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Bhiwani News: शहरी विद्यालयों में मिले ड्रॉपआउट के अधिक मामलेे, शिक्षा विभाग कर रहा सर्वे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:50 AM IST
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Urban schools have seen a higher number of dropouts, and the education department is conducting a survey.
शहर में राजकीय कन्या स्कूल का मुख्य गेट। 
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भिवानी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत पढ़ाई बीच में छोड़ चुके ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग की ओर से 19 जनवरी तक सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के रुझान सामने आने लगे हैं। सर्वे में पाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी दायरे में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अधिक है। इनमें विशेष रूप से प्रवासी मजदूर परिवारों और घुमंतू लोगों के बच्चे शामिल हैं।
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सर्वेक्षण कार्य में शिक्षा विभाग के साथ ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, स्कूल प्रमुख और शिक्षक भी शामिल किए गए हैं। स्कूल क्षेत्र के आसपास के दायरे में घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है। ऐसे बच्चे जो अब स्कूल जाना छोड़ चुके हैं उनके अभिभावकों से बातचीत कर पढ़ाई बीच में छोड़ने के कारण भी जाने जा रहे हैं। सर्वे तीन स्तरों पर किया जा रहा है पहले स्कूल स्तर फिर ब्लॉक स्तर और अंत में जिला स्तर की टीमें अपनी भूमिका निभा रही हैं। अभियान के तहत 19 वर्ष आयु वर्ग तक के ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की जा रही है और इनका पूरा विवरण एमआईएस पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है ताकि ऐसे बच्चों के लिए सरकार प्रभावी कदम उठा सके।
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किताबों को छोड़ बाल श्रम की तरफ धकेला जा रहा बचपन

सर्वे के दौरान ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं कि कुछ बच्चों के हाथों से मजबूरी ने किताबें छीन ली हैं और उनका बचपन बाल श्रम की भट्ठी में झोंका जा रहा है। ये बच्चे अपनी मजबूरी में पढ़ाई बीच में छोड़कर परिवार का खर्च उठाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और आजीविका कमाने में जुटे हैं। बाल श्रम को लेकर संबंधित विभाग कार्रवाई भी कर रहे हैं लेकिन इन बच्चों के सामने परिवार का पेट पालने की चिंता पढ़ाई और भविष्य से बड़ी बन गई है।



बच्चों से भीख मंगवाने के गिरोह चला रहे परिवार

शहर के सार्वजनिक स्थलों, पार्कों और फास्ट फूड की दुकानों के आसपास बाल भिखारियों की संख्या बढ़ी है। बच्चों से भीख मंगवाने का गिरोह और कोई नहीं बल्कि खुद उनके अभिभावक ही चला रहे हैं। शहर के कुछ स्लम क्षेत्रों में बाहर से आकर बसी अस्थायी बस्तियों में बच्चों को सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भीख मंगवाने के लिए भेजा जाता है। बाल कल्याण समिति द्वारा कई बार ऐसे बच्चों को रेस्क्यू किया गया लेकिन अभिभावकों को चेतावनी देने के बाद भी उनकी आदत में कोई सुधार नहीं आया है।





शीतकालीन अवकाश के दौरान ही विभाग का ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान का सर्वेक्षण कार्य चल रहा है। यह सर्वे 19 जनवरी तक किया जाना है। प्रत्येक विद्यालय से तीन शिक्षकों को इस कार्य पर लगाया गया है। इसमें प्राइमरी, माध्यमिक और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के आसपास के क्षेत्र में ऐसे बच्चों की पहचान की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। सर्वे की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी जिसके बाद संबंधित मामले में ठोस कदम उठाए जाएंगे। - डॉ. निर्मल दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी, भिवानी
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