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High Court: 38 एकड़ के लिए 12 हजार पेड़ कट रहे हैं, क्या आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे, पोता-पोती जीवित रहें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Thu, 29 Jan 2026 06:32 AM IST
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सार

हरियाणा के रोहतक में चल रहे पेड़ों के कटान पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 38 एकड़ के लिए 12 हजार पेड़ कट रहे हैं। क्या आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे और पोता-पोती जीवित रहें।

12000 trees cut down don't you want your children and grandchildren to survive said Punjab Haryana HC
high court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कॉमर्शियल सेक्टर के 38 एकड़ के लिए 12 हजार पेड़ कट रहे हैं। क्या आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे और पोता-पोती जीवित रहें। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम टिप्पणी रोहतक में चल रहे पेड़ों के कटान पर रोक लगाते हुए की। यह पेड़ बीते दो दशकों में प्राकृतिक रूप से घने जंगल के रूप में विकसित हुए हैं और अब इन्हें सेक्टर 6 के तौर पर विकसित किए जा रहे वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए काटा जा रहा है।

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मुख्य न्यायाधीश शील नागू की खंडपीठ ने इन पेड़ों को शहर के फेफड़े बताते हुए हरियाणा सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही हरियाणा सरकार और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से वृक्ष कटाई के लिए प्राप्त अनुमति का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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दरअसल, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए एक याची ने बताया कि सेक्टर 6 के लिए 2002 में भूमि अधिगृहीत की गई थी। इसके बाद भूमि का इस्तेमाल नहीं होने से यहां पाैधे उग गए और धीरे-धीरे यह प्राकृतिक रूप से विकसित वन बन गई। वर्तमान में इस भूमि पर 12,000 से अधिक पूर्ण विकसित पेड़ हैं। वन संरक्षण अधिनियम-1980 व हरियाणा सरकार की 18 अगस्त 2025 को जारी अधिसूचना के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्थित यह क्षेत्र वन भूमि की परिभाषा में आता है।

याची ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार व एचएसवीपी ने वन संरक्षण अधिनियम की धारा 2 का उल्लंघन करते हुए पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। इसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी भी नहीं ली गई। याची ने टीएन गोदावर्मन और एके शर्मा मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वन भूमि को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। केंद्र की मंजूरी के बिना एक भी पेड़ नहीं काटा जा सकता। याची ने कोर्ट में तस्वीरें भी पेश की जिसके अनुसार कटाई 19 जनवरी से जारी है। इसके बाद ने कोर्ट ने अगले आदेशों तक कटान पर रोक लगा दी।

याचिका पर भी उठाए सवाल, पूछा-एनजीटी में क्यों नहीं गएपीठ ने जनहित याचिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला पर्यावरण से जुड़ा है और याची ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में याचिका दाखिल क्यों नहीं की। कहा कि हरियाणा की अगस्त 2025 की अधिसूचना जिसमें वन क्षेत्र को परिभाषित किया गया था, का मामला पहले से एनजीटी के समक्ष लंबित है। मुख्य न्यायाधीश नागू ने शहर के केंद्र में मौजूद इस ग्रीन एरिया के नष्ट होने पर चिंता भी व्यक्त की। कहा कि याची पक्ष को सुनने के बाद कोर्ट तय करेगा कि क्या ऐसे मामलों पर अनुच्छेद 226 के तहत विचार किया जाना चाहिए या उन्हें एनजीटी को सौंप देना चाहिए।

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