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विश्व मुक्केबाजी में हरियाणा की चमक: ज्योति गुलिया ने जीता स्वर्ण पदक, उज्बेकिस्तान की खिलाड़ी को दी पटखनी
अम उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 21 Jun 2026 01:01 PM IST
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सार
ज्योति गुलिया की यह उपलब्धि हरियाणा की समृद्ध खेल संस्कृति और प्रदेश के खिलाड़ियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है।
बॉक्सर ज्योति गुलिया ने जीता स्वर्ण पदक
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हरियाणा के रोहतक जिले के रुड़की गांव की प्रतिभाशाली मुक्केबाज ज्योति गुलिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप स्टेज-2 में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। ज्योति ने 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में उज़्बेकिस्तान की मजबूत मुक्केबाज को हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
फाइनल में ज्योति का सामना वर्ष 2025 विश्व कप की रजत पदक विजेता उज़्बेक खिलाड़ी से था। मुकाबले के दौरान भारतीय मुक्केबाज ने आक्रामक और संतुलित खेल का प्रदर्शन किया। उनकी तेज़ी, तकनीक और आत्मविश्वास के आगे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी टिक नहीं सकी और ज्योति ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
ज्योति की इस सफलता से हरियाणा ही नहीं, पूरे देश में खुशी का माहौल है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर स्वर्ण जीतना उनकी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का प्रमाण है। खेल प्रेमियों का मानना है कि यह जीत आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय मुक्केबाजी को और मजबूती देगी। ज्योति गुलिया की यह उपलब्धि हरियाणा की समृद्ध खेल संस्कृति और प्रदेश के खिलाड़ियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी दर्शाती है।
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फाइनल में ज्योति का सामना वर्ष 2025 विश्व कप की रजत पदक विजेता उज़्बेक खिलाड़ी से था। मुकाबले के दौरान भारतीय मुक्केबाज ने आक्रामक और संतुलित खेल का प्रदर्शन किया। उनकी तेज़ी, तकनीक और आत्मविश्वास के आगे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी टिक नहीं सकी और ज्योति ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
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ज्योति की इस सफलता से हरियाणा ही नहीं, पूरे देश में खुशी का माहौल है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर स्वर्ण जीतना उनकी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का प्रमाण है। खेल प्रेमियों का मानना है कि यह जीत आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय मुक्केबाजी को और मजबूती देगी। ज्योति गुलिया की यह उपलब्धि हरियाणा की समृद्ध खेल संस्कृति और प्रदेश के खिलाड़ियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी दर्शाती है।