बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP
विज्ञापन
विज्ञापन
इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर बप्पा के घर में आगमन से होंगी ये राशियां धनवान
Myjyotish

इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर बप्पा के घर में आगमन से होंगी ये राशियां धनवान

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

From nearby cities

Digital Edition

पाक आतंकी साजिश का प्रयागराज कनेक्शन : आका पाकिस्तान में, सैकड़ों किलोमीटर दूर करेली में तैयार किया गया आतंकी मॉड्यूल

नरेंद्र गिरी के बेबाक बयान: तालिबान का समर्थन करने वाले मुस्लिम धर्मगुरुओं को बताया था गद्दार, मुनव्वर राणा को दी थी अफगानिस्तान जाने की नसीहत 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी प्रयागराज के महंत नरेंद्र गिरी अपने बयानों को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में रहते थे। कभी तालिबान का समर्थन करने वालों को देश का गद्दार बताने तो कभी मशहूर शायर मुनव्वर राणा को अफगानिस्तान जाकर बस जाने के बयान को लेकर वह काफी चर्चा में रहते थे।

तीन तलाक का मुद्दा हो या जनसंख्या नियंत्रण कानून का मामला हो सभी मुद्दों पर वह मुखर होकर बयान जारी करते थे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक के भारत में रहने वाले मुसलमानों के पूर्वज हिंदू होने के बयान का भी उन्होंने खुलकर समर्थन किया था। 

किन्नर अखाड़े ने भी खोल दिया था मोर्चा
किन्नर अखाड़े को अखाड़े की आधिकारिक मान्यता न देने पर उनकी काफी आलोचना हुई थी और किन्नर अखाड़े से जुडे़ महंतों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। 

कंगना रनौत का किया था समर्थन
बॉलीवुड की अभिनेत्री कंगना रणौत के बयानों का समर्थन करने पर भी महंत नरेंद्र गिरी चर्चा में आ गए थे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कंगना रणौत को देश की बेटी बताया था। उन्होंने कहा था कि कंगना बहादुर और हिम्मत वाली बेटी हैं, जिन्होंने बॉलीवुड के माफियाओं और ड्रग माफियाओं के रैकेट का भंडाफोड़ किया है। 

कंगना ने निडर होकर बॉलीवुड में एक विशेष समुदाय के वर्चस्व के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। इससे न केवल बॉलीवुड के माफिया डर गए हैं, बल्कि सरकार के भी कदम उखड़ रहे हैं। यही वजह है कि सच की आवाज को दबाने के लिए उद्धव ठाकरे सरकार ने कंगना रणौत के कार्यालय पर बुलडोजर चलवाया है और बदले की कार्रवाई की है। 
... और पढ़ें

खुदकुशी : प्रयागराज में जीआरपी के जवान ने कनपटी पर गोली मारकर खुद को उड़ाया, कानपुर में थे तैनात

प्रयागराज स्थित जीआरपी लाइंस में एक जीआरपी के जवान ने खुद को गोली मारकर हत्या कर ली। इस घटना से हड़कंप मच गया। गोली चलने के आवाज पर आसपास के बैरकों में रहने वाले सिपाही और अधिकारी पहुंच गए। सूचना पाकर अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। घटना के संबंध में कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। बताया जाता है कि आत्महत्या करने वाले सिपाही की वर्तमान में तनाती कानपुर में है। 

प्रयागराज में मांडा थाना क्षेत्र के चकडीहा गांव के मूल निवासी चिंतामणि यादव (३८) जीआरपी मे सिपाही थे। वर्तमान में उनकी तैनाती कानपुर में थी। कुछ दिन पहले वह प्रयागराज आए थे। सोमवार को खुल्दाबाद जीआरपी स्थित लाइंस के बैरक में खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज से दूसरे बैरक में रहने वाले सिपाही पहुंच गए। 

वह खून से लथपथ पड़े थे। आनन फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। किस बात को लेकर वह परेशान थे इसका कारण पता नहीं चल सका है। सूत्रों की मानें तो सिपाही चिंतामणि यादव अवकाश न मिलने के कारण डिप्रेशन में चल रहे थे। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह बात उनके संज्ञान में नहीं है। घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। 
... और पढ़ें

नरेंद्र गिरि: कमरे में मिला छह पेज का सुसाइड नोट, सवाल- आखिर किस अपमान से आहत थे महंत

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि जिस कमरे में फंदे पर लटके मिले, वहां छह पेज का सुसाइड नोट मिला है। पुलिस के मुताबिक, इस सुसाइड नोट में मठ और अखाड़े के उत्तराधिकारियों के नाम लिखे गए हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें कभी महंत के बेहद करीबी रहे आनंद गिरि के अलावा लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम भी है। साथ ही सम्मान व अपमान को लेकर भी कुछ बातें लिखी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर महंत किस अपमान को लेकर आहत थे?

पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही शव उतारा जा चुका था। सूत्रों के मुताबिक, महंत के शव के पास ही बिस्तर पर सुसाइड नोट पड़ा था। छह पेज के इस सुसाइड नोट में वसीयतनामे से लेकर अन्य कई बातें लिखीं थीं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इसमें महंत के सबसे करीबी शिष्य रहे आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी के नाम के साथ लिखा है कि वह इनके व्यवहार से आहत थे। सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्होंने पूरा जीवन सम्मान के साथ जिया। उनके दामन में कभी किसी तरह का दाग नहीं रहा। लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें मिथ्या आरोप लगाकर अपमानित किया। जिससे वह बेहद दुखी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि  आखिर वह कौन सा अपमान था जिसने महंत को इस कदर आहत कर दिया।

आनंद, आद्या या संदीप, कौन किस बात के लिए कर रहा था परेशान?
सुसाइड नोट में लिखी बातें सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं है। इन सवालों से सबसे ज्यादा घेरे में आनंद गिरि, बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य ख्पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी की भूमिका है। किसकी भूमिका को लेकर क्या उठ रहे हैं सवाल, नीचे पढ़िए...  

योग गुरु आनंद गिरि
बात आनंद गिरि की करें तो सवाल उठता है कि क्या वह किसी बात को लेकर महंत को परेशान कर रहे थे। गौरतलब है कि कुछ समय पहले आनंद गिरि को अखाड़े से निष्कासित किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो वायरल हुए थे। जिसमें अखाड़े व मठ की संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के कई शिष्यों के पास करोड़ों की संपत्ति होने से संबंधित तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। आरोप लगा था कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की छवि धूमिल करने को लेकर साजिशन ऐसा किया गया। जिसका खुद अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने खंडन करते हुए कहा था कि यह सभी आरोप बेबुनियाद हैं। ऐसें में सबसे बड़ा सवाल यह है कि  क्या आनंद गिरि किसी बात को लेकर महंत को परेशान कर रहे थे? 

आद्या तिवारी व संदीप तिवारी
इसके बाद लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम आता है। सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि महंत इनके व्यवहार से आहत थे। चर्चा इस बात की भी रही कि महंत से आद्या तिवारी का लेनदेन का कुछ मामला था, जिसे लेकर पिछले कुछ समय से उनके बीच मनमुटाव हुआ था। तो एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या आद्या व उनके बेटे संदीप की किसी बात को लेकर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष परेशान थे। हालांकि हिरासत में लिए जाने के दौरान आद्या तिवारी ने इन बातों का खंडन किया और साफ कहा कि उनका अखाड़ा परिषद अध्यक्ष से किसी तरह का विवाद नहीं था।

अन्य शिष्यों से कोई लेना-देना नहीं, न किए जाएं परेशान
सुसाइड नोट में उन्होंने यह भी लिखा है कि उनके अन्य शिष्यों का उनकी मौत से कोई लेना-देना नहीं है, ऐसे में उन्हें परेशान न किया जाए। इसके अलावा विस्तार से यह लिखा है कि उनके न रहने के बाद मठ, अखाड़ा व हनुमान मंदिर में किसकी क्या भूमिका होगी। पुलिस अफसरों ने भी इस बात की पुष्टि की। आईजी रेंज केपी सिंह ने सुसाइड नोट में आनंद गिरि व वसीयतनामे के जिक्र के बात की पुष्टि की। हालांकि उन्होंने इससे ज्यादा कुछ बताने से इंकार किया। उनका कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल इससे ज्यादा कुछ बता पाना संभव नहीं है।

सुसाइड नोट कितना सही, फोरेंसिक जांच से खुलेगा राज
अखाड़ा परिषद की संदिग्ध हाल में मौत के बाद फिलहाल जो भी आशंकाएं, निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, उसका मूल मौके से बरामद सुसाइड नोट है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सुसाइड नोट की प्रमाणिकता भी तब तक संदेह से परे नहीं है जब तक कि फोरेंसिक जांच न हो जाए। फोरेंसिक जांच के दौरान हैंडराइटिंग मिलान में ही यह साफ हो पाएगा कि सुसाइड नोट अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने ही लिखा या नहीं। फिलहाल फोरेंसिक टीम ने इसे कब्जे में ले लिया है। साथ ही अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की हैंडराइटिंग का सैंपल भी एकत्र कर लिया गया। 
... और पढ़ें
नरेंद्र गिरि सुसाइड केस नरेंद्र गिरि सुसाइड केस

