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IDFC बैंक घोटाला: राव नरेंद्र ने सरकारी धन की सुरक्षा पर उठाए सवाल, सरकार से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग
Sun, 28 Jun 2026 03:28 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 28 Jun 2026 03:28 PM IST
सार
हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आईडीएफसी बैंक घोटाले को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा जनता के टैक्स के पैसे की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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राव नरेंद्र, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के मामले में सीबीआई की चार्जशीट में हुए नए खुलासों को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल इस मामले तक सीमित न रहे, बल्कि सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और स्वायत्त संस्थाओं द्वारा विभिन्न बैंकों में जमा कराए गए सरकारी धन की भी व्यापक जांच कराए।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि सरकारी विभागों के करोड़ों रुपये कथित रूप से दूसरे खातों में स्थानांतरित किए जा सकते हैं और वित्तीय प्रक्रियाओं में अनियमितताएं हो सकती हैं, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अन्य विभागों ने सरकारी धन जमा करते समय वित्तीय नियमों, आरबीआई के दिशा-निर्देशों और सरकारी प्रक्रियाओं का पालन किया या नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक करे कि किस विभाग ने किस बैंक में कितनी राशि जमा कराई, किस स्तर पर इसकी मंजूरी दी गई और क्या निर्धारित नियमों का पालन हुआ।
उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार को श्वेत पत्र जारी कर सभी विभागों की बैंक जमा राशि, स्वीकृति प्रक्रिया और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रहेगा।
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राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि सरकारी विभागों के करोड़ों रुपये कथित रूप से दूसरे खातों में स्थानांतरित किए जा सकते हैं और वित्तीय प्रक्रियाओं में अनियमितताएं हो सकती हैं, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अन्य विभागों ने सरकारी धन जमा करते समय वित्तीय नियमों, आरबीआई के दिशा-निर्देशों और सरकारी प्रक्रियाओं का पालन किया या नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक करे कि किस विभाग ने किस बैंक में कितनी राशि जमा कराई, किस स्तर पर इसकी मंजूरी दी गई और क्या निर्धारित नियमों का पालन हुआ।
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उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार को श्वेत पत्र जारी कर सभी विभागों की बैंक जमा राशि, स्वीकृति प्रक्रिया और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रहेगा।
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