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UPESSC भर्ती परीक्षा: 125 में 35 सवाल गलत, HC बोला- सचिव और परीक्षा नियंत्रक कोर्ट में आकर बताएं ये कैसे हुआ?

Tue, 04 Aug 2026 05:03 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विकास कुमार Updated Tue, 04 Aug 2026 05:03 PM IST
सार

अदालत ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि प्रश्नों का निर्माण किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है, विशेषज्ञों का चयन कैसे होता है और भविष्य में इस प्रकार की गंभीर त्रुटियों को रोकने के लिए क्या व्यवस्था है। 

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UPESSC Recruitment Exam 35 questions found incorrect High Court summons Secretary Controller of Examinations
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर शपथपत्र के माध्यम से यह बताएं कि आखिर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है और 125 प्रश्नों में से 35 प्रश्न (आयोग के अनुसार 33 प्रश्न) गलत कैसे पाए जा रहे हैं। 

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गलत सवालों के अंक दूसरे प्रश्नों में वितरित करना समाधान नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटिपूर्ण प्रश्न होना गंभीर चिंता का विषय है और केवल गलत प्रश्नों के अंक अन्य प्रश्नों में वितरित कर देना इसका स्थायी समाधान नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने यह आदेश रिट-ए संख्या 9799/2026, आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य की सुनवाई के दौरान पारित किया। 

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हाईकोर्ट असंतुष्ट
सुनवाई में आयोग की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि पहले सिलेबस से बाहर पाए गए 29 प्रश्नों के अतिरिक्त विशेषज्ञों ने चार अन्य प्रश्न भी गलत पाए हैं। इस प्रकार कुल 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न त्रुटिपूर्ण पाए गए। आयोग ने इन प्रश्नों के अंक शेष सही प्रश्नों में वितरित करते हुए नई संशोधित चयन सूची तैयार की है, जिसमें 42 नए अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने आयोग की इस कार्यवाही पर असंतोष व्यक्त किया। 

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परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया की गुणवत्ता पर सवाल
अदालत ने कहा कि जब किसी परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत पाए जा रहे हों, तब केवल अंक पुनर्वितरित कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह मामला केवल परिणाम संशोधित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 

पांच अगस्त को पेश हों सचिव व परीक्षा नियंत्रक
अदालत ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि प्रश्नों का निर्माण किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है, विशेषज्ञों का चयन कैसे होता है और भविष्य में इस प्रकार की गंभीर त्रुटियों को रोकने के लिए क्या व्यवस्था है। 

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग का पूरा स्पष्टीकरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे संबंधित अन्य रिट याचिकाओं के साथ होगी।

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