Highcourt: ट्रस्टी की मौत के बाद वारिस नहीं लड़ सकते ट्रस्ट का मुकदमा, HC ने कहा-ये उत्तराधिकार में नहीं
करनाल में स्थित एक ट्रस्ट से जुड़े दीवानी विवाद में ट्रस्ट की ओर से एक ट्रस्टी ने अदालत में मुकदमा दायर किया था। सुनवाई के दौरान ट्रस्टी का निधन हो गया। सके कानूनी वारिसों ने आवेदन दाखिल कर स्वयं को मुकदमे में पक्षकार बनाने और कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति मांगी। इसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रस्ट से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि किसी ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधिक क्षमता में मुकदमा दायर करने वाले ट्रस्टी की मृत्यु होने पर उसके कानूनी वारिस उस मुकदमे को आगे नहीं बढ़ा सकते।
अदालत ने कहा कि ट्रस्टी का पद और उससे जुड़े अधिकार व्यक्तिगत संपत्ति की तरह उत्तराधिकार में हस्तांतरित नहीं होते। ऐसे मामलों में केवल जीवित ट्रस्टी या ट्रस्ट के नियमों के अनुसार नियुक्त नया ट्रस्टी ही मुकदमे को आगे बढ़ा सकता है।
जस्टिस विकास बहल ने यह फैसला सुनाते हुए मृत ट्रस्टी के कानूनी उत्तराधिकारियों को वादी के रूप में शामिल करने की मांग खारिज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने संबंधित पुनरीक्षण याचिका भी खारिज कर दी।
क्या था मामला
मामला करनाल जिले में स्थित एक ट्रस्ट से जुड़े दीवानी विवाद का है। ट्रस्ट की ओर से एक ट्रस्टी ने अदालत में मुकदमा दायर किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ट्रस्टी का निधन हो गया। इसके बाद उसके कानूनी वारिसों ने आवेदन दाखिल कर स्वयं को मुकदमे में पक्षकार बनाने और कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति मांगी।
ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि ट्रस्टी की हैसियत व्यक्तिगत नहीं बल्कि प्रतिनिधिक होती है। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई ट्रस्टी ट्रस्ट की ओर से अदालत में मुकदमा दायर करता है तो वह अपने निजी अधिकारों की रक्षा नहीं कर रहा होता, बल्कि ट्रस्ट के हितों का प्रतिनिधित्व कर रहा होता है। ऐसे में उसकी मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस स्वतः उस मुकदमे में उसका स्थान नहीं ले सकते।
अदालत ने कहा कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र कानूनी व्यवस्था है और उसके अधिकार किसी व्यक्ति विशेष से नहीं जुड़े होते। कोर्ट ने कहा कि केवल मृत ट्रस्टी का पुत्र, पत्नी या अन्य कानूनी उत्तराधिकारी होने मात्र से कोई व्यक्ति ट्रस्टी नहीं बन जाता। ट्रस्टी बनने के लिए ट्रस्ट की निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्ति आवश्यक है।