Explainer: क्या फीफा विश्वकप में अर्जेंटीना और मेसी पर इनफैनटिनो मेहरबान? आरोप-विवाद और आंकड़ों की पूरी पड़ताल
फीफा विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना की क्वार्टर फाइनल तक की यात्रा जितनी शानदार रही है, उतनी ही विवादों से भी घिरी रही है। मिस्र ने रेफरी और VAR पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर भी फीफा और अर्जेंटीना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन क्या इन आरोपों के पीछे कोई ठोस आधार है या यह सिर्फ हार की निराशा है? आइए आंकड़ों और घटनाओं के जरिए समझते हैं।
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। आठ टीमें क्वार्टर फाइनल में जगह बना चुकी हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा किसी टीम के खेल की नहीं बल्कि अर्जेंटीना और फीफा को लेकर हो रही है। राउंड ऑफ-16 में मिस्र के खिलाफ अर्जेंटीना ने 0-2 से पिछड़ने के बाद अंतिम 11 मिनट में तीन गोल दागकर 3-2 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस जीत ने लियोनल मेसी की टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद विवाद शुरू हो गया।
मिस्र फुटबॉल संघ (EFA) ने फीफा के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। मुख्य कोच होसाम हसन ने रेफरी और VAR पर गंभीर आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर लाखों लोग यह सवाल पूछने लगे कि क्या फीफा विश्व कप में अर्जेंटीना को विशेष फायदा मिल रहा है? हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई निर्णायक सबूत सामने नहीं आया है, लेकिन कई घटनाओं ने बहस जरूर तेज कर दी है।
क्वार्टर फाइनल मुकाबले (भारतीय समयानुसार)
| मुकाबला | तारीख | भारतीय समय |
|---|---|---|
| फ्रांस vs मोरक्को | 10 जुलाई | रात 1:30 बजे |
| स्पेन vs बेल्जियम | 11 जुलाई | रात 12:30 बजे |
| नॉर्वे vs इंग्लैंड | 12 जुलाई | रात 2:30 बजे |
| अर्जेंटीना vs स्विट्जरलैंड | 12 जुलाई | सुबह 6:30 बजे |
मिस्र आखिर इतना नाराज क्यों है?
- मिस्र के लिए यह मुकाबला ऐतिहासिक बनने जा रहा था। टीम 79वें मिनट तक 2-0 से आगे थी और पहली बार विश्व कप क्वार्टर फाइनल के बेहद करीब पहुंच चुकी थी।
- लेकिन मैच का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मुस्तफा जिको का शानदार गोल VAR समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया।
- रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सिए ने माना कि गोल बनने से पहले मरावान अतिया ने लिसांद्रो मार्टिनेज पर फाउल किया था। इसके बाद अर्जेंटीना ने वापसी करते हुए तीन गोल कर मैच जीत लिया।
- मिस्र का दावा है कि VAR ने जरूरत से ज्यादा पीछे जाकर घटना की समीक्षा की, जबकि अर्जेंटीना के पक्ष में ऐसे ही दूसरे फैसले नहीं दिए गए।
- मुख्य कोच होसाम हसन ने मैच के बाद कहा, 'हमारे साथ नाइंसाफी हुई। शायद वे विश्व चैंपियन को टूर्नामेंट में बनाए रखना चाहते थे। शायद वे चाहते थे कि मेसी आगे तक खेलें।'
- विशेषज्ञों का मानना है कि विवाद जरूर था, लेकिन इसे किसी साजिश का प्रमाण नहीं कहा जा सकता।
- मुस्तफा जिको का गोल रद्द होने से पहले मिस्र 1-0 से आगे था। इसके नौ मिनट बाद उसने दूसरा गोल भी कर दिया।
- यानी यह नहीं कहा जा सकता कि अगर तीसरा गोल मान लिया जाता तो मैच का परिणाम निश्चित रूप से अलग ही होता।
- इसी तरह इंजरी टाइम में मोहम्मद सलाह और हम्दी फाथी के दो पेनाल्टी अपील भी चर्चा में रहीं।
- बाद में सामने आए रिप्ले में जूलियन अल्वारेज पहले गेंद तक पहुंचते दिखाई दिए। तकनीकी रूप से रेफरी का फैसला सही माना गया, हालांकि बहस आज भी जारी है।
मेसी को रेड कार्ड न मिलना भी बना बहस का विषय
- टूर्नामेंट की शुरुआत में अल्जीरिया के कप्तान ऐसा मांडी पर मेसी की चुनौती भी चर्चा में रही।
- कई विशेषज्ञों का मानना था कि वहां मेसी को रेड कार्ड दिया जा सकता था।
- बाद में अमेरिका के फोलारिन बालोगुन को लगभग समान चुनौती पर रेड कार्ड मिला।
- अगर मेसी को भी रेड कार्ड मिलता तो वे अगले मैच में नहीं खेल पाते।
- यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसे भी विशेष व्यवहार से जोड़कर देखा गया।
- हालांकि फीफा ने उस समय मेसी के खिलाफ कोई कार्रवाई जरूरी नहीं समझी।
विश्व कप में अनुशासनात्मक रिकॉर्ड भी बहस का बड़ा कारण बना है। आंकड़े बताते हैं कि अर्जेंटीना ने काफी फाउल किए, लेकिन उसे अपेक्षाकृत कम यलो कार्ड मिले।
टीमों का फाउल और यलो कार्ड रिकॉर्ड
| टीम | किए गए फाउल | येलो कार्ड | औसतन कितने फाउल
पर 1 यलो कार्ड |
|---|---|---|---|
| नॉर्वे | 48 | 2 | 24.0 |
| अर्जेंटीना | 59 | 3 | 19.7 |
| स्पेन | 55 | 3 | 18.3 |
| बेल्जियम | 60 | 4 | 15.0 |
| फ्रांस | 49 | 4 | 12.3 |
| स्विट्जरलैंड | 69 | 6 | 11.5 |
| मोरक्को | 61 | 6 | 10.2 |
| इंग्लैंड | 54 | 7 | 7.7 |
इन आंकड़ों से साफ है कि अर्जेंटीना को हर 19.7 फाउल पर एक यलो कार्ड मिला, जबकि इंग्लैंड को हर 7.7 फाउल पर एक कार्ड दिखाया गया। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई लोग रेफरिंग की निरंतरता पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, केवल आंकड़े अपने आप किसी पक्षपात को साबित नहीं करते। हर फाउल की गंभीरता अलग होती है और यलो कार्ड रेफरी के विवेक पर भी निर्भर करता है।
फ्रांस-मोरक्को मैच में अर्जेंटीना के रेफरी क्यों बने चर्चा का विषय?
विवाद को और हवा तब मिली जब फ्रांस और मोरक्को के क्वार्टर फाइनल के लिए मुख्य रेफरी, दोनों सहायक रेफरी, चौथे अधिकारी और रिजर्व अधिकारी, सभी अर्जेंटीना से नियुक्त किए गए। कई लोगों ने सवाल उठाया कि 2022 विश्व कप फाइनल की प्रतिद्वंद्वी फ्रांस के मैच में अर्जेंटीना के अधिकारियों की नियुक्ति उचित है या नहीं। हालांकि फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेशॉ ने किसी भी तरह के विवाद को खारिज करते हुए कहा, 'हमें इस पर भरोसा रखना होगा। हमारा मुकाबला मोरक्को से है, रेफरी से नहीं।' यानी फ्रांस ने सार्वजनिक तौर पर इस नियुक्ति पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
क्या अर्जेंटीना का नॉकआउट रास्ता सबसे आसान रहा?
विश्व कप ड्रॉ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मौजूदा टूर्नामेंट में अर्जेंटीना को क्वार्टर फाइनल तक दुनिया की शीर्ष-15 रैंकिंग वाली किसी टीम का सामना नहीं करना पड़ा।
क्वार्टर फाइनल तक अर्जेंटीना का सफर
| राउंड | प्रतिद्वंद्वी | फीफा रैंकिंग |
|---|---|---|
| ग्रुप स्टेज | ऑस्ट्रिया | 24 |
| ग्रुप स्टेज | अल्जीरिया | 28 |
| ग्रुप स्टेज | जॉर्डन | 63 |
| राउंड ऑफ-32 | केप वर्डे | 67 |
| राउंड ऑफ-16 | मिस्र | 29 |
| क्वार्टर फाइनल | स्विट्जरलैंड | 19 |
विश्वकप ड्रॉ में फीफा ने क्या बदलाव किया था?
