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590 करोड़ का फ्राॅड: मनीष जिंदल ने बेटे के साथ मिलकर बिछाया फर्जी फर्मों का जाल, ऐसे की सरकारी धन की बंदरबांट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 02 Mar 2026 09:11 AM IST
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सार

आईएएस अधिकारियों का करीबी मनीष जिंदल पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कारोबारियों में भी अच्छी पैठ रखता है। आरोप है कि उसने पूरे प्रकरण में अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से फर्जी फर्मों में ट्रांसफर कराया।

Mohali businessman Manish Jindal arrested 590 crore fraud case from Haryana govt account in IDFC First Bank
आईडीएफसी बैंक - फोटो : फाइल
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विस्तार

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खातों से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में शनिवार को गिरफ्तार किए गए मोहाली निवासी कारोबारी मनीष जिंदल का नाम केंद्र में आ गया है। 

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राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच के अनुसार मनीष जिंदल अपने बेटे पवन जिंदल के साथ मिलकर साजिश रचता, फर्जी फर्मों का जाल बिछाकर सरकारी राशि की बंदरबांट करता और बदले में करोड़ों रुपये व महंगे सामान लेता था। वह धोखाधड़ी के धन का हिस्सा इसमें शामिल अन्य लोगों तक भी पहुंचाता था। उसके जानकार आईएएस अधिकारियों व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच तेज हो गई है। एसीबी ने मनीष को पंचकूला कोर्ट में पेश कर 10 दिन का रिमांड मांगा। हालांकि अदालत ने उसका पांच दिन का रिमांड दिया है।
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आईएएस अधिकारियों का करीबी मनीष जिंदल पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कारोबारियों में भी अच्छी पैठ रखता है। आरोप है कि उसने पूरे प्रकरण में अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी धन को सुनियोजित तरीके से फर्जी फर्मों में ट्रांसफर कराया। इसी तरह कई ज्वेलर्स के खातों में राशि ट्रांसफर करवाई। इसके एवज में उसने करोड़ों रुपये और महंगी वस्तुएं लीं। मनीष अपने सहयोगी हिस्सेदारों तक भी उनका हिस्सा पहुंचाता था। इनमें कुछ आईएएस अधिकारियों के भी नाम आ रहे हैं।

इस तरह से घुमाई सरकारी खातों की राशि

एसीबी की जांच के अनुसार स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट लिमिटेड फर्म इस साजिश का मुख्य माध्यम बनी है। सरकारी खातों से रकम पहले इस फर्म के खाते में डाली गई और फिर वहां से अलग-अलग निजी फर्मों, व्यक्तियों और प्रभावशाली सहयोगियों के खातों में भेज दी गई। सूत्रों का दावा है कि धोखाधड़ी की राशि को ज्वेलर्स के खातों में ट्रांसफर करवाकर सोना खरीदा जाता था ताकि नकदी को सुरक्षित और ट्रैकिंग से दूर रखा जा सके।

आईएएस नेटवर्क की जांच शुरू

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों को बोगस फर्मों के बैंक खातों के विवरण भेजे गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये गलत खातों में ट्रांसफर हुए। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण से आरोपियों और बैंक अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क के स्पष्ट संकेत मिले हैं। एसीबी पता लगा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में किन-किन अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका रही है। खासकर प्रभावशाली नामों की गहनता से जांच चल रही है। हालांकि अभी तक किसी आईएएस अधिकारी के खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं लेकिन मनीष जिंदल के करीबी संबंधों के एंगल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

आरोपियों से जुड़े कारोबारियों की बन रही सूची

एसीबी मनीष जिंदल से गहन पूछताछ कर धन के प्रवाह, लाभार्थियों की पहचान और खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों का विवरण जुटा रही है। क्या गबन की राशि का इस्तेमाल नेटवर्क मजबूत करने और प्रभाव बढ़ाने के लिए किया गया। एसीबी इस मामले से जुड़े 1800 बैंक खातों को फ्रीज करवाने के बाद आरोपियों के साथ जुड़े कारोबारियों की सूची भी तैयार कर रही है।

सिर्फ बैंकिंग गड़बड़ी नहीं, बल्कि बहुस्तरीय वित्तीय साजिश

एसीबी की ओर से अदालत में पेश किए गए रिमांड पेपर के अनुसार जांच अधिकारी का मानना है कि यह मामला केवल बैंकिंग गड़बड़ी नहीं बल्कि बहुस्तरीय वित्तीय साजिश का संकेत देता है। इसमें फर्जी दस्तावेज, बोगस फर्में, बैंक संपर्क और प्रभावशाली रिश्तों का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया। अब नजर इस बात पर टिकी है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद इस सनसनीखेज मामले की आंच किन-किन प्रभावशाली चेहरों तक पहुंचती है।

