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IDFC बैंक घोटाला: आरोपी आईएएस अधिकारी की पत्नी का है करोड़ों का कारोबार, संपत्ति विवरण में चौंकाने वाले खुलासे

अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Sat, 20 Jun 2026 03:43 PM IST
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सार

यह जानकारी IAS राम कुमार सिंह ने 2025 में अपने संपत्ति विवरण में दी है। संपत्ति विवरण के अनुसार उनके परिवार की अधिकांश अचल संपत्तियां हिंदू अविभाजित परिवार के नाम पर दर्ज हैं।

Accused IAS officer wife runs a business worth crores IDFC Bank Scam
बैंक घोटाले में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंचकूला नगर निगम में करीब 80 करोड़ के गबन में सीबीआई की गिरफ्त में आए हरियाणा कैडर के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। उनकी पत्नी कारोबारी हैं। वे पेट्रोल पंप, बियर फैक्टरी (माइक्रो ब्रेवरी), रेस्टोरेंट चलाने के साथ रेंटल प्रोजेक्ट, कृषि भूमि व संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का काम करती हैं। 


यह जानकारी राम कुमार सिंह ने 2025 में अपने संपत्ति विवरण में दी है। संपत्ति विवरण के अनुसार उनके परिवार की अधिकांश अचल संपत्तियां हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ ) के नाम पर दर्ज हैं। दस्तावेज में दर्शाई गई संपत्तियों का वर्तमान अनुमानित मूल्य लगभग 3.2 करोड़ रुपये है। इनमें से एचयूएफ संपत्तियों की कीमत करीब 2.43 करोड़ है। 
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एक निजी संपत्ति लगभग 80 लाख रुपये की है। दस्तावेजों के मुताबिक कुरुक्षेत्र की पिपली तहसील में 6 मरला की निजी संपत्ति रिहायशी-कम-दुकान उन्हें परिवार से उपहार में प्राप्त हुई है। राम कुमार सिंह को इन संपत्तियों से हर साल लगभग 19 लाख रुपये की आय होती है। उनकी पत्नी कई साल से स्वतंत्र व्यवसाय कर रही हैं। उनकी अपनी संपत्तियां और देनदारियां भी हैं। हालांकि राम कुमार सिंह ने विवरण में पत्नी और बेटों की व्यक्तिगत संपत्तियों का मूल्य या विस्तृत ब्योरा नहीं दिया है। 
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145 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले में गिरफ्तार पूर्व आईएएस राम कुमार सिंह और अधीक्षक प्रिंस शर्मा को विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। सीबीआई ने पूछताछ के लिए रिमांड मांगा था, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

सीबीआई के अनुसार, राम कुमार सिंह ने आयुक्त रहते हुए सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक नई बैंक शाखा में खाता खुलवाया और 100 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी फंड वहां ट्रांसफर करने की मंजूरी दी। यह कार्रवाई वित्त विभाग के नियमों के खिलाफ थी। जांच में पता चला है कि इस साजिश के बदले सिंह को अवैध लाभ मिला। कई चेक उनके हस्ताक्षर से जारी किए गए और राशि का उपयोग तय उद्देश्य के अलावा अन्य कामों में किया गया।

प्रिंस शर्मा का मोबाइल नंबर बैंक खातों के दस्तावेजों में दर्ज मिला है। वह इन विभागों में सीधे तैनात नहीं थे, फिर भी बैंकिंग गतिविधियों और कन्फर्मेशन कॉल्स में उनकी भूमिका सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि उन्होंने कई बार अपना सिम कार्ड अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि यह मामला बहुस्तरीय वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी बैंकिंग प्रक्रियाओं और शेल कंपनियों से जुड़ा है। आरोपियों के मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण बातचीत और डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट पाए गए हैं। 
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