Narendra giri Death Case : अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के मौत के मामले में पुलिस ने शिष्य आनंद गिरी सहित तीन को किया गिरफ्तार

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने उनके शिष्य योग गुरु आनंद गिरी और संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी हो हिरासत में ले लिया है। तीनों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। महंत नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड नोट में इन तीनों का उल्लेख किया है और लिखा था कि इनके द्वारा परेशान करने के चलते वह मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहे हैं। उन्हें सम्मान से जीने नहीं दिया जा रहा है। 

प्रयागराज पुलिस ने जार्जटाउन थाने में आनंद गिरी के खिलाफ धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। इसी धारा में अन्य दोनों आरोपियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। 


सुसाइड नोट बरामद, अपने शिष्य पर परेशान करने का  लगाया आरोप
महंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उनका शव अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास में मिला। शाम को सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। पुलिस ने सूचना मिलते ही मठ को सीज कर दिया। जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि पर परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी आरे महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी वसीयत की जानकारी भी इसी में दी। पुलिस का इस संबंध में कहना है कि वो अभी इसे विस्तार से देख रहे हैं और उसके बाद ही स्थिति को साफ किया जा सकेगा।  

आनंद गिरि ने खुद को बताया बेकसूर, बोले गुरू जी की हुई है हत्या
हिरासत में लिए जाने के पहले आनंद गिरि मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि इस बात में उन्हें कोई शक नहीं कि उनके गुरू  महंत नरेंद्र गिरि की हत्या की गई है। इसमें कौन लोग शामिल है, इस बात का खुलासा होना चाहिए। कई लोग ऐसे हैं जिन पर उन्हें शक है और सच्चाई सामने आनी चाहिए। मैं अगर दोषी पाया जाता हूं तो फिर मुझे भी सजा मिलनी चाहिए।

सूचना पर जिले के सभी आलाधिकारी मौके पर
संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित आवास में रहते थे। सोमवार की शाम सेवादार उनके कमरे में पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। महंत नरेंद्र गिरि का शव फांसी पर लटक रहा था। पूरे मठ में हड़कंप मच गया। सूचना पर जिले के सभी आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने मठ को सीज कर दिया था। 

शिष्य आनंद गिरि से विवाद के बाद चर्चा में आए
मौके पर फोरेंसिक टीम और फील्ड यूनिट भी जांच कर रही थी। डीएम ने लखनऊ में उच्चाधिकारियों को प्रारंभिक सूचना से अवगत कराया। महंत नरेंद्र गिरि हाल में ही अपने शिष्य आनंद गिरि से विवाद में चर्चा में आए थे। हालांकि वह विवाद आनंद गिरि के माफी मांगने के बाद खत्म हो गया था लेकिन मठ और मंदिर में आनंद का प्रवेश नहीं हो पाया था। इसके अलावा जाहिरा तौर पर कोई बड़ा विवाद अभी सामने नहीं आया। 

महंत गिरी की मौत दुखद, जांच की जरूरत: इंद्रेश कुमार
नरेंद्र गिरी की मौत पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने महंत नरेंद्र गिरी की मौत को काफी दुखद एवं विचलित करने वाला बताया। इंद्रेश कुमार ने कहा कि आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित रहते हुए महंत गिरी ने संत समाज की अनेक धाराओं को एक साथ जोड़ने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रभु उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। साथ ही साथ वरिष्ठ आरएसएस नेता ने महंत गिरी की विवादास्पद मौत पर सवाल उठाते हुए जांच कराए जाने की जरूरत बताया।
... और पढ़ें

प्रयागराज : संतों ने कहा महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या कर ही नहीं सकते, मामले की कराई जाए सीबीआई जांच

अमेठी सुल्तानपुर वाले हठयोगी मौनी बाबा महंत नरेंद्र गिरी को श्रद्धांजलि देने बाघंबरी गद्दी पहुंचे। उन्होंने घटना पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि अभी तक यह विश्वास नहीं हो रहा है कि संत समाज का मार्गदर्शन करने वाले महंत नरेंद्र गिरि इस तरह का कदम उठा सकते हैं। इसके पीछे कोई बड़ी साजिश प्रतीत हो रही है। उच्चस्तरीय जांच के बाद ही पूरे मामले पर से पर्दा उठेगा।

