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मालिक की मौत के बाद संपत्ति खरीदने का सह वारिस को पहला हक : हाईकोर्ट
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-अंबाला की निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
-अधिकार छोड़ने की दलील यूं ही नहीं कर सकते स्वीकार, होना चाहिए पुख्ता सबूत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए साफ किया है कि मालिक की मृत्यु के बाद संपत्ति कानून के अनुसार वारिसों में बंटती है। यदि कोई सह वारिस संपत्ति बेचना चाहता है तो ऐसे मामलों में परिवार के अन्य सह वारिसों को बाहरी व्यक्ति से पहले संपत्ति खरीदने का कानूनी अधिकार होता है।
जस्टिस दीप पन्नू ने यह टिप्पणी एक अपील खारिज करते हुए की और निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराया। अंबाला का एक मकान पहले तुला राम का था। उन्होंने वसीयत करके यह मकान अपनी पत्नी पूर्णी देवी को दे दिया। तुला राम की मौत के बाद पूर्णी देवी इस मकान की पूरी मालिक बनीं। 1979 में उनकी मृत्यु के बाद यह मकान उनके सभी कानूनी वारिसों में साझा हो गया। इसी दौरान कुछ वारिसों ने बिना बताए अपना हिस्सा एक बाहरी व्यक्ति को बेच दिया। परिवार के एक दूसरे वारिस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि पहले उसे खरीदने का मौका मिलना चाहिए था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला मालिक की मौत के बाद सर्वाइवरशिप का नियम लागू नहीं होता। संपत्ति वारिसों को उत्तराधिकार से मिलती है और इसलिए सह वारिसों को पहले खरीदने का अधिकार मिलता है। खरीदार ने कहा कि वादी को बिक्री की जानकारी थी और उसने अपना हक छोड़ दिया था। कोर्ट ने कहा कानूनी अधिकार ऐसे ही खत्म नहीं हो जाते। अधिकार छोड़ने के लिए पक्का और साफ सबूत होना जरूरी है, सिर्फ मौखिक दावा काफी नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह अधिकार किसी परंपरा पर नहीं बल्कि सीधे कानून से मिलता है। इसलिए यह शहरों की संपत्ति पर भी लागू होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में किसी सह वारिस को नजरअंदाज कर हिस्सा बेचना कानून के खिलाफ है और ऐसा होने पर बिक्री को चुनौती दी जा सकती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए साफ किया है कि मालिक की मृत्यु के बाद संपत्ति कानून के अनुसार वारिसों में बंटती है। यदि कोई सह वारिस संपत्ति बेचना चाहता है तो ऐसे मामलों में परिवार के अन्य सह वारिसों को बाहरी व्यक्ति से पहले संपत्ति खरीदने का कानूनी अधिकार होता है।
जस्टिस दीप पन्नू ने यह टिप्पणी एक अपील खारिज करते हुए की और निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराया। अंबाला का एक मकान पहले तुला राम का था। उन्होंने वसीयत करके यह मकान अपनी पत्नी पूर्णी देवी को दे दिया। तुला राम की मौत के बाद पूर्णी देवी इस मकान की पूरी मालिक बनीं। 1979 में उनकी मृत्यु के बाद यह मकान उनके सभी कानूनी वारिसों में साझा हो गया। इसी दौरान कुछ वारिसों ने बिना बताए अपना हिस्सा एक बाहरी व्यक्ति को बेच दिया। परिवार के एक दूसरे वारिस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि पहले उसे खरीदने का मौका मिलना चाहिए था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला मालिक की मौत के बाद सर्वाइवरशिप का नियम लागू नहीं होता। संपत्ति वारिसों को उत्तराधिकार से मिलती है और इसलिए सह वारिसों को पहले खरीदने का अधिकार मिलता है। खरीदार ने कहा कि वादी को बिक्री की जानकारी थी और उसने अपना हक छोड़ दिया था। कोर्ट ने कहा कानूनी अधिकार ऐसे ही खत्म नहीं हो जाते। अधिकार छोड़ने के लिए पक्का और साफ सबूत होना जरूरी है, सिर्फ मौखिक दावा काफी नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह अधिकार किसी परंपरा पर नहीं बल्कि सीधे कानून से मिलता है। इसलिए यह शहरों की संपत्ति पर भी लागू होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में किसी सह वारिस को नजरअंदाज कर हिस्सा बेचना कानून के खिलाफ है और ऐसा होने पर बिक्री को चुनौती दी जा सकती है।
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