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नियम पीछे, वसूली आगे : फॉर्म-6 के बिना ही बढ़ी स्कूल फीस

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कुलदीप शुक्ला
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चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्कूलों में किताब वितरण में देरी के बाद अब निजी स्कूलों से फॉर्म-6 लेने और उसकी जांच की प्रक्रिया भी पटरी से उतरती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि शिक्षा विभाग अभी तक एमआईएस पोर्टल पर फॉर्म-6 भरवाने का इंतजाम कर रहा है जबकि अधिकांश निजी स्कूल पहले ही नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए फीस बढ़ा चुके हैं।
प्रदेश में करीब 10,701 निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में स्कूलों ने महंगाई और बढ़ते खर्चों का हवाला देते हुए नए सत्र के लिए 10 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है। नियमों के मुताबिक किसी भी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले फॉर्म-6 भरकर विभाग को देना अनिवार्य है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फॉर्म-6 में दी गई जानकारी की जांच के लिए अधिकारी औचक निरीक्षण करते हैं और गलत जानकारी देने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक न तो समय पर फॉर्म-6 लिए गए और न ही फीस वृद्धि पर कोई रोक लग पाई। अभिभावकों का कहना है कि विभाग की ढिलाई का सीधा नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है। पानीपत के अभिभावक राजेंद्र कुमार और प्रदीप गाहल्याण ने कहा कि अगर विभाग समय पर कार्रवाई करता तो स्कूल मनमानी फीस नहीं वसूल पाते। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) विनीत गर्ग का दावा है अभी मार्च चल रहा है और जल्द ही फाॅर्म-6 की प्रक्रिया निजी स्कूलों से पूरी करवाई जाएगी।
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क्या है फॉर्म-6 और क्यों जरूरी है
फॉर्म-6 एक अनिवार्य दस्तावेज है जिसे हर निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले शिक्षा विभाग को देना होता है। इसमें स्कूल को फीस बढ़ाने का कारण, स्टाफ की सैलरी, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, सुविधाओं और अन्य वित्तीय विवरण देना होता है। इसका उद्देश्य फीस वृद्धि को पारदर्शी और नियंत्रित रखना है। फॉर्म-6 पूरी तरह ऑनलाइन भरा जाता है। शिक्षा विभाग पोर्टल खोलता है जिस पर स्कूल लॉगिन कर जरूरी वित्तीय और प्रशासनिक जानकारी अपलोड करते हैं। इसके बाद विभाग द्वारा जांच और सत्यापन किया जाता है। विभाग की ओर से स्कूलों से फार्म छह लेने में देरी के कई कारण हैं। इनमें विभाग द्वारा पोर्टल समय पर न खोलना, प्रशासनिक लापरवाही और धीमी प्रक्रिया, पिछले सत्र की जांच लंबित होना आदि शामिल हैं।

अभिभावकों और स्कूलों पर असर
फाॅर्म-6 लेने में देरी के कारण अभिभावकों पर बिना जांच के फीस का बोझ बढ़ गया है। स्कूलों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप है। विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। फीस में पारदर्शिता की कमी और विवाद की स्थिति बन रही है।


पिछले पांच वर्षों में फॉर्म-6 भरवाने में लेटलतीफी
पिछले पांच वर्षों में हरियाणा में फॉर्म-6 भरवाने की प्रक्रिया लगातार देरी का शिकार रही है। सत्र 2021-22 में अंतिम तिथि 30 अप्रैल थी लेकिन कई स्कूलों ने मई-जून तक फॉर्म जमा किए थे। सत्र 2022-23 में भी पोर्टल मई के पहले सप्ताह तक ही खुल पाया था। सत्र 2023-24 में डेडलाइन 30 अप्रैल से बढ़ाकर 10 मई करनी पड़ी थी। सत्र 2024-25 में भी यही स्थिति रही थी। सत्र 2025-26 में अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 7 मई करनी पड़ी फिर भी प्रक्रिया लंबित रही थी। वर्तमान में 18 मार्च तक फॉर्म-6 की कोई चर्चा तक नहीं है।


फरवरी-मार्च में पूरी हो जानी चाहिए प्रक्रिया : कुंडू

निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि वे भी विभागीय प्रक्रिया के कारण फंसे हुए हैं। प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यावान कुंडू के अनुसार विभाग जब तक पोर्टल नहीं खोलता तब तक स्कूल फॉर्म जमा नहीं कर सकते। यह प्रक्रिया हर साल फरवरी-मार्च में पूरी हो जानी चाहिए जो अब तक लंबित है। यह प्रक्रिया फरवरी अंत तक पूरी हो जाए तो मार्च में निजी स्कूल नई फीस तय कर दाखिले शुरू कर सकते हैं।
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