मौनी बाबा ने कहा कि संत समाज स्तब्ध है। कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। यह घटना कैसे घटी। इस पर विश्वास ही नहीं हो रहा है। घटना की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री से मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की।

उन्होंने राम मंदिर के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनके साथ कोई साजिश की गई है। मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। घटना के पीछे एक गहरी साजिश है। महंत इस तरह का कदम उठाने की सोच भी नहीं सकते थे। यदि उन्होंने इस तरह का कदम उठाया तो इसके पीछे के कारण क्या हैं इसकी जांच की जानी चाहिए।

रामजन्मभूमि विवाद में पक्षकार रहे महंत ज्ञानदास ने कहा कि जिस कमरे में उनके आत्महत्या की बात कही जा रही है उस कमरे में आज तक वह सोए नहीं थे, एसे में यह सवाल उठता है कि वह यहां पहुंचे कैसे। कहा कि वह ठीक से हस्ताक्षर नहीं कर सकते थे तो वह आठ पन्ने का सुसाइड नोट कैसे लिख लेंगे। यह सुसाइड है ही नहीं। इसके पीछे गहरी साजिश है। 
... और पढ़ें

महंत नरेंद्र गिरी केस : गुरु-शिष्य के बीच समझौता कराने वाले एडिशनल एसपी और सपा नेता रडार पर, पुलिस कर सकती है पूछताछ

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध दशा में मौत के मामले में पुलिस आनंद गिरी के साथ समझौता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एडिशनल एसपी ओम प्रकाश पांडेय और सपा नेता व पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री इंदू प्रकाश मिश्रा से भी पूछताछ के लिए बुला सकती है। महंत ने अपने आठ पन्ने के सुसाइड नोट में आनंद गिरी का उल्लेख किया है 
 
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य योगगुरु स्वामी आनंद गिरि के बीच कई दिनों तक चले विवाद का पटाक्षेप हो गया था। अधिकारी शिष्य ने अपने लखनऊ स्थित आवास पर गुरु-शिष्य के बीच समझौता कराया था। आनंद गिरी ने अपने गुरु नरेंद्र गिरी का पैर पकड़कर माफी मांगी और इसका वीडियो भी तैयार किया था। साथ ही नरेंद्र गिरी ने उन्हें माफी देने का भी वीडियो जारी किया। यह भी कहा कि इनको हनुमान मंदिर और बाघंबरी मठ पर आने पर कोई रोक नहीं है।

अब पुलिस इन तीनों से कर सकती है पूछताछ
बताया जाता है कि समझौते के दौरान गुरु शिष्य के साथ तीन अन्य लोग भी मौजूद थे, जिसमें भाजपा नेता सुशील मिश्रा, सपा नेता और पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री इंदू प्रकाश मिश्रा और वर्तमान में मुरादाबाद में बतौर अपर पुलिस अधीक्षक तैनात रहे ओपी पांडेय भी मौजूद रहे। अब पुलिस इन तीनों से पूछताछ कर सकती है। 

यह जब चाहे आ सकते हैं और गुरु से मिल सकते हैं। अब दोों के बीच कोई मतभेद नहीं है। दोनों ने अपने द्वारा कहे गए और आरोप लगाए गए बातों को वापस लिया था। अब नरेंद्र गिरी की मौत के बाद सुलह समझौता कराने वाला अधिकारी चर्चा में आ गया है। संभावना जाहिर की जा रही है कि इस अधिकारी को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
... और पढ़ें

प्रयागराज : कौन होगा अखाड़ा परिषद का अगला अध्यक्ष, कल हो सकती है पंच परमेश्वरों की बैठक

prayagraj news : स्वामी आनंद गिरी और महंत नरेंद्र गिरी।
साधु-संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसको लेकर कवायद तेज हो गई है। माना जा रहा है कि महंत नरेंद्र गिरी के पार्थि शरीर को समाधि देने के बाद इसके लिए पंच परमेश्वरों की बैठक हो सकती है। इसमें ही अगले अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग सकती है।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद रिक्त हो गया है। अगले अध्यक्ष को लेकर अटकलबाजी शुरू हो गई है। इस चूंकि अभी तक महंत के पार्थिव शरीर का न तो पोस्टमार्टम हुआ है न ही उनको समाधि दी जा सकी है। इसलिए नए अध्यक्ष को लेकर संतों के द्वारा कोई चर्चा नहीं की जा रही है।

जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि का कहना है कि अगला अध्यक्ष कौन होगा इस मुद्दे पर पंच परमेश्वर चर्चा करेंगे। फिलहाल पंच परमेश्वरों के मंगलवार शाम या बुधवार सुबह आने की संभावना है। पहले शास्त्रोक्त विधि और अखाड़े की परंपरा के अनुसार नरेंद्र गिरी के पार्थिव शरीर को समाधि दी जाएगी, इसके बाद ही आगे कोई चर्चा होगी। 

 
... और पढ़ें

Mahant Narendra Giri : पूर्व सीएम अखिलेश बोले- हाईकोर्ट के जज से कराई जाए घटना की जांच

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने की मांग की है। संत के अंतिम दर्शन के लिए बाघंबरी गद्दी मठ पहुंचे अखिलेश ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री दिन में करीब सवा बारह बजे मठ में पहुंचे और महंत को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरि का निधन आहत करने वाला है।

वह साधु-संतों ही नहीं, आमजनमानस में भी लोकप्रिय और पूजनीय थे। ऐसे में उनका निधन स्तब्ध करने वाला है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐेसा सुनने में आया है कि महंत नरेंद्र गिरि कई दिनों से परेशान थे। वह एक मंत्री और वरिष्ठ अफसरों से मिलना चाहते थे। ऐसे में संदिग्ध स्थिति में उनका निधन होना कई सवाल खड़े करता है। इसमें कुछ प्रमुख लोगों के भी नाम आ रहे हैं। इस पूरे मामले की जांच सिटिंग जज से कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

अखिलेश यादव ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस सरकार में कोई भी सुरक्षित नहीं है। अखिलेश यादव पूर्व अपर महाधिवक्ता कमल सिंह यादव के घर भी गए और उनकी पत्नी के निधन पर संवेदना प्रकट की। अपर महाधिवक्ता की पत्नी का कोविड की वजह से निधन हो गया था। हालांकि, समय कम होने के कारण उन्हाेंने घर के बाहर ही कमल सिंह और परिवार के सदस्याें से मुलाकात की। इसके बाद वह लखनऊ के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उनके साथ जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव, एमएलसी डॉ. मान सिंह यादव, संदीप पटेल, दान बहादुर मधुर आदि मौजूद रहे।

सपा कार्यकर्ताओं की पुलिस से हुई झड़प
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी बाघंबरी गद्दी मठ पहुंचे। वे भी मठ के भीतर प्रवेश करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने रोक दिया। इसे लेकर कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई।
 
... और पढ़ें

योगी आदित्यनाथ: प्रयागराज पहुंचकर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को दी श्रद्धांजलि, बोले- घटना का होगा पर्दाफाश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज पहुंचकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पूरी घटना के एक एक वाकये का पर्दाफाश किया जाएगा। कोई भी दोषी बचने नहीं पाएगा। भगवान श्री राम महंत नरेंद्र गिरी को अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके अनुयाइयों और उनके शिष्यों सहित मठ और मंदिर के पदाधिकारियों को उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने की शक्ति प्रदान करें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को पूर्वांह्न करीब 11 बजे प्रयागराज पहुंचे। उन्होंने सीधे मठ बाघंबरी गद्दी जाकर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वहां मौजूद संत समाज के कुछ लोगों के साथ बैठकर घटना के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की और आगे की कार्रवाई के बारे में चर्चा की। 
... और पढ़ें

महंत नरेंद्र गिरि मौत का मामला : कौन था वो शख्स.! जिससे महीनों से परेशान थे अखाड़ा परिषद अध्यक्ष

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरी की मौत की गुत्थी उलझी है। उन्हें जानने वाले कहते हैं कि उनकी मौत यूं ही नहीं हुई, इसके पीछे कई राज छिपे हैं। कोई एक शख्स था, जो महीनों से महंत नरेंद्र गिरि की नींद हराम कर रखी थी। महंत नरेंद्र गिरि ने अपने एक करीबी शख्स से उसका जिक्र भी किया था। 

आखिर उनकी मौत के बाद अब शक सुई, उसी  शख्स के इर्द-गिर्द घूम रही है, जो नरेंद्र गिरी को परेशान कर रहा था। महंत की मौत के बाद प्रयागराज के जार्जटाउन थाने में दर्ज एफआईआर में उस शख्स नाम आया है। करीबी से महंत ने किया था उस शख्स जिक्र अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने सोमवार शाम जार्जटाउन स्थित बाघंबरी मठ के अंदर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

शाम को उनका सेवादार शिष्य चाय लेकर पहुंचा तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज देने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो मठ के अंदर खलबली मच गई। आसपास के लोग भागकर वहां पहुंचे। दरवाजा तोड़ा गया तो महंत का शव फंदे से लटका देखकर लोगों की चीख निकल गई। आननफानन में महंत के पार्थिव शरीर को रस्सी काटकर नीचे उतारा गया, लेकिन तब बहुत देर हो चुकी थी। महंत नरेंद्र गिरि की सांसें थम चुकी थीं।

खबर पाकर पुलिस आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। मठ के भीतर और बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। इस मामले में महंत नरेंद्र गिरि के करीबी अमर गिरि पवन महराज ने पुलिस को तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि महंत नरेंद्र गिरि उनसे कई बार इस बात का जिक्र कर चुके थे कि उन्हें आनंद गिरि परेशान कर रहा था। मुलाकात से मना करने पर बेसमय फोन कर ब्लैकमेल करते थे। 

कुछ महीने पहले गुरु और शिष्य में विवाद के बाद हुया था टकराव
अखाड़ा परिशद के अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि ने कुछ महीने पहले अपने शिष्य आनंद गिरि को संत समाज की परंपरा का उल्लंघन करने पर मठ से निकाल दिया था। जिसके बाद आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि पर तमाम तरह के आरोप लगाए थे।

हालांकि बाद में महंत नरेंद्र गिरि ने बाद में आनंद गिरि को माफ कर दिया था। इसके बाद भी उनके बीच कड़वाहट बनी रही। आखिरकार महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या कर ली। नरेंद्र गिरि की मौत के तत्काल बाद आनंद गिरि ने बयान जारी कर कहा कि उनके गुरु महंत नरेंद्र गिरि खुदकुशी नहीं कर सकते, उनकी हत्या की गई है और उनके फंसाने की साजिश रची जा रही हैं। हालांकि मौके से सुसाइड नोट बरामद होने के बाद पुलिस ने तत्काल हरिद्वार पुलिस से संपर्क कर आनंद गिरी को हिरासत में ले लिया।
 
... और पढ़ें

नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामला : बाघंबरी मठ के विद्यार्थियों पर महंत की मेहरबानी भी झगड़े की बड़ी वजह

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि करीबी सेवादारों के अलावा एक अंगरक्षक के नाम जमीन और मकान खरीदवाने के मामले को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। मठ और अखाड़े से निष्कासन के बाद उनके शिष्य आनंद गिरि ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उन पर ऐसे कई गंभीर आरोप लगाए थे और जांच के लिए आवाज उठाई थी। 

मठ में फंदे से लटके मिले महंत नरेंद्र गिरि पर उनके शिष्य आनंद गिरि पांच महीने पहले कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। इसमें सेवादारों के नाम पर जमीन और मकान खरीदने की शिकायतें शामिल हैं। सीएम को तब उन्होंन जो पत्र भेजा था, उसमें सिपाही अजय सिंह के नाम का उल्लेख चर्चा में रहा है। इसमें सिपाही के नाम पर कहीं बेनामी संपत्ति खरीदने की भी शिकायत का जिक्र किया गया था। 

इसके अलावा विपिन सिंह नामक ड्राइवर को बड़ा मकान बनाकर दिलवाने, रामकृष्ण पांडेय नामक विद्यार्थी को बड़ा मकान और बड़े हनुमान मंदिर में दुकान दिलवाने के अलावा विवेक मिश्रा नामक विद्यार्थी के नाम जमीन खरीदने के साथ ही उसका मकान बनवाने, मठ में रहने वाले विद्यार्थी मनीष शुक्ला को करोड़ों रुपये का मकान बनवाकर देने, आनंद गिरि के नाम की फार्च्यूनर गाड़ी भी उसके नाम करवाने के आरोप रहे हैं।

इसके अलावा  मठ में रह रहे अभिषेक मिश्रा और मिथिलेश पांडेय को भी मकान बनवाकर देने का मामला भी विवाद का हिस्सा रहे है। इसके अलावा आनंद गिरि ने आदित्य नाथ मिश्रा नामक व्यक्ति से महंत के विवाद को लेकर भी शिकायत की थी।
 
... और पढ़ें
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X