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Chandigarh-Haryana News: अब बिना विजिलेंस क्लियरेंस नहीं होगी अधिकारियों की पदोन्नति, पेंशन और पासपोर्ट की मंजूरी
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हरियाणा सरकार का आदेश, ग्रुप ए और बी अधिकारियों के सेवा मामलों में विजिलेंस क्लियरेंस जरूरी
चंडीगढ़। अब ग्रुप ए और बी के अधिकारियों की पदोन्नति, पेंशन, पासपोर्ट, डेपुटेशन और अन्य तय सेवा मामलों में पहले विजिलेंस क्लीयरेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके बिना संबंधित मामलों में आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी। हरियाणा सरकार ने इस संबंध में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और सरकारी संस्थाओं के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
हरियाणा सरकार ने विभागों को निर्देश दिए कि वे तय प्रारूप में सभी जरूरी और सत्यापित जानकारी के साथ प्रस्ताव भेजें। सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों में पेंशन में देरी न हो, इसके लिए संबंधित प्रस्ताव अधिकारी की रिटायरमेंट से कम से कम एक साल पहले भेजना होगा। गलत या अधूरी जानकारी देने और तथ्य छिपाने के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। प्रस्ताव में अधिकारी की नियुक्ति, पदोन्नति, डेपुटेशन और अन्य सेवा संबंधी पूरा रिकॉर्ड देना होगा, ताकि उसकी विजिलेंस स्थिति की समय पर जांच की जा सके।
सरकार ने इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को दी है। उन्हें कहा है कि विजिलेंस क्लीयरेंस प्राप्त किए बिना किसी भी मामले में आगे कार्रवाई न की जाए। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से सतर्कता तंत्र मजबूत होगा, सभी विभागों में एक समान प्रक्रिया लागू होगी और सेवा मामलों के निपटारे में होने वाली अनावश्यक देरी भी कम होगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य सभी विभागों में एक जैसी प्रक्रिया अपनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और सेवा मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करना है।
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चंडीगढ़। अब ग्रुप ए और बी के अधिकारियों की पदोन्नति, पेंशन, पासपोर्ट, डेपुटेशन और अन्य तय सेवा मामलों में पहले विजिलेंस क्लीयरेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके बिना संबंधित मामलों में आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी। हरियाणा सरकार ने इस संबंध में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और सरकारी संस्थाओं के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
हरियाणा सरकार ने विभागों को निर्देश दिए कि वे तय प्रारूप में सभी जरूरी और सत्यापित जानकारी के साथ प्रस्ताव भेजें। सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों में पेंशन में देरी न हो, इसके लिए संबंधित प्रस्ताव अधिकारी की रिटायरमेंट से कम से कम एक साल पहले भेजना होगा। गलत या अधूरी जानकारी देने और तथ्य छिपाने के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। प्रस्ताव में अधिकारी की नियुक्ति, पदोन्नति, डेपुटेशन और अन्य सेवा संबंधी पूरा रिकॉर्ड देना होगा, ताकि उसकी विजिलेंस स्थिति की समय पर जांच की जा सके।
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सरकार ने इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को दी है। उन्हें कहा है कि विजिलेंस क्लीयरेंस प्राप्त किए बिना किसी भी मामले में आगे कार्रवाई न की जाए। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से सतर्कता तंत्र मजबूत होगा, सभी विभागों में एक समान प्रक्रिया लागू होगी और सेवा मामलों के निपटारे में होने वाली अनावश्यक देरी भी कम होगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य सभी विभागों में एक जैसी प्रक्रिया अपनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और सेवा मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करना है।
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