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Bhiwani News: दो साल से अधूरी पड़ी बरसाती पानी निकासी पाइपलाइन, ढाई हजार एकड़ फसल पर जलभराव का संकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:47 PM IST
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The stormwater drainage pipeline has been incomplete for two years, threatening waterlogging on 2,500 acres of crops.
दो साल से सड़क किनारे पड़े बरसाती पानी निकासी के लिए दबाए जाने वाले पाइप।
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भिवानी। जिले के गांव घुसकानी, गुजरानी, मित्ताथल, प्रेमनगर और तिगड़ाना की करीब ढाई हजार एकड़ कृषि भूमि को जलभराव से स्थायी राहत दिलाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा शुरू की गई पाइपलाइन परियोजना दो साल बाद भी अधूरी पड़ी है। विभाग की लेटलतीफी के कारण पिछले वर्ष भी खेतों में जलभराव हुआ जिससे किसानों की पकी फसलें बर्बाद हो गई थीं। हालांकि विभाग अब तक तीन में से केवल एक किलोमीटर क्षेत्र में ही पाइपलाइन दबा पाया है।
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सिंचाई विभाग ने इन गांवों की कृषि भूमि से अतिरिक्त बरसाती पानी की निकासी के लिए पहले ड्रेन का निर्माण कराया था लेकिन ड्रेन से आगे निकासी व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण हर बार ओवरफ्लो की स्थिति बनती रही और खेतों में पानी भर जाता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए दो करोड़ 46 लाख रुपये की लागत से सिंचाई परियोजना के तहत पाइपलाइन डालने की योजना बनाई गई थी।
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विभाग ने पिछले वर्ष मानसून से पहले पाइपलाइन डालने का कार्य शुरू किया लेकिन देरी के कारण केवल एक किलोमीटर लंबी पाइपलाइन ही बिछाई जा सकी। बारिश शुरू होते ही कार्य रोकना पड़ा और शेष पाइपलाइन अधूरी रह गई। इसके चलते पिछले वर्ष बरसाती पानी खेतों में जमा हो गया और करीब ढाई हजार एकड़ में तैयार फसलें नष्ट हो गईं। योजना के अनुसार खेतों का अतिरिक्त पानी तिगड़ाना ड्रेन से निगाना फीडर नहर में डाला जाना था लेकिन विभाग की सुस्ती से किसानों को फिर जलभराव का सामना करना पड़ा।

पिछले साल आग से जल गए सिंचाई विभाग के पाइप
सिंचाई विभाग ने करीब दो वर्ष पहले पाइप मंगवाकर साइट पर रख दिए थे लेकिन इन्हें दबाने का कार्य पिछले वर्ष मानसून से पहले शुरू किया गया। मई माह में फसल अवशेषों में लगी आग की चपेट में आने से तीन पाइप भी जल गए थे जिससे विभाग को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

समय पर पाइपलाइन डल जाती तो फसलें बच सकती थीं
सिंचाई विभाग द्वारा तीन किलोमीटर दायरे में एचडीपीई पाइपलाइन डाली जानी थी ताकि घुसकानी, गुजरानी, मित्ताथल, तिगड़ाना और प्रेमनगर गांवों के खेतों में जमा बरसाती पानी को निगाना नहर में प्रवाहित किया जा सके। लेकिन विभाग समय पर काम पूरा नहीं कर सका। इसके कारण पिछले वर्ष बरसाती पानी के जलभराव से करीब ढाई हजार एकड़ में फसल बर्बाद हो गई। यदि यह कार्य समय पर पूरा हो जाता तो किसानों की फसलें नुकसान से बच सकती थीं।

किसान लंबे समय से कर रहे हैं समाधान की मांग
इस क्षेत्र के किसान लंबे समय से जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। मानसून के दौरान ड्रेन टूटने या ओवरफ्लो होने पर किसानों को हर वर्ष अपनी फसलों को बचाने के लिए रेत के कट्टे लगाकर अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ती है जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है। पाइपलाइन डलने से जहां जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होगा वहीं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में इस पानी के उपयोग से भूमिगत जलस्तर बढ़ाने में भी मदद मिल सकेगी।


तिगड़ाना ड्रेन से निगाना फीडर नहर में पाइपलाइन डाले जाने का कार्य पिछले वर्ष बारिश के कारण बीच में रुक गया था। अब किसान खेतों में फसल निकालने का कार्य कर रहे है। फसल निकालने का कार्य पूरा होते ही पाइप लाइन दबाने का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। -राहुल, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, भिवानी।
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