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Chandigarh-Haryana News: ड्रेनों व सीवरेज की सफाई के लिए एसओपी बनेगी
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- यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की योजना पर कार्य तेज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि जीएमडीए स्टॉर्म वाटर ड्रेन और सीवरेज लाइनों की सफाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें ताकि अवैध कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके।
गुरुग्राम में बैठक के दौरान तय किया गया कि सभी परियोजनाएं तय समय में पूरी हों और जमीन पर इनका असर दिखना चाहिए। एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की दोबारा संयुक्त सैंपलिंग कर 15 दिन में रिपोर्ट देने, बिना उपचारित पानी के डायवर्जन को नियंत्रित करने और उपचारित पानी को सिंचाई में उपयोग करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा तीन महीने के भीतर सभी प्रदूषण बिंदुओं की पहचान और मैपिंग पूरी की जाएगी। ड्रेनों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान और पूरा रिकॉर्ड रखने पर भी जोर दिया गया। अवैध टैंकर संचालन पर रोक के लिए विशेष टीम बनाई जाएगी और नए टैंकरों की रिपोर्ट तैयार होगी। ड्रेनों के किनारे फेंसिंग, एसटीपी का नियमित निरीक्षण और मानकों के अनुसार संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य में प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
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चंडीगढ़। यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि जीएमडीए स्टॉर्म वाटर ड्रेन और सीवरेज लाइनों की सफाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें ताकि अवैध कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके।
गुरुग्राम में बैठक के दौरान तय किया गया कि सभी परियोजनाएं तय समय में पूरी हों और जमीन पर इनका असर दिखना चाहिए। एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की दोबारा संयुक्त सैंपलिंग कर 15 दिन में रिपोर्ट देने, बिना उपचारित पानी के डायवर्जन को नियंत्रित करने और उपचारित पानी को सिंचाई में उपयोग करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा तीन महीने के भीतर सभी प्रदूषण बिंदुओं की पहचान और मैपिंग पूरी की जाएगी। ड्रेनों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान और पूरा रिकॉर्ड रखने पर भी जोर दिया गया। अवैध टैंकर संचालन पर रोक के लिए विशेष टीम बनाई जाएगी और नए टैंकरों की रिपोर्ट तैयार होगी। ड्रेनों के किनारे फेंसिंग, एसटीपी का नियमित निरीक्षण और मानकों के अनुसार संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य में प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
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