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Chandigarh-Haryana News: महंगी गाड़ियों का पंजीकरण शुल्क व बस किराया बढ़ाने के संकेत
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वित्त विभाग की समीक्षा रिपोर्ट में मिले संकेत, कुल राजस्व में 15 फीसदी की वृद्धि
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग व सिंचाई विभाग के राजस्व में गिरावट दर्ज की गई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के कई विभाग राजस्व में आगे निकल गए तो कुछ पीछे रह गए। वित्त विभाग की छमाही समीक्षा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए आगामी महीनों में कुछ बड़े निर्णय ले सकती है। इनमें मुख्य रूप से उच्च श्रेणी के वाहनों (महंगी गाड़ियों) का पंजीकरण शुल्क व बस किराये में भी बढ़ोतरी करने पर सरकार मंथन कर रही है। इस पर विचार के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आठ जनवरी को एक बैठक भी बुलाई गई थी मगर किसी कारणवश उसे टालना पड़ा। फिलहाल अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं की गई है।
वित्त विभाग ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि परिवहन विभाग में वाहनों पर करों से प्राप्त होने वाले राजस्व में 12 फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले साल 3,693 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ था। इस बार यह बढ़कर 4,153 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बसों के यात्री टिकट के राजस्व में करीब पांच फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में 31 दिसंबर तक 1050 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था जो 2025-26 में 31 दिसंबर तक 1,001 करोड़ रुपये रहा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को पिछले वित्त वर्ष में 31 दिसंबर तक करीब 1060 करोड़ रुपये की आय हुई थी जबकि इस बार 31 दिसंबर तक 854 करोड़ की आय हुई जो करीब 19 फीसदी कम है। विभाग को लाइसेंस फीस, कन्वर्जन चार्ज, सिक्योरिटी फीस व कंपोजन शुल्क से आय होती है। इसके अलावा माइनिंग विभाग की आय में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है। पिछले साल राजस्व प्राप्ति 488 करोड़ थी जो बढ़कर 728 करोड़ हो गई है। सिंचाई विभाग के राजस्व में करीब आठ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
आनलाइन रजिस्ट्री की वजह से नवंबर में गिरा राजस्व
प्रदेश सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए ऑनलाइन व पेपरलेस रजिस्ट्री की सौगात दी थी। मगर इस प्रक्रिया से राजस्व विभाग के राजस्व में उतार-चढ़ाव देखा गया। वित्त विभाग के मुताबिक अक्तूबर 2025 तक स्टांप व पंजीकरण से होने वाली औसत राजस्व वसूली लगभग 1300 करोड़ रुपये प्रति माह रही है। पेपरलेस व ऑनलाइन रजिस्ट्री लागू होने के बाद नवंबर में राजस्व घटकर आधे से भी कम हो गया। नवंबर में राजस्व वसूली केवल 554 करोड़ रुपये रही हालांकि दिसंबर में बढ़कर राजस्व फिर से 1297 करोड़ रुपये हो गया।
अलॉटी को संपत्तियों का कराना होगा रजिस्ट्रेशन
राजस्व बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार जल्द ही उन अलॉटियों को संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन का आदेश दे सकती है जिन्होंने अभी तक अपनी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं करवाई है। कई बार डेवलपर्स, बिल्डर्स, सोसाइटियां व प्राधिकरण अलॉटी को अपनी पुस्तकों में अचल संपत्ति का हस्तांतरण कर देते हैं। यहां तक कब्जा भी दे देते हैं मगर रजिस्ट्री नहीं करवाते। इससे सरकार को स्टांप ड्यूटी का नुकसान होता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसकी बजट में घोषणा भी की थी। मुख्यमंत्री सैनी ने विभाग से इस बारे में उनकी तैयारियां पूछी हैं। इसमें यह भी प्रावधान किया जाएगा कि अलॉटी यदि एक निश्चित अवधि में ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें मौजूदा कलेक्टर रेट पर स्टांप शुल्क देना होगा।
पूंजीगत व्यय में 13.5 फीसदी की वृद्धि
काफी उतार-चढ़ाव के बावजूद हरियाणा के लिए 31 दिसंबर तक यह वित्त वर्ष काफी अच्छा रहा है। राज्य सरकार की वार्षिक कुल राजस्व प्राप्तियों में 31 दिसंबर तक 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है जो आगे भी जारी रहने वाली है। वहीं, राजस्व व्यय में करीब 5.4 फीसदी व पूंजीगत व्यय में 13.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। उधर, केंद्र से मिलने वाले अनुदान में 22.8% की गिरावट आई है।
