प्लास्टिक कचरा: हरियाणा में तीन साल में 2.69 करोड़ जुर्माना, वसूली सिर्फ 32 फीसदी; विधानसभा रिपोर्ट में खुलासा
विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में प्रदूषण विभाग व नगर निगम की कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है। साल 2022–23 में 10,351 चालान किए गए और 1.39 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, मगर वसूली सिर्फ 36.82 लाख रुपये ही हो सकी।
विस्तार
हरियाणा में प्लास्टिक कचरे पर सख्ती के दावे जमीन पर कमजोर साबित हो रहे हैं। पिछले तीन साल में चालान तो काटे गए। करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया मगर वसूली बेहद कम रही।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2022–23 से 2024–25 के बीच कुल 27 हजार 725 चालान किए गए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर दो करोड़ 69 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके मुकाबले केवल 87.34 लाख रुपये की ही वसूली हो पाई, जबकि करीब 1.82 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। यानी 68 फीसदी जुर्माना अब तक नहीं वसूला गया।
विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में प्रदूषण विभाग व नगर निगम की कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है। साल 2022–23 में 10,351 चालान किए गए और 1.39 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, मगर वसूली सिर्फ 36.82 लाख रुपये ही हो सकी।
2023–24 में चालानों की संख्या बढ़कर 11,219 हो गई, मगर वसूली फिर भी सीमित रही। करीब 74.85 लाख के जुर्माने में से सिर्फ 26.72 लाख रुपये ही वसूले गए। वहीं 2024–25 में चालान घटकर 6,155 रह गए, लेकिन वसूली का प्रतिशत फिर भी बेहतर नहीं हुआ। इस साल 55 लाख रुपये जुर्माना लगाया, वसूली सिर्फ 23 लाख रुपये की हो सकी।
प्लास्टिक कचरे की स्थिति गंभीर
हरियाणा में बढ़ते प्लास्टिक कचरे को लेकर विधानसभा की कमेटी ने सख्त रुख अपनाया है। अपनी रिपोर्ट में कमेटी ने साफ कहा है कि राज्य में प्लास्टिक कचरे की मौजूदा स्थिति बेहद खराब है और इसे नियंत्रित करने के लिए अब तक उठाए जा रहे कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
कमेटी के मुताबिक, विभाग द्वारा किए जा रहे चालान और जुर्माने प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में नियमों को और सख्त बनाने की जरूरत है। कमेटी ने अनुशंसा की है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल करने या नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, ताकि लोगों में कानून का डर बने और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही कमेटी ने व्यावहारिक समाधान भी सुझाए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्रमुख बाजारों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक बोतल और कैन को नष्ट करने वाली मशीनें लगाई जानी चाहिए। इससे लोग आसानी से प्लास्टिक कचरा वहीं जमा कर सकेंगे और इसे एक जगह एकत्र किया जा सकेगा। कमेटी का मानना है कि अगर प्लास्टिक कचरे को व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा किया जाए तो इसे रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जा सकता है। बाजार में प्लास्टिक कचरे की मांग भी मौजूद है, ऐसे में यह व्यवस्था पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
प्लास्टिक कचरे को लेकर 1500 से अधिक कार्यक्रम
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पिछले तीन साल में शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय बाजारों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कुल 1500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान शैक्षणिक संस्थानों में 601 कार्यक्रम, स्थानीय बाजारों और सड़कों पर 813 कार्यक्रम, वहीं, शॉपिंग मॉल और रेलवे स्टेशनों जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी 118 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को सिंगल-यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभाव, वायु प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ऐसे जागरूकता अभियानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
किस साल कितना जुर्माना लगा
साल चालान जुर्माना वसूला गया रिकवरी बाकी
2022–23 10,351 1,39,23,800 36,82,900 1,02,40,900
2023–24 11,219 74,85,500 26,72,700 48,12,800
2024–25 6,155 55,25,900 23,78,500 31,47,400