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Chandigarh-Haryana News: गोशाला को प्रति गोवंश मिल सकती है 5 से 10 हजार रुपये की मदद
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हरियाणा गो सेवा आयोग ने गोवंश के पुनर्वास की योजना के तहत तैयार किया प्रस्ताव
भविष्य में 70 हजार गोवंश के पुनर्वास की योजना पर आज बैठक में होगा मंथन
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा की सड़कों पर हादसों का कारण बन रहे लावारिस गोवंश के पुनर्वास के लिए जल्द कई नए फैसले लिए जा सकते हैं। पहली बार गोशालाओं को चारे के अतिरिक्त प्रति गोवंश रखने पर 5 से 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हरियाणा गो सेवा आयोग गोवंश के पुनर्वास की योजना पर करीब 54.60 करोड़ रुपये खर्च करेगा। राज्य की सड़कों पर अभी करीब 40 हजार गोवंश हैं। भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए करीब 70 हजार गोवंश के पुनर्वास की योजना तैयार की गई है।
गो सेवा आयोग की बुधवार को चंडीगढ़ में महत्वपूर्ण बैठक होगी। आयोग की बैठक में प्रस्तावित एजेंडे के अनुसार आगामी वर्षों के लिए 26 हजार गाय, 28 हजार नंदी और 14 हजार बछड़ों यानी कुल 70 हजार गोवंश के पुनर्वास की योजना पर मंथन होगा। गोवंश के स्थायी पुनर्वास के लिए प्रति गाय 7000 रुपये, प्रति नंदी 10 हजार रुपये और प्रति बछड़े के लिए 5000 रुपये की आर्थिक मदद गोशालाओं को देने का प्रस्ताव तैयार किया है। गो सेवा आयोग की बैठक में राजस्व, वित्त, कृषि, पंचायत, निकाय, पुलिस और पशु पालन विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे। राज्य में अभी पंजीकृत 707 गोशालाएं हैं। इनमें से 532 गोशालाओं से वार्ता की गई है जिससे वह आर्थिक मदद मिलने पर टीनशेड व अन्य व्यवस्थाएं बनाकर अपने यहां गोवंश रख सकें। प्रदेश के करनाल और यमुनानगर को छोड़कर शेष सभी जिलों में गोशालाओं के साथ गोवंश रखने के लिए सहमति के लिए बैठक हो चुकी हैं।
200 गोशालाओं में शेड की कमी, 820 ई-रिक्शा के लिए हुआ अनुबंध
गो सेवा आयोग के ब्योरे के अनुसार राज्य की करीब 200 गोशालाओं में शेड की कमी है। पुनर्वास की राह में यह एक बड़ी बाधा है। इन गोशालाओं में शेड बनने पर छोटे-बड़े 40 हजार गोवंश का पुनर्वास हो सकता है। गोशालाओं में शेड के विस्तार पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सभी पंजीकृत गोशालाओं को ई-रिक्शा मिलेंगे। 820 ई-रिक्शा के लिए एग्रीमेंट हो गया है। पंचायत विभाग से भी आयोग अनुरोध करेगा कि गोशालाओं के संचालन के लिए 50 से 500 एकड़ तक जमीन देने के प्रस्ताव को अनुमति दी जाए। गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष सुमन गुप्ता ने बताया कि पुनर्वास के कार्य में जो भी अड़चनें हैं उन्हें दूर करने के लिए बुधवार को होने वाली बैठक में मंथन होगा।
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पंजाब से बड़ी संख्या में यहां छोड़े जा रहे गोवंश
हरियाणा के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और पंजाब हैं। आयोग के ब्योरे के अनुसार अभी तक पंजाब से अत्यधिक संख्या में गोवंश हरियाणा में पहुंचते हैं। सिरसा के रानिया में पशु मेले लगते हैं। इनकी आड़ में लोग बड़ी संख्या में लावारिस गोवंश यहां छोड़कर चले जाते हैं। केंद्रीय नियमों का हवाला देते हुए आयोग राज्य की सीमा से 50 किमी अंदर पशु मेले लगाने की सिफारिश करेगा जिससे पंजाब से गोवंश यहां आना बंद हो सकें।