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टाउन एंड कंट्री प्लानिंग व सिंचाई विभाग के राजस्व में गिरावट दर्ज की गई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के कई विभाग राजस्व में आगे निकल गए तो कुछ पीछे रह गए। वित्त विभाग की छमाही समीक्षा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए आगामी महीनों में कुछ बड़े निर्णय ले सकती है। इनमें मुख्य रूप से उच्च श्रेणी के वाहनों (महंगी गाड़ियों) का पंजीकरण शुल्क व बस किराये में भी बढ़ोतरी करने पर सरकार मंथन कर रही है। इस पर विचार के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आठ जनवरी को एक बैठक भी बुलाई गई थी मगर किसी कारणवश उसे टालना पड़ा। फिलहाल अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं की गई है।
वित्त विभाग ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि परिवहन विभाग में वाहनों पर करों से प्राप्त होने वाले राजस्व में 12 फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले साल 3,693 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ था। इस बार यह बढ़कर 4,153 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बसों के यात्री टिकट के राजस्व में करीब पांच फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में 31 दिसंबर तक 1050 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था जो 2025-26 में 31 दिसंबर तक 1,001 करोड़ रुपये रहा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को पिछले वित्त वर्ष में 31 दिसंबर तक करीब 1060 करोड़ रुपये की आय हुई थी जबकि इस बार 31 दिसंबर तक 854 करोड़ की आय हुई जो करीब 19 फीसदी कम है। विभाग को लाइसेंस फीस, कन्वर्जन चार्ज, सिक्योरिटी फीस व कंपोजन शुल्क से आय होती है। इसके अलावा माइनिंग विभाग की आय में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है। पिछले साल राजस्व प्राप्ति 488 करोड़ थी जो बढ़कर 728 करोड़ हो गई है। सिंचाई विभाग के राजस्व में करीब आठ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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आनलाइन रजिस्ट्री की वजह से नवंबर में गिरा राजस्व
प्रदेश सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए ऑनलाइन व पेपरलेस रजिस्ट्री की सौगात दी थी। मगर इस प्रक्रिया से राजस्व विभाग के राजस्व में उतार-चढ़ाव देखा गया। वित्त विभाग के मुताबिक अक्तूबर 2025 तक स्टांप व पंजीकरण से होने वाली औसत राजस्व वसूली लगभग 1300 करोड़ रुपये प्रति माह रही है। पेपरलेस व ऑनलाइन रजिस्ट्री लागू होने के बाद नवंबर में राजस्व घटकर आधे से भी कम हो गया। नवंबर में राजस्व वसूली केवल 554 करोड़ रुपये रही हालांकि दिसंबर में बढ़कर राजस्व फिर से 1297 करोड़ रुपये हो गया।
अलॉटी को संपत्तियों का कराना होगा रजिस्ट्रेशन
राजस्व बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार जल्द ही उन अलॉटियों को संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन का आदेश दे सकती है जिन्होंने अभी तक अपनी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं करवाई है। कई बार डेवलपर्स, बिल्डर्स, सोसाइटियां व प्राधिकरण अलॉटी को अपनी पुस्तकों में अचल संपत्ति का हस्तांतरण कर देते हैं। यहां तक कब्जा भी दे देते हैं मगर रजिस्ट्री नहीं करवाते। इससे सरकार को स्टांप ड्यूटी का नुकसान होता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसकी बजट में घोषणा भी की थी। मुख्यमंत्री सैनी ने विभाग से इस बारे में उनकी तैयारियां पूछी हैं। इसमें यह भी प्रावधान किया जाएगा कि अलॉटी यदि एक निश्चित अवधि में ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें मौजूदा कलेक्टर रेट पर स्टांप शुल्क देना होगा।
पूंजीगत व्यय में 13.5 फीसदी की वृद्धि
काफी उतार-चढ़ाव के बावजूद हरियाणा के लिए 31 दिसंबर तक यह वित्त वर्ष काफी अच्छा रहा है। राज्य सरकार की वार्षिक कुल राजस्व प्राप्तियों में 31 दिसंबर तक 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है जो आगे भी जारी रहने वाली है। वहीं, राजस्व व्यय में करीब 5.4 फीसदी व पूंजीगत व्यय में 13.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। उधर, केंद्र से मिलने वाले अनुदान में 22.8% की गिरावट आई है।