तक जेनेरिक दवाइयों के मुद्रित एमआरपी पर भी प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाएगा तब तक मरीजों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि कई मामलों में ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों के बीच कीमतों का अंतर 200 गुना तक पाया गया है जो आम नागरिकों के लिए अत्यंत महंगा है।
किरण चौधरी ने सरकार से आग्रह किया कि दवाइयों की कीमतों पर सख्त नियम लागू किए जाए, पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली विकसित की जाए और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को मजबूत किया जाए ताकि देश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सस्ती और सुलभ दवाइयां उपलब्ध हो सके। वहीं राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी मंगलवार को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिए गए ब्रेकफास्ट कार्यक्रम में भी शामिल हुईं।
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सदन में बोलते हुए किरण चौधरी ने कहा कि कई दवाइयों की निर्माण लागत केवल कुछ पैसे या कुछ रुपये प्रति गोली होती है लेकिन वही दवाइयां बाजार में 30 से 35 रुपये तक बेची जा रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार दवाइयों की वास्तविक खरीद लागत और मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच 50 से 350 गुना तक का अंतर पाया गया है जो दवा मूल्य निर्धारण प्रणाली में गंभीर विकृतियों को दर्शाता है।
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उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को जेनेरिक दवाइयां लिखने के लिए बाध्य करने पर चर्चा हो रही है लेकिन केवल यह कदम पर्याप्त नहीं होगा। जब तक जेनेरिक दवाइयों के मुद्रित एमआरपी पर भी प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाएगा तब तक मरीजों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि कई मामलों में ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों के बीच कीमतों का अंतर 200 गुना तक पाया गया है जो आम नागरिकों के लिए अत्यंत महंगा है।
किरण चौधरी ने सरकार से आग्रह किया कि दवाइयों की कीमतों पर सख्त नियम लागू किए जाए, पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली विकसित की जाए और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को मजबूत किया जाए ताकि देश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सस्ती और सुलभ दवाइयां उपलब्ध हो सके। वहीं राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी मंगलवार को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिए गए ब्रेकफास्ट कार्यक्रम में भी शामिल हुईं।