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Chandigarh-Haryana News: भ्रष्टाचार के आरोपियों को जमानत के बाद पुरानी जगह पर न दी जाए तैनाती
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-एसीबी ने सरकार को दिया सुझाव, 35 आरोपियों की सूची भी सौंपी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए कर्मचारियों व अधिकारियों को दोबारा उसी जिले या कार्यक्षेत्र में तैनात नहीं किया जाना चाहिए। यह सुझाव हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने प्रदेश सरकार को दिया है।
सूत्रों के अनुसार एसीबी ने सीएम नायब सिंह सैनी को ऐसे 35 अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची सौंपी है जो जमानत पर बाहर आने के बाद पुराने जिलों में ही कार्यरत हैं। ब्यूरो का मानना है कि ऐसी तैनाती से जांच की निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। सुझाव दिया कि यदि किसी कर्मचारी को लंबित जांच के दौरान बहाल किया जाए तो उसकी पोस्टिंग कम से कम 100 किलोमीटर दूर किसी अन्य जिले में की जानी चाहिए।
पांच महीने में 68 को किया गया गिरफ्तार
एसीबी प्रमुख अरशिंदर चावला ने बताया कि इसी साल पांच महीने के भीतर 67 मामलों में ग्रुप-बी के 8 अधिकारी, ग्रुप-सी के 51
कर्मचारी और नौ निजी व्यक्ति गिरफ्तार किए गए हैं। इस समयावधि में भ्रष्टाचार से जुड़े 40 विभागीय मामले दर्ज किए गए। ये मामले नगर योजनाकार, तहसीलदार, बीडीपीओ, वरिष्ठ लेखा अधिकारी और चिकित्सक जैसे पदों पर तैनात अधिकारियों को लेकर थे। 36 मामलों में जांच के बाद 63 राजपत्रित और 10 अराजपत्रित कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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1100 करोड़ तक पहुंच सकता है बैंक घोटाला
चावला ने बताया कि आईडीएफसी फर्स्ट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़ा घोटाला 1,000 से 1,100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस मामले की शुरुआत में 50 करोड़ रुपये के घोटाले की एफआईआर दर्ज हुई थी। सभी मामलों की एक ही एफआईआर दर्ज है। केंद्रीय जांच एजेंसियां अलग से जांच कर रही हैं।
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए कर्मचारियों व अधिकारियों को दोबारा उसी जिले या कार्यक्षेत्र में तैनात नहीं किया जाना चाहिए। यह सुझाव हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने प्रदेश सरकार को दिया है।
सूत्रों के अनुसार एसीबी ने सीएम नायब सिंह सैनी को ऐसे 35 अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची सौंपी है जो जमानत पर बाहर आने के बाद पुराने जिलों में ही कार्यरत हैं। ब्यूरो का मानना है कि ऐसी तैनाती से जांच की निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। सुझाव दिया कि यदि किसी कर्मचारी को लंबित जांच के दौरान बहाल किया जाए तो उसकी पोस्टिंग कम से कम 100 किलोमीटर दूर किसी अन्य जिले में की जानी चाहिए।
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पांच महीने में 68 को किया गया गिरफ्तार
एसीबी प्रमुख अरशिंदर चावला ने बताया कि इसी साल पांच महीने के भीतर 67 मामलों में ग्रुप-बी के 8 अधिकारी, ग्रुप-सी के 51
कर्मचारी और नौ निजी व्यक्ति गिरफ्तार किए गए हैं। इस समयावधि में भ्रष्टाचार से जुड़े 40 विभागीय मामले दर्ज किए गए। ये मामले नगर योजनाकार, तहसीलदार, बीडीपीओ, वरिष्ठ लेखा अधिकारी और चिकित्सक जैसे पदों पर तैनात अधिकारियों को लेकर थे। 36 मामलों में जांच के बाद 63 राजपत्रित और 10 अराजपत्रित कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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चावला ने बताया कि आईडीएफसी फर्स्ट और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़ा घोटाला 1,000 से 1,100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस मामले की शुरुआत में 50 करोड़ रुपये के घोटाले की एफआईआर दर्ज हुई थी। सभी मामलों की एक ही एफआईआर दर्ज है। केंद्रीय जांच एजेंसियां अलग से जांच कर रही हैं।