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भविष्य में 70 हजार गोवंश के पुनर्वास की योजना पर आज बैठक में होगा मंथन
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा की सड़कों पर हादसों का कारण बन रहे लावारिस गोवंश के पुनर्वास के लिए जल्द कई नए फैसले लिए जा सकते हैं। पहली बार गोशालाओं को चारे के अतिरिक्त प्रति गोवंश रखने पर 5 से 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हरियाणा गो सेवा आयोग गोवंश के पुनर्वास की योजना पर करीब 54.60 करोड़ रुपये खर्च करेगा। राज्य की सड़कों पर अभी करीब 40 हजार गोवंश हैं। भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए करीब 70 हजार गोवंश के पुनर्वास की योजना तैयार की गई है।
गो सेवा आयोग की बुधवार को चंडीगढ़ में महत्वपूर्ण बैठक होगी। आयोग की बैठक में प्रस्तावित एजेंडे के अनुसार आगामी वर्षों के लिए 26 हजार गाय, 28 हजार नंदी और 14 हजार बछड़ों यानी कुल 70 हजार गोवंश के पुनर्वास की योजना पर मंथन होगा। गोवंश के स्थायी पुनर्वास के लिए प्रति गाय 7000 रुपये, प्रति नंदी 10 हजार रुपये और प्रति बछड़े के लिए 5000 रुपये की आर्थिक मदद गोशालाओं को देने का प्रस्ताव तैयार किया है। गो सेवा आयोग की बैठक में राजस्व, वित्त, कृषि, पंचायत, निकाय, पुलिस और पशु पालन विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे। राज्य में अभी पंजीकृत 707 गोशालाएं हैं। इनमें से 532 गोशालाओं से वार्ता की गई है जिससे वह आर्थिक मदद मिलने पर टीनशेड व अन्य व्यवस्थाएं बनाकर अपने यहां गोवंश रख सकें। प्रदेश के करनाल और यमुनानगर को छोड़कर शेष सभी जिलों में गोशालाओं के साथ गोवंश रखने के लिए सहमति के लिए बैठक हो चुकी हैं।
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200 गोशालाओं में शेड की कमी, 820 ई-रिक्शा के लिए हुआ अनुबंध
गो सेवा आयोग के ब्योरे के अनुसार राज्य की करीब 200 गोशालाओं में शेड की कमी है। पुनर्वास की राह में यह एक बड़ी बाधा है। इन गोशालाओं में शेड बनने पर छोटे-बड़े 40 हजार गोवंश का पुनर्वास हो सकता है। गोशालाओं में शेड के विस्तार पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सभी पंजीकृत गोशालाओं को ई-रिक्शा मिलेंगे। 820 ई-रिक्शा के लिए एग्रीमेंट हो गया है। पंचायत विभाग से भी आयोग अनुरोध करेगा कि गोशालाओं के संचालन के लिए 50 से 500 एकड़ तक जमीन देने के प्रस्ताव को अनुमति दी जाए। गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष सुमन गुप्ता ने बताया कि पुनर्वास के कार्य में जो भी अड़चनें हैं उन्हें दूर करने के लिए बुधवार को होने वाली बैठक में मंथन होगा।
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पंजाब से बड़ी संख्या में यहां छोड़े जा रहे गोवंश
हरियाणा के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और पंजाब हैं। आयोग के ब्योरे के अनुसार अभी तक पंजाब से अत्यधिक संख्या में गोवंश हरियाणा में पहुंचते हैं। सिरसा के रानिया में पशु मेले लगते हैं। इनकी आड़ में लोग बड़ी संख्या में लावारिस गोवंश यहां छोड़कर चले जाते हैं। केंद्रीय नियमों का हवाला देते हुए आयोग राज्य की सीमा से 50 किमी अंदर पशु मेले लगाने की सिफारिश करेगा जिससे पंजाब से गोवंश यहां आना बंद हो सकें।