{"_id":"6a8292dd365d90dfe2012af1","slug":"haryana-sports-budget-half-academic-session-gone-budget-still-stuck-in-files-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल बजट पर ‘सरकारी खेल’: आधा सत्र बीता, बजट अभी फाइलों में; 14,267 स्कूलों के विद्यार्थियों की प्रतिभा पर असर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेल बजट पर ‘सरकारी खेल’: आधा सत्र बीता, बजट अभी फाइलों में; 14,267 स्कूलों के विद्यार्थियों की प्रतिभा पर असर
Mon, 17 Aug 2026 10:19 AM IST
Nivedita
कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:19 AM IST
सार
नियमानुसार खेल सामग्री की राशि एक अप्रैल से 31 मार्च तक खर्च की जा सकती है। इसके बावजूद 2025-26 में 14,019 राजकीय स्कूलों के लिए 12 करोड़ 83 लाख 70 हजार रुपये का खेल सामग्री बजट वित्तीय वर्ष खत्म होने से महज एक दिन पहले 30 मार्च 2026 को जारी किया गया था।
विज्ञापन
हरियाणा शिक्षा विभाग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाएं बढ़ाने के दावों के बीच शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश के 14,267 राजकीय स्कूलों में खेल संसाधनों के लिए हर साल बजट निर्धारित किया जाता है लेकिन शैक्षणिक सत्र 2026-27 का करीब आधा समय बीतने के बावजूद खेल सामग्री की राशि जारी करने पर फैसला नहीं हो पाया है।
इससे विद्यार्थियों को नए खेल उपकरणों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। पिछले दो सत्रों में भी बजट समय पर जारी नहीं होने की स्थिति सामने आई थी।
नियमानुसार खेल सामग्री की राशि एक अप्रैल से 31 मार्च तक खर्च की जा सकती है। निर्धारित अवधि में राशि खर्च नहीं होने पर बची रकम वापस हो जाती है। इसके बावजूद 2025-26 में 14,019 राजकीय स्कूलों के लिए 12 करोड़ 83 लाख 70 हजार रुपये का खेल सामग्री बजट वित्तीय वर्ष खत्म होने से महज एक दिन पहले 30 मार्च 2026 को जारी किया गया था। इससे स्कूलों को खरीद के लिए बेहद कम समय मिला। इसी तरह 2024-25 में भी खेल बजट मार्च के अंतिम दिनों में जारी हुआ था। चार-पांच दिन में खरीद की बाध्यता के कारण स्कूल प्रबंधन के सामने परेशानी खड़ी हुई। अब 2026-27 में भी राशि का इंतजार है।
हर प्राइमरी स्कूल को पांच हजार और अपर प्राइमरी को 10 हजार
खेल सामग्री खरीदने के लिए प्रत्येक प्राइमरी स्कूल को पांच हजार और अपर प्राइमरी स्कूल को 10 हजार रुपये का बजट दिया जाता है। खरीद के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित होती है। स्कूल प्रबंधन कमेटी (एसएमसी) के चेयरपर्सन इसके अध्यक्ष और स्कूल मुखिया सचिव होते हैं। सरपंच, खेल पृष्ठभूमि वाला एसएमसी सदस्य और एक शिक्षक इसके सदस्य होते हैं। राशि मिलने के बाद स्कूलों को पोर्टल पर बजट उपलब्धता, जरूरत तय करने, नियमानुसार खरीद, बिल भुगतान और खर्च का ब्योरा अपलोड करना होता है।
विज्ञापन
बजट में देरी से प्रतिभाओं को नुकसान
खेल बजट समय पर नहीं मिलने से नए उपकरणों की खरीद अटक जाती है। कई स्कूल पुराने और खराब उपकरणों से काम चलाने को मजबूर हैं। एक स्कूल के प्रधानाचार्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बजट न मिलने पर शिक्षक और स्कूल प्रबंधन स्थानीय स्तर पर उधार लेकर अस्थायी व्यवस्था करते हैं। मार्च में राशि मिलने पर जल्दबाजी में खरीद करनी पड़ती है। इससे खेल गतिविधियां और विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने के अवसर प्रभावित होते हैं।
स्कूलों की खेल राशि पर अंतिम फैसला लेना है। इस बार सेंट्रलाइज तरीके से उपकरण खरीदने व अन्य व्यवस्थाओं के लिए नए सिरे से टेंडर भी किया जा सकता है। कोशिश है कि इस बार देरी न हो। - विजय दहिया, प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग
विज्ञापन
इससे विद्यार्थियों को नए खेल उपकरणों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। पिछले दो सत्रों में भी बजट समय पर जारी नहीं होने की स्थिति सामने आई थी।
नियमानुसार खेल सामग्री की राशि एक अप्रैल से 31 मार्च तक खर्च की जा सकती है। निर्धारित अवधि में राशि खर्च नहीं होने पर बची रकम वापस हो जाती है। इसके बावजूद 2025-26 में 14,019 राजकीय स्कूलों के लिए 12 करोड़ 83 लाख 70 हजार रुपये का खेल सामग्री बजट वित्तीय वर्ष खत्म होने से महज एक दिन पहले 30 मार्च 2026 को जारी किया गया था। इससे स्कूलों को खरीद के लिए बेहद कम समय मिला। इसी तरह 2024-25 में भी खेल बजट मार्च के अंतिम दिनों में जारी हुआ था। चार-पांच दिन में खरीद की बाध्यता के कारण स्कूल प्रबंधन के सामने परेशानी खड़ी हुई। अब 2026-27 में भी राशि का इंतजार है।
विज्ञापन
हर प्राइमरी स्कूल को पांच हजार और अपर प्राइमरी को 10 हजार
खेल सामग्री खरीदने के लिए प्रत्येक प्राइमरी स्कूल को पांच हजार और अपर प्राइमरी स्कूल को 10 हजार रुपये का बजट दिया जाता है। खरीद के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित होती है। स्कूल प्रबंधन कमेटी (एसएमसी) के चेयरपर्सन इसके अध्यक्ष और स्कूल मुखिया सचिव होते हैं। सरपंच, खेल पृष्ठभूमि वाला एसएमसी सदस्य और एक शिक्षक इसके सदस्य होते हैं। राशि मिलने के बाद स्कूलों को पोर्टल पर बजट उपलब्धता, जरूरत तय करने, नियमानुसार खरीद, बिल भुगतान और खर्च का ब्योरा अपलोड करना होता है।
विज्ञापन
बजट में देरी से प्रतिभाओं को नुकसान
खेल बजट समय पर नहीं मिलने से नए उपकरणों की खरीद अटक जाती है। कई स्कूल पुराने और खराब उपकरणों से काम चलाने को मजबूर हैं। एक स्कूल के प्रधानाचार्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बजट न मिलने पर शिक्षक और स्कूल प्रबंधन स्थानीय स्तर पर उधार लेकर अस्थायी व्यवस्था करते हैं। मार्च में राशि मिलने पर जल्दबाजी में खरीद करनी पड़ती है। इससे खेल गतिविधियां और विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने के अवसर प्रभावित होते हैं।
स्कूलों की खेल राशि पर अंतिम फैसला लेना है। इस बार सेंट्रलाइज तरीके से उपकरण खरीदने व अन्य व्यवस्थाओं के लिए नए सिरे से टेंडर भी किया जा सकता है। कोशिश है कि इस बार देरी न हो। - विजय दहिया, प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग