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शिक्षा का अधिकार जीवन के किसी भी चरण में छीना नहीं जा सकता : हाईकोर्ट

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- डिस्टेंस पाठ्यक्रमों के लिए तीन वर्ष नियमित सेवा के बिना दी जा सकती है अनुमति
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- केवल शारीरिक उपस्थिति और अध्ययन अवकाश आवश्यक होने की स्थिति में ही यह लागू


चंडीगढ़। महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार जीवन के किसी भी चरण में छीना नहीं जा सकता है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिए कि नवनियुक्त वेटरनरी लाइवस्टॉक डेवलपमेंट असिस्टेंट नवीन कुमार को तीन वर्ष की सेवा पूरी किए बिना डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से बीए करने की अनुमति दी जाए।



जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने अपने फैसले में कहा कि तीन वर्ष की नियमित सेवा की शर्त केवल उन पाठ्यक्रमों पर लागू होती है जिनमें नियमित कक्षाओं में शारीरिक उपस्थिति और अध्ययन अवकाश आवश्यक हो। ऑनलाइन, प्राइवेट, कॉरेस्पॉन्डेंस या डिस्टेंस मोड के पाठ्यक्रमों के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है क्योंकि इनमें अध्ययन अवकाश की आवश्यकता नहीं पड़ती।
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नवीन कुमार का चयन 9 फरवरी 2024 को हुआ था और उन्होंने 15 फरवरी को कार्यभार संभाला। नियुक्ति के समय उनके पास केवल 10वीं और 12वीं की योग्यता थी। 29 मई 2024 को उन्होंने डिस्टेंस मोड से बीए में प्रवेश लेने की अनुमति मांगी और लिखित आश्वासन दिया कि वह किसी प्रकार का स्टडी लीव नहीं लेंगे और उनकी पढ़ाई से सरकारी कार्य प्रभावित नहीं होगा। इसके बावजूद 2 जुलाई 2024 को सक्षम प्राधिकारी ने तीन वर्ष की नियमित सेवा पूरी न होने के आधार पर उनकी मांग ठुकरा दी।


याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि 2022 के निर्देशों की धारा 2(i)(a) के अनुसार विभागाध्यक्ष डिस्टेंस/ऑनलाइन/कॉरेस्पॉन्डेंस मोड में पढ़ाई की अनुमति बिना किसी न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त के दे सकता है, बशर्ते सरकारी काम प्रभावित न हो। वहीं, हरियाणा सरकार ने दलील दी कि याचिकाकर्ता अभी परिवीक्षा अवधि में हैं और उनकी सेवा अवधि बहुत कम है, इसलिए अनुमति देना उचित नहीं है।



अदालत ने शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को जीवन के किसी भी चरण में किसी शैक्षणिक योग्यता को प्राप्त करने से वंचित करना शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। बेहतर शिक्षित कार्यबल जनहित में है और एक समाजवादी कल्याणकारी राज्य में आदर्श नियोक्ता के रूप में राज्य का दायित्व है कि वह कर्मचारियों की शैक्षणिक उन्नति को प्रोत्साहित करे। कोर्ट ने उसे मंजूरी देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता स्टडी लीव का लाभ नहीं लेंगा, अपने कार्य की गुणवत्ता और मानक बनाए रखेगा और केवल परीक्षा अवधि में ही नियमानुसार अवकाश दिया जाएगा।
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