नरेश बुवानी से सात घंटे पूछताछ

एसीबी ने हरियाणा विकास एवं पंचायत निदेशक कार्यालय में तैनात अधीक्षक नरेश बुवानी को गिरफ्तार करने के बाद सात घंटे पूछताछ की। एसीबी की टीम विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बार-बार सामने आ रहे आईएएस अधिकारियों को लेकर नरेश से सवाल पूछ रही है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में नरेश सभी आरोपों से इन्कार करता रहा है।

एसीबी : चंडीगढ़ के अभिषेक सिंगला से आपकी जान-पहचान कैसे हुई?
नरेश :
आईटीसी सेक्टर-66 में मेरा एक प्लॉट था। उसे खरीदने के सिलसिले में अभिषेक खुद मिलने आया था। 2025 में प्लॉट बिक्री पर सहमति बनी।

एसीबी : आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के खाते से भारी धोखाधड़ी हुई है। अभिषेक का सीधा संबंध बताया जा रहा है। विभाग की वित्तीय निगरानी में आपकी भूमिका क्या थी?
नरेश
: मेरा इस धोखाधड़ी से कोई संबंध नहीं है। प्लॉट की खरीद-फरोख्त के अलावा अभिषेक से कोई ताल्लुक नहीं रहा।

एसीबी : क्या अभिषेक की स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट फर्म के जरिए आपने अपने निजी खातों में राशि ली। जबकि फर्म को जांच में फर्जी बताया गया है?
नरेश :
मैंने प्लॉट बेचा और भुगतान उसकी पंजीकृत फर्म से आया। मुझे नहीं पता था कि फर्म फर्जी हो सकती है। मुझे केवल अपने वैध भुगतान से मतलब था।

एसीबी : आपके और बेटी के खातों में करोड़ों रुपये क्यों ट्रांसफर हुए?
नरेश :
जितनी राशि में प्लॉट बेचा गया उतनी ही रकम ली गई। सभी दस्तावेज अदालत में पेश कर चुका हूं। गाड़ी भी अपने पैसे की खरीदी थी।

एसीबी : क्या आपने अभिषेक और ऋषभ की अधिकारियों से मीटिंग करवाई?
नरेश :
प्लॉट के सौदे के दौरान कुछ अधिकारियों से सिफारिश की बात हुई थी लेकिन किसी औपचारिक बैठक जैसी कोई बात नहीं है।

ट्राई सिटी के बाहर गुप्त स्थानों पर होती थीं बैठकें

सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण को लेकर शुरुआत से अंत कर ट्राई सिटी में किसी बिचौलिए, बैंक कर्मी, अधिकारी या निजी व्यक्तियों की बैठक नहीं हुई। इसके लिए आरोपी ट्राई सिटी के बाहर गुप्त स्थानों पर मिलते थे ताकि गलती से भी उन्हें कोई स्टाफ या वहां आने-जाने वाला व्यक्ति पहचान न सके। यह भी बताया जा रहा है कि प्रभावशाली अधिकारियों की तरफ से उनके नुमाइंदे जाते थे और आवश्यकता पड़ने पर अपने ही फोन से बातचीत करवाते थे।

रिभव, अभिषेक और अभय की निशानदेही पर छापेमारी

पूर्व बैंक मैनेजर रिभव ऋषि, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट लिमिटेड फर्म के मालिक अभिषेक और उसके जीजा अभय कुमार की निशानदेही पर एसीबी की अलग-अलग टीमें लगातार विभिन्न स्थानों पर छापे डाल रही हैं। टीमें दस्तावेजों के अलावा डिजिटल साक्ष्य भी जुटा रही हैं। इन आरोपियों के कई करीबियों और दोस्तों से भी एसीबी जानकारी हासिल कर रही है। चार मार्च को कोर्ट में पेशी के दौरान एसीबी दोबारा रिभव, अभिषेक और अभय के रिमांड की मांग कर सकती है।

60 से अधिक लोगों से पूछताछ, इनमें 22 सरकारी

सूत्रों के अनुसार एसीबी की अलग-अलग टीमों ने मुकदमा दर्ज करने के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में तकरीबन 60 से अधिक लोगों से पूछताछ कर ली है। इनमें 22 से अधिक सरकारी कर्मचारी हैं जो हरियाणा स्कूल शिक्षा परिषद परियोजना (एचएसएसपीपी), हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल), हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) विकास एवं पंचायत विभाग (एचपीएमएमजी), नगर निगम पंचकूला में तैनात हैं। रविवार को भी आठ से 10 कर्मचारियों से गुप्त पूछताछ हुई है।

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