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Highcourt: नाम में गलती की वजह से बेटे की मौत का मुआवजा रोकना गलत, ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोलने के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 19 Jun 2026 10:52 AM IST
सार
भावना के 26 वर्षीय बेटे की 9 मई 2024 को मृत्यु हो गई थी। परिवार पहचान पत्र के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम थी, जिससे वे योजना के पात्र थे।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
परिवार पहचान पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र में पिता के नाम में हुई एक छोटी सी विसंगति ने एक परिवार को मिलने वाला मुआवजा रोक को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गलत करार दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि यदि मृत्यु प्रमाण पत्र में दर्ज त्रुटि को सुधार लिया गया है तो मुआवजा आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोला जाए और दावे पर आगे कार्रवाई की जाए।
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भावना के 26 वर्षीय बेटे की 9 मई 2024 को मृत्यु हो गई थी। परिवार पहचान पत्र के अनुसार परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम थी, जिससे वे योजना के पात्र थे। इसके बाद 23 मई 2024 को ऑनलाइन मुआवजा आवेदन कर दिया गया था। लेकिन जांच के दौरान यह सामने आया कि मृत्यु प्रमाण पत्र और परिवार पहचान पत्र में मृतक के पिता के नाम को लेकर अंतर है।
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इसी तकनीकी विसंगति के आधार पर हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास ने 16 दिसंबर 2024 को दावा खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने संबंधित विभाग से त्रुटि सुधार करवाई और 4 मार्च 2025 को संशोधित मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया। लेकिन समस्या यह रही कि ऑनलाइन पोर्टल पर दोबारा आवेदन करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था, जिससे पूरा मामला फिर अटक गया।
लगातार प्रयास और अभ्यावेदन के बाद भी समाधान नहीं मिला तो मामला हाई कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि यदि वास्तव में दस्तावेज सुधार दिए गए हैं तो हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास का मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोर्टल दोबारा खोलने पर विचार कर सकता है ताकि दावा पुनः प्रस्तुत किया जा सके। दोनों पक्षों की सहमति के बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास, पंचकूला के सीईओ के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करे। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण नियमों के अनुसार आगे कार्रवाई करेगा।