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एमएसएमई पोर्टल में खामियां : आयोग ने सुधार के दिए निर्देश, देरी पर मुआवजा तय
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने एमएसएमई निदेशालय के ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत सुधारने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि पहले भी इस संबंध में सुझाव दिए गए थे लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
आयोग के अनुसार पोर्टल पर तकनीकी खामियों के कारण स्वीकृत मामलों की जानकारी अधिकारियों को नहीं मिल पाती जिससे भुगतान और अन्य प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। इसके चलते आवेदकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। एक मामले में आवेदक को 45 दिन की तय समय सीमा के बजाय करीब दो साल बाद लाभ मिल पाया जिसे आयोग ने नियमों के विपरीत माना है।
आयोग ने साफ कहा कि तकनीकी दिक्कतों या पोर्टल बदलाव के बहाने स्वीकार नहीं किए जा सकते। विभाग की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे किसी भी आवेदन में अनावश्यक देरी न हो। आयोग ने संबंधित आवेदक को 10 हजार रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। यह राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जा सकती है। साथ ही पोर्टल में सुधार कर निगरानी मजबूत करने और 15 अप्रैल 2026 तक कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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चंडीगढ़। हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने एमएसएमई निदेशालय के ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत सुधारने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि पहले भी इस संबंध में सुझाव दिए गए थे लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
आयोग के अनुसार पोर्टल पर तकनीकी खामियों के कारण स्वीकृत मामलों की जानकारी अधिकारियों को नहीं मिल पाती जिससे भुगतान और अन्य प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। इसके चलते आवेदकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। एक मामले में आवेदक को 45 दिन की तय समय सीमा के बजाय करीब दो साल बाद लाभ मिल पाया जिसे आयोग ने नियमों के विपरीत माना है।
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आयोग ने साफ कहा कि तकनीकी दिक्कतों या पोर्टल बदलाव के बहाने स्वीकार नहीं किए जा सकते। विभाग की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे किसी भी आवेदन में अनावश्यक देरी न हो। आयोग ने संबंधित आवेदक को 10 हजार रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। यह राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जा सकती है। साथ ही पोर्टल में सुधार कर निगरानी मजबूत करने और 15 अप्रैल 2026 तक कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा गया है।