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Chandigarh-Haryana News: फर्जी किसानों के नाम पर पंचायत भूमि को योजना में कराया पंजीकृत, हाईकोर्ट ने दिया जांच का आदेश
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- कैथल के खरोड़ी गांव में ‘मेरी फसल-मेरा ब्याेरा’ पोर्टल पर कथित घोटाले का आरोप
- हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर डिप्टी डायरेक्टर कृषि को दिए कार्रवाई के निर्देश
चंडीगढ़। कैथल के गांव खरोड़ी की पंचायत भूमि को फर्जी किसानों के नाम पर दिखाकर ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ योजना में पंजीकृत करने के कथित फर्जीवाड़े पर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कृषि व किसान कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
गुरमीत सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि गांव की पंचायत भूमि को कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से अपने नाम पर ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल में पंजीकृत करवा लिया है। यह योजना किसानों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित सरकारी लाभ देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन गांव में इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में सीएम विंडो और जिला प्रशासन सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायत दीं, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 21 अप्रैल 2026 की जांच रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया कि मामले की जांच की जा चुकी है और कुछ सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट के बावजूद वह पंचायत भूमि जो लीज पर नहीं दी गई थी और न ही किसी की ओर से वैध रूप से इस्तेमाल की गई, फिर भी कथित रूप से फर्जी फसल दर्शाकर दूसरे राज्यों से प्राप्त वास्तविक उपज के समायोजन के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
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- हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर डिप्टी डायरेक्टर कृषि को दिए कार्रवाई के निर्देश
चंडीगढ़। कैथल के गांव खरोड़ी की पंचायत भूमि को फर्जी किसानों के नाम पर दिखाकर ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ योजना में पंजीकृत करने के कथित फर्जीवाड़े पर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कृषि व किसान कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
गुरमीत सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि गांव की पंचायत भूमि को कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से अपने नाम पर ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल में पंजीकृत करवा लिया है। यह योजना किसानों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित सरकारी लाभ देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन गांव में इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में सीएम विंडो और जिला प्रशासन सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायत दीं, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
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अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 21 अप्रैल 2026 की जांच रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया कि मामले की जांच की जा चुकी है और कुछ सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट के बावजूद वह पंचायत भूमि जो लीज पर नहीं दी गई थी और न ही किसी की ओर से वैध रूप से इस्तेमाल की गई, फिर भी कथित रूप से फर्जी फसल दर्शाकर दूसरे राज्यों से प्राप्त वास्तविक उपज के समायोजन के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।