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Chandigarh-Haryana News: आरटीआई के दायरे में डीआईटीएस, सूचना नहीं छिपा सकेंगे
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- डीसी के नियंत्रण वाली सोसायटी का रिकॉर्ड मांगे जाने पर उपलब्ध कराना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने अपने फैसले में कहा कि जिला सूचना प्रौद्योगिकी सोसायटी (डीआईटीएस) से जुड़ी सूचना आरटीआई अधिनियम के दायरे में आएगी। उपायुक्त के पास डीआईटीएस का प्रशासनिक नियंत्रण है। यह कहकर सूचना देने से मना नहीं किया जा सकता है कि वह पंजीकृत सोसायटी है। यह फैसला हरियाणा के सभी जिलों में डीआईटीएस से जुड़े लंबित आरटीआई मामलों पर असर डाल सकता है।
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने यह आदेश रेवाड़ी निवासी अरुण राव की शिकायत पर दिया। शिकायतकर्ता को 14 अक्तूबर 2025 को डीसी कार्यालय रेवाड़ी से मांगी गई सूचना देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया गया कि डीआईटीएस लोक प्राधिकरण नहीं है। सुनवाई में रेवाड़ी के सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वीकार किया कि डीआईटीएस का कार्यालय सरकारी परिसर में है। इसके अध्यक्ष उपायुक्त हैं और संचालन समिति में एडीसी, एसडीएम, सीएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी, एनआईसी अधिकारी सहित अधिकांश सदस्य सरकारी अधिकारी हैं। डीआईटीएस ई-गवर्नेंस परियोजनाओं, कॉमन सर्विस सेंटरों और डिजिटल सेवाओं के संचालन का काम करती है।
आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एफ) व दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिस संस्था की सूचना लोक प्राधिकरण अपने कानूनी अधिकार से प्राप्त कर सकता है उसे आरटीआई के तहत उपलब्ध कराना होगा। हालांकि आयोग ने कहा कि मामला धारा 18 के तहत शिकायत का था इसलिए सीधे सूचना देने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। यदि शिकायतकर्ता नई आरटीआई लगाता है तो अधिकारी को डीआईटीएस से रिकॉर्ड लेकर तय समय में सूचना देनी होगी बशर्ते वह धारा 8 के अपवादों में शामिल न हो।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने अपने फैसले में कहा कि जिला सूचना प्रौद्योगिकी सोसायटी (डीआईटीएस) से जुड़ी सूचना आरटीआई अधिनियम के दायरे में आएगी। उपायुक्त के पास डीआईटीएस का प्रशासनिक नियंत्रण है। यह कहकर सूचना देने से मना नहीं किया जा सकता है कि वह पंजीकृत सोसायटी है। यह फैसला हरियाणा के सभी जिलों में डीआईटीएस से जुड़े लंबित आरटीआई मामलों पर असर डाल सकता है।
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने यह आदेश रेवाड़ी निवासी अरुण राव की शिकायत पर दिया। शिकायतकर्ता को 14 अक्तूबर 2025 को डीसी कार्यालय रेवाड़ी से मांगी गई सूचना देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया गया कि डीआईटीएस लोक प्राधिकरण नहीं है। सुनवाई में रेवाड़ी के सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वीकार किया कि डीआईटीएस का कार्यालय सरकारी परिसर में है। इसके अध्यक्ष उपायुक्त हैं और संचालन समिति में एडीसी, एसडीएम, सीएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी, एनआईसी अधिकारी सहित अधिकांश सदस्य सरकारी अधिकारी हैं। डीआईटीएस ई-गवर्नेंस परियोजनाओं, कॉमन सर्विस सेंटरों और डिजिटल सेवाओं के संचालन का काम करती है।
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आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एफ) व दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिस संस्था की सूचना लोक प्राधिकरण अपने कानूनी अधिकार से प्राप्त कर सकता है उसे आरटीआई के तहत उपलब्ध कराना होगा। हालांकि आयोग ने कहा कि मामला धारा 18 के तहत शिकायत का था इसलिए सीधे सूचना देने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। यदि शिकायतकर्ता नई आरटीआई लगाता है तो अधिकारी को डीआईटीएस से रिकॉर्ड लेकर तय समय में सूचना देनी होगी बशर्ते वह धारा 8 के अपवादों में शामिल न हो।
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