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Chandigarh-Haryana News: जमीन का गलत मूल्यांकन किया तो एक लाख रुपये तक लगेगा जुर्माना
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प्रदेश सरकार ने मूल्यांकनकर्ताओं के लिए नई आचार संहिता लागू की, नियम तोड़ने पर पैनल से भी हटाया जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सरकारी जमीन और दूसरी सरकारी संपत्तियों का मूल्य तय करने वाले पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ताओं के लिए नई आचार संहिता लागू कर दी है। इसका उद्देश्य जमीन का सही, निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात की गुंजाइश न रहे। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यदि कोई मूल्यांकनकर्ता नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे पैनल से हटाया जा सकता है। इसके अलावा उसकी फीस जब्त की जा सकती है और उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
नई व्यवस्था के तहत हर मूल्यांकनकर्ता को काम शुरू करने से पहले यह लिखित रूप से बताना होगा कि उसका उस जमीन या संबंधित व्यक्ति से किसी तरह का हितों का टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) नहीं है। साथ ही उसे जमीन के मूल्यांकन से जुड़े सभी केंद्रीय और राज्य सरकार के कानूनों और नियमों का पालन करना होगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि जानबूझकर जमीन का कम या ज्यादा मूल्य बताना, गलत या भ्रामक रिपोर्ट तैयार करना, फर्जी बिल लगाना, समय पर रिपोर्ट जमा न करना या सरकारी अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करना गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी मूल्यांकनकर्ता का पंजीकरण सेबी, आरबीआई, आयकर विभाग, एसबीआई या किसी अन्य संबंधित नियामक संस्था द्वारा रद्द या निलंबित कर दिया जाता है तो उसे स्वतः ही सरकारी पैनल से भी हटा दिया जाएगा।
सरकार ने शिकायतों की जांच के लिए भी व्यवस्था बनाई है। शिकायत मिलने पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नई नीति से जमीन और सरकारी संपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का भरोसा मजबूत होगा। पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ता वे विशेषज्ञ होते हैं जिन्हें सरकार या कोई सरकारी संस्था अधिकृत करती है। इनका काम किसी जमीन, भवन या दूसरी संपत्ति की वास्तविक बाजार कीमत का आकलन करना होता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सरकारी जमीन और दूसरी सरकारी संपत्तियों का मूल्य तय करने वाले पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ताओं के लिए नई आचार संहिता लागू कर दी है। इसका उद्देश्य जमीन का सही, निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात की गुंजाइश न रहे। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यदि कोई मूल्यांकनकर्ता नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे पैनल से हटाया जा सकता है। इसके अलावा उसकी फीस जब्त की जा सकती है और उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
नई व्यवस्था के तहत हर मूल्यांकनकर्ता को काम शुरू करने से पहले यह लिखित रूप से बताना होगा कि उसका उस जमीन या संबंधित व्यक्ति से किसी तरह का हितों का टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) नहीं है। साथ ही उसे जमीन के मूल्यांकन से जुड़े सभी केंद्रीय और राज्य सरकार के कानूनों और नियमों का पालन करना होगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि जानबूझकर जमीन का कम या ज्यादा मूल्य बताना, गलत या भ्रामक रिपोर्ट तैयार करना, फर्जी बिल लगाना, समय पर रिपोर्ट जमा न करना या सरकारी अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करना गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी मूल्यांकनकर्ता का पंजीकरण सेबी, आरबीआई, आयकर विभाग, एसबीआई या किसी अन्य संबंधित नियामक संस्था द्वारा रद्द या निलंबित कर दिया जाता है तो उसे स्वतः ही सरकारी पैनल से भी हटा दिया जाएगा।
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सरकार ने शिकायतों की जांच के लिए भी व्यवस्था बनाई है। शिकायत मिलने पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नई नीति से जमीन और सरकारी संपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का भरोसा मजबूत होगा। पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ता वे विशेषज्ञ होते हैं जिन्हें सरकार या कोई सरकारी संस्था अधिकृत करती है। इनका काम किसी जमीन, भवन या दूसरी संपत्ति की वास्तविक बाजार कीमत का आकलन करना होता है।
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