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Haryana: छह माह में 14 हजार से अधिक अवैध ऑनलाइन सामग्री हटाई, 3947 साइबर अपराधी गिरफ्तार
Mon, 06 Jul 2026 03:48 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 06 Jul 2026 03:48 PM IST
सार
पिछले डेढ़ साल में साइबर हॉटस्पॉट नूंह से 927 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच 9,100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।
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Haryana Chief Secretary Anurag Rastogi
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा ने साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से साइबर ठगी के मामलों में 31 प्रतिशत धन वापसी सुनिश्चित की है।
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यह राष्ट्रीय औसत 3.85 प्रतिशत से आठ गुना अधिक है। इसके साथ ही वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में 14,000 से अधिक अवैध ऑनलाइन सामग्री हटाई गई और 3,947 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पिछले डेढ़ साल में साइबर हॉटस्पॉट नूंह से 927 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच 9,100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। यह जानकारी मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई प्रगति समीक्षा बैठक में दी गई।
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बैठक में मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र के लिए आवश्यक मानव संसाधन की स्वीकृति में तेजी लाने, प्रौद्योगिकी आधारित पुलिसिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित साइबर निगरानी तथा संस्थागत क्षमता को और सुदृढ़ करने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा अभियोजन और पीड़ित सहायता व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि बदलते डिजिटल खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
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बैठक में बताया गया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा विकसित मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत हरियाणा ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। जहां देशभर में 1,79,203 मामलों में 6,906 रेस्टोरेशन आदेश जारी हुए और रिफंड रेट 3.85 प्रतिशत रहा, वहीं हरियाणा में 7,316 मामलों में 2,241 रिस्टोरेशन आदेश जारी कर 31 प्रतिशत धन वापसी सुनिश्चित की गई।
पुलिस अधीक्षक (साइबर) मयंक गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2023 में पंचकूला में स्थापित राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र (एस4सी) की क्षमताओं का वर्ष 2026 में व्यापक विस्तार किया गया है। साइबर धोखाधड़ी शिकायत प्रबंधन, बैंक समन्वय, म्यूल अकाउंट, जांच निगरानी, मोबाइल एवं यूआरएल ब्लॉकिंग जैसी मौजूदा इकाइयों के अलावा अब एआई इंटीग्रेशन सेल, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट, ओसीडब्ल्यूसी यूनिट, क्रिएटिव अवेयरनेस यूनिट तथा सीक्रेट सेल भी स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण, नीति, अनुसंधान एवं विकास, डार्क वेब जांच तथा वर्चुअल डिजिटल एसेट से संबंधित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 25 जून, 2026 से हरियाणा में ई-जीरो एफआईआर सुविधा लागू कर दी गई है। इसके तहत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें स्वतः इलेक्ट्रॉनिक जीरो एफआईआर में परिवर्तित होकर संबंधित साइबर पुलिस थानों को चली जाती हैं, जिससे ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित हो रही है।
बैठक में बताया गया कि सहयोग पोर्टल के माध्यम से जनवरी से जून 2026 के दौरान 14,139 अवैध ऑनलाइन सामग्री हटाई गई, जबकि पूरे वर्ष 2025 में यह संख्या 5,169 थी। हटाई गई सामग्री में फिशिंग वेबसाइट, फर्जी विज्ञापन, धोखाधड़ी से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट, फिशिंग गूगल विज्ञापन तथा बिना सहमति साझा की गई निजी आपत्तिजनक सामग्री शामिल है।
बैठक में साइबर अपराध के हॉटस्पॉट नूंह में की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच हरियाणा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर 473 एफआईआर दर्ज कीं, 927 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया, 751 मोबाइल फोन तथा 1,442 सिम कार्ड जब्त किए। इसके अतिरिक्त खुफिया अभियानों के तहत 43,354 मोबाइल नंबर तथा उनसे जुड़े 5,007 आईएमईआई को टावर डंप विश्लेषण, आईएमईआई लिंकिंग तथा प्रतिबिंब पोर्टल की सहायता से ब्लॉक कर संगठित साइबर अपराध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया गया।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शिकायत निवारण मॉड्यूल (जीआरएम) की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज किए गए बैंक खातों से संबंधित 533 शिकायतों में से 410 का निपटान किया जा चुका है तथा समर्पित मॉनिटरिंग टीमों के माध्यम से सभी मामलों का 15 दिनों की निर्धारित समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।
बैठक में साइबर जांच क्षमता सुदृढ़ करने के लिए किए गए प्रयासों की भी जानकारी दी गई। वर्तमान में प्रदेश भर में 675 पुलिस कर्मी साइबर अपराध जांच में कार्यरत हैं। इसके अलावा, 3,742 अधिकारियों ने साइट्रेन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन में 5,390 पुलिस कर्मियों को विशेष ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। हरियाणा पुलिस के दो अधिकारी साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किए गए हैं तथा 12 अन्य अधिकारी साइबर कमांडो प्रशिक्षण के अगले चरण के लिए पात्र घोषित किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि समन्वय पोर्टल पर हरियाणा ने अन्य राज्यों से प्राप्त 8,872 अनुरोधों में से 8,625 का निपटान कर 97 प्रतिशत से अधिक दक्षता दर्ज की है, जिससे राज्य देश के अग्रणी राज्यों में बना हुआ है।
बैठक में साइबर जागरूकता अभियान की भी समीक्षा की गई। जनवरी से जून 2026 के बीच हरियाणा पुलिस द्वारा स्कूलों, कॉलेजों, बस अड्डों, बाजारों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 1,322 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके माध्यम से लगभग 3.14 लाख नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के बारे में जागरूक किया गया। सोशल मीडिया के माध्यम से भी समय-समय पर साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों और उनसे बचाव संबंधी सलाह दी जा रही है।
बैठक में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल तथा गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव डॉ. वंदना दिसोदिया समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।