{"_id":"69d3b8cdf56e13a6e101a1f9","slug":"ias-officers-plea-against-fir-seeks-reply-by-8th-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1098-988685-2026-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: एफआईआर के खिलाफ आईएएस अधिकारी की याचिका पर 8 तक जवाब मांगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: एफआईआर के खिलाफ आईएएस अधिकारी की याचिका पर 8 तक जवाब मांगा
विज्ञापन
विज्ञापन
-गुरुग्राम स्कूल साइट आवंटन विवाद में भ्रष्टाचार व साजिश का है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एफआईआर की मंजूरी देने के खिलाफ हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डी सुरेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को 8 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए 1995 बैच के आईएएस अधिकारी डी सुरेश ने 2 फरवरी को जारी उस पत्र को चुनौती दी है जिसके तहत उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मंजूरी दी गई थी।
मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित एक स्कूल साइट के पुन: आवंटन से जुड़ा है। आरोप के अनुसार इससे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को कथित वित्तीय नुकसान हुआ है। उस समय डी. सुरेश पंचकूला में एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक के पद पर कार्यरत थे। राज्य सतर्कता ब्यूरो ने नवंबर 2019 में इस मामले में जांच शुरू की थी जिसमें कुल नौ अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों को शामिल किया गया। याचिका में कहा गया है कि इस प्लाट को लेकर जिला उपभोक्ता फोरम ने पहले आवंटी के पक्ष में आदेश दिया था जिसे बाद में राज्य उपभोक्ता आयोग ने पलट दिया। डी सुरेश ने अदालत को बताया कि इस मामले में राज्य सरकार द्वारा की गई जांच और एफआईआर की मंजूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानाें के खिलाफ है। किसी भी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि उनके खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट को पहले ही हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है और वह मामला लंबित है। ऐसे में एफआईआर की मंजूरी देना जल्दबाजी और कानून के विपरीत है।
Trending Videos
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एफआईआर की मंजूरी देने के खिलाफ हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डी सुरेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को 8 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए 1995 बैच के आईएएस अधिकारी डी सुरेश ने 2 फरवरी को जारी उस पत्र को चुनौती दी है जिसके तहत उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मंजूरी दी गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित एक स्कूल साइट के पुन: आवंटन से जुड़ा है। आरोप के अनुसार इससे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को कथित वित्तीय नुकसान हुआ है। उस समय डी. सुरेश पंचकूला में एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक के पद पर कार्यरत थे। राज्य सतर्कता ब्यूरो ने नवंबर 2019 में इस मामले में जांच शुरू की थी जिसमें कुल नौ अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों को शामिल किया गया। याचिका में कहा गया है कि इस प्लाट को लेकर जिला उपभोक्ता फोरम ने पहले आवंटी के पक्ष में आदेश दिया था जिसे बाद में राज्य उपभोक्ता आयोग ने पलट दिया। डी सुरेश ने अदालत को बताया कि इस मामले में राज्य सरकार द्वारा की गई जांच और एफआईआर की मंजूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानाें के खिलाफ है। किसी भी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि उनके खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट को पहले ही हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है और वह मामला लंबित है। ऐसे में एफआईआर की मंजूरी देना जल्दबाजी और कानून के विपरीत है।