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गर्भावस्था में सेवा समाप्ति अनुचित: HC ने हरियाणा सरकार को दिया टीजीटी शिक्षिका की बहाली का आदेश
Thu, 09 Jul 2026 09:39 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 09 Jul 2026 09:39 AM IST
सार
याचिकाकर्ता की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से हुई थी। उन्हें सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के रूप में नियुक्त किया गया था।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण मेडिकल अवकाश मांगने वाली संविदा शिक्षिका की सेवा समाप्त करने के मामले में हरियाणा सरकार को कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि मेडिकल आधार पर अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना उचित नहीं है।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर टीजीटी (साइंस) शिक्षिका के पक्ष में नया तैनाती पत्र जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही दो सप्ताह के भीतर उसे कार्यभार ग्रहण कराने का निर्देश भी दिया गया है। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को होगी।
शिक्षिका की नियुक्ति और सेवा समाप्ति
याचिकाकर्ता की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से हुई थी। उन्हें सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के रूप में नियुक्त किया गया था। गर्भावस्था के दौरान गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं आने पर डॉक्टरों ने उन्हें नौ माह तक पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी थी।
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उन्होंने 9 अक्तूबर 2025 को मेडिकल अवकाश मांगा था। हालांकि, अवकाश पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। याचिका में बताया गया कि 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया था। इससे स्पष्ट है कि मेडिकल अवकाश वास्तविक चिकित्सकीय कारणों से मांगा गया था।
मेडिकल अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना अनुचित
शिक्षिका ने अदालत को बताया कि वह अनुपस्थिति अवधि का वेतन नहीं चाहती हैं। वह अब पूरी तरह स्वस्थ होकर दोबारा कार्य करने को तैयार हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने मजबूरी में चिकित्सकीय आधार पर अवकाश मांगा था।अदालत ने यह भी कहा कि उसी पद पर कार्यरत अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ा दी गईं। इसके बावजूद केवल मेडिकल अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना उचित नहीं दिखता।
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जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर टीजीटी (साइंस) शिक्षिका के पक्ष में नया तैनाती पत्र जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही दो सप्ताह के भीतर उसे कार्यभार ग्रहण कराने का निर्देश भी दिया गया है। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को होगी।
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शिक्षिका की नियुक्ति और सेवा समाप्ति
याचिकाकर्ता की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से हुई थी। उन्हें सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के रूप में नियुक्त किया गया था। गर्भावस्था के दौरान गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं आने पर डॉक्टरों ने उन्हें नौ माह तक पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी थी।
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उन्होंने 9 अक्तूबर 2025 को मेडिकल अवकाश मांगा था। हालांकि, अवकाश पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। याचिका में बताया गया कि 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया था। इससे स्पष्ट है कि मेडिकल अवकाश वास्तविक चिकित्सकीय कारणों से मांगा गया था।
मेडिकल अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना अनुचित
शिक्षिका ने अदालत को बताया कि वह अनुपस्थिति अवधि का वेतन नहीं चाहती हैं। वह अब पूरी तरह स्वस्थ होकर दोबारा कार्य करने को तैयार हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने मजबूरी में चिकित्सकीय आधार पर अवकाश मांगा था।अदालत ने यह भी कहा कि उसी पद पर कार्यरत अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ा दी गईं। इसके बावजूद केवल मेडिकल अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना उचित नहीं दिखता।