- दिसंबर में फीफा ने विश्व कप ड्रॉ प्रक्रिया में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किया था। फीफा विश्व रैंकिंग की शीर्ष चार टीमें- फ्रांस, अर्जेंटीना, स्पेन और इंग्लैंड को ड्रॉ में अलग-अलग क्वार्टर में रखा गया। इसका मतलब यह था कि यदि ये चारों टीमें अपने-अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान पर रहतीं, जैसा कि हुआ भी, तो वे सेमीफाइनल से पहले एक-दूसरे का सामना नहीं कर सकती थीं।
- इस व्यवस्था के तहत फ्रांस और स्पेन को ड्रॉ के एक हिस्से में रखा गया, जबकि अर्जेंटीना और इंग्लैंड दूसरे हिस्से में रहे। ऐसे में फ्रांस और स्पेन के बीच संभावित मुकाबला सेमीफाइनल में हो सकता है, जबकि अर्जेंटीना और इंग्लैंड भी सेमीफाइनल से पहले आमने-सामने नहीं आ सकते।
- इस बदलाव का उद्देश्य टूर्नामेंट के शुरुआती नॉकआउट दौर में बड़े और हाई-प्रोफाइल मुकाबलों से बचना था, ताकि शीर्ष टीमों के बीच टक्कर बाद के चरणों में हो। हालांकि, ग्रुप चरण के नतीजों के आधार पर यह व्यवस्था कुछ टीमों के लिए अपेक्षाकृत आसान रास्ता भी तैयार कर सकती है। पहले दो नॉकआउट राउंड में दुनिया की शीर्ष-10 रैंकिंग वाली टीमों के बीच सिर्फ दो मुकाबले हुए। इनमें नीदरलैंड्स बनाम मोरक्को और स्पेन बनाम पुर्तगाल मैच शामिल हैं।
- अर्जेंटीना को अब तक अपेक्षाकृत आसान रास्ता मिला है। उसने राउंड ऑफ-32 में दुनिया की 67वीं रैंकिंग वाली केप वर्डे और राउंड ऑफ-16 में 29वीं रैंकिंग वाले मिस्र को 3-2 से हराया। अब क्वार्टर फाइनल में उसका सामना 19वीं रैंकिंग वाली स्विट्जरलैंड से है।
- वहीं इंग्लैंड को संभावित सेमीफाइनल तक शीर्ष-10 रैंकिंग वाली किसी टीम का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि उसे राउंड ऑफ-16 में 14वीं रैंकिंग वाले मेक्सिको को हराना पड़ा। दूसरी ओर स्पेन पहले ही पांचवीं रैंकिंग वाले पुर्तगाल को हरा चुका है और अब उसका मुकाबला नौवीं रैंकिंग वाले बेल्जियम से है। वहीं फ्रांस को क्वार्टर फाइनल में सातवीं रैंकिंग वाले मोरक्को जैसी मजबूत टीम का सामना करना है।
- इन आंकड़ों को देखें तो अब तक के नॉकआउट चरण में अर्जेंटीना का रास्ता अन्य दावेदार टीमों की तुलना में अपेक्षाकृत आसान नजर आता है। हालांकि यह आधिकारिक ड्रॉ प्रक्रिया का हिस्सा था और इसमें किसी अनियमितता का प्रमाण सामने नहीं आया है।
पेनल्टी के मामले में भी सबसे आगे अर्जेंटीना
अर्जेंटीना को इस विश्व कप में अब तक सबसे ज्यादा पेनल्टी मिली हैं।
क्वार्टर फाइनल तक पेनल्टी
| टीम | मिली पेनल्टी |
|---|---|
| अर्जेंटीना | 3 |
| इंग्लैंड | 2 |
| स्विट्जरलैंड | 2 |
| बेल्जियम | 1 |
| फ्रांस | 1 |
| नॉर्वे | 1 |
| पुर्तगाल | 1 |
दिलचस्प बात यह है कि तीन में से दो पेनल्टी पर मेसी गोल नहीं कर सके। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि इन फैसलों का अर्जेंटीना को पूरा फायदा मिला।
क्या जियानी इनफैनटिनो चाहते हैं कि मेसी उनके टूर्नामेंट में खेलें?
- फीफा अध्यक्ष जियानी इनफैनटिनो को लेकर भी समय-समय पर यह चर्चा होती रही है कि उन्हें अपने बड़े टूर्नामेंटों में लियोनेल मेसी की मौजूदगी पसंद है।
- इसका उदाहरण पिछले साल अमेरिका में आयोजित पहले फीफा क्लब विश्व कप के दौरान भी देखने को मिला।
- उस समय यह तय करने में कुछ समय लगा कि मेजबान देश की ओर से कौन-सी टीम क्लब विश्व कप में खेलेगी।
- सामान्य तौर पर माना जा रहा था कि 2025 की चैंपियन टीम को जगह मिलेगी, क्योंकि यह प्रतियोगिता प्रