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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Five years delay in trial, questions raised on the working style of judicial officer and public prosecutor.

Chandigarh-Haryana News: ट्रायल में पांच साल की देरी, न्यायिक अधिकारी व लोक अभियोजक की कार्यशैली पर उठे सवाल

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- हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर जिला अटार्नी को पेश होने का दिया आदेश
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- संबंधित न्यायिक अधिकारी से अदालत ने मांगा देरी पर स्पष्टीकरण


चंडीगढ़। गुरुग्राम के आपराधिक मामले के ट्रायल में करीब पांच साल की असामान्य देरी पर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए संबंधित न्यायिक अधिकारी, लोक अभियोजक और जिला अटार्नी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएं हैं। प्रथम दृष्टया इसे कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही मानते हुए हाईकोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा है।

राजेश मलिक व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि मामले में 31 जुलाई 2021 को चालान पेश किया जा चुका था लेकिन इसके बावजूद अब तक आरोप तय करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक ट्रायल का प्रारंभ न होना न्यायिक प्रक्रिया की गंभीर विफलता को दर्शाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति न्यायिक अधिकारी और अभियोजन पक्ष दोनों की निष्क्रियता को दर्शाती है जो स्वीकार्य नहीं है।
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अदालत ने संबंधित ट्रायल कोर्ट के न्यायिक अधिकारी को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करें कि आखिर पांच वर्षों तक मामले की सुनवाई लंबित क्यों रही। कोर्ट ने गुरुग्राम के लोक अभियोजक और जिला अटार्नी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। साथ ही आदेश की प्रति गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त और जिला व सत्र न्यायाधीश को भेजने के निर्देश भी दिए, ताकि लंबित ट्रायल को शीघ्र गति से आगे बढ़ाया जा सके।

अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में अनावश्यक देरी न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है और इससे न्याय मिलने की प्रक्रिया बाधित होती है। न्यायालय ने संबंधित न्यायिक अधिकारी को अगली सुनवाई से पूर्व अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति संबंधित जुड़े मामले की फाइल में भी संलग्न की जाए, ताकि सुनवाई की निरंतर निगरानी सुनिश्चित हो सके। हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ट्रायल में अनावश्यक देरी को अब गंभीर प्रशासनिक चूक के रूप में देखा जाएगा।
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