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Chandigarh-Haryana News: गर्भवती महिला के साथ जीवनसाथी की भी एचआईवी व सिफलिस की होगी जांच
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स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल, मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण को रोकना है मकसद
वर्ष 2026-27 के लिए 47.16 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में एचआईवी व एड्स के खिलाफ लड़ाई को और तेज करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की कार्यकारी समिति की बैठक में तय हुआ कि गर्भवती महिलाओं और उनके जीवनसाथी की एचआईवी और सिफलिस की एक साथ जांच की जाएगी। यह पहल मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण को पूरी तरह रोकने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में मदद करेगी।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस कदम को एक बड़ी सकारात्मक पहल बताया। इस पहल से हर साल लगभग 12 लाख संयुक्त जांच की आवश्यकता होगी जिससे एचआईवी और सिफलिस के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 47.16 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित करने का निर्णय लिया गया। इसमें आईसीटीसी-बीएसडी सेवाओं, एआरटी (देखभाल, सहयोग एवं उपचार) और एसटीआई सेवाओं के लिए आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही एक नया वेब-आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा जिसके माध्यम से मरीजों को वॉइस मैसेज, एसएमएस अलर्ट और फॉलोअप रिमाइंडर भेजे जाएंगे। इससे उपचार में निरंतरता बनी रहेगी और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
पंचकूला में खुलेगी एचआईवी वायरल लोड की दूसरी लैब
बैठक में बताया गया कि राज्य में दूसरी एचआईवी वायरल लोड लैब को मंजूरी मिल चुकी है। इसे एक माह के भीतर पंचकूला में शुरू किया जाएगा। वर्तमान में पीजीआईएमएस रोहतक स्थित एकमात्र लैब 17 जिलों को सेवाएं दे रही है जबकि 5 जिले नई दिल्ली स्थित आईएचबीएएस से जुड़े हैं। पंचकूला में नई लैब शुरू होने से जिलों को तीन वायरल लोड लैब के बीच दोबारा से वर्गीकृत किया जाएगा। इससे जांच रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय कम होगा। डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस बैठक में जागरूकता अभियानों और विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर भी जोर दिया। सभी बड़े संस्थानों में एचआईवी/एड्स कार्यस्थल नीति लागू करने और सरकारी तथा निजी कॉलेजों में रेड रिबन क्लब स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया।
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वर्ष 2026-27 के लिए 47.16 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में एचआईवी व एड्स के खिलाफ लड़ाई को और तेज करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की कार्यकारी समिति की बैठक में तय हुआ कि गर्भवती महिलाओं और उनके जीवनसाथी की एचआईवी और सिफलिस की एक साथ जांच की जाएगी। यह पहल मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण को पूरी तरह रोकने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में मदद करेगी।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस कदम को एक बड़ी सकारात्मक पहल बताया। इस पहल से हर साल लगभग 12 लाख संयुक्त जांच की आवश्यकता होगी जिससे एचआईवी और सिफलिस के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 47.16 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित करने का निर्णय लिया गया। इसमें आईसीटीसी-बीएसडी सेवाओं, एआरटी (देखभाल, सहयोग एवं उपचार) और एसटीआई सेवाओं के लिए आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही एक नया वेब-आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा जिसके माध्यम से मरीजों को वॉइस मैसेज, एसएमएस अलर्ट और फॉलोअप रिमाइंडर भेजे जाएंगे। इससे उपचार में निरंतरता बनी रहेगी और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
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पंचकूला में खुलेगी एचआईवी वायरल लोड की दूसरी लैब
बैठक में बताया गया कि राज्य में दूसरी एचआईवी वायरल लोड लैब को मंजूरी मिल चुकी है। इसे एक माह के भीतर पंचकूला में शुरू किया जाएगा। वर्तमान में पीजीआईएमएस रोहतक स्थित एकमात्र लैब 17 जिलों को सेवाएं दे रही है जबकि 5 जिले नई दिल्ली स्थित आईएचबीएएस से जुड़े हैं। पंचकूला में नई लैब शुरू होने से जिलों को तीन वायरल लोड लैब के बीच दोबारा से वर्गीकृत किया जाएगा। इससे जांच रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय कम होगा। डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस बैठक में जागरूकता अभियानों और विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर भी जोर दिया। सभी बड़े संस्थानों में एचआईवी/एड्स कार्यस्थल नीति लागू करने और सरकारी तथा निजी कॉलेजों में रेड रिबन क्लब स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया।