High Court : नाबालिग गर्भवती की मेडिकल रिपोर्ट में पूर्व आदेशों का पालन नहीं करने पर कोर्ट नाराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग गर्भवती के मामले में मेडिकल बोर्ड की ओर से पेश की गई रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग गर्भवती के मामले में मेडिकल बोर्ड की ओर से पेश की गई रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया। बोर्ड ने पीड़िता की शारीरिक जांच की पर उसकी इच्छा, मानसिक स्थिति और भविष्य के विकल्पों को लेकर उचित काउंसलिंग में संवेदनहीनता दिखाई है। ऐसे में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है।
साथ ही कोर्ट ने जेएन मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ के प्रधानाचार्य को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा), हाथरस के सचिव को निर्देश दिया है कि वे तत्काल मेडिकल बोर्ड के साथ एक बैठक करें, जिसमें एक मनोवैज्ञानिक को भी शामिल किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़िता को उसके कानूनी अधिकारों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में विस्तार से समझाया जाए। ब्यूरो
पीड़िता को बतानी होंगी ये बातें
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को यह बताना अनिवार्य है कि यदि वह गर्भधारण जारी रखती है तो प्रसव और बच्चे के पालन-पोषण का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया भी राज्य के द्वारा ही पूरी की जाएगी। कोर्ट ने नई समिति को 15 मार्च 2026 को पीड़िता से मिलने और उसकी शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने उच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति के पैनल अधिवक्ता आशुतोष गुप्ता को सीएमओ हाथरस की ओर गठित मेडिकल बोर्ड की निगरानी के लिए अधिवक्ता नियुक्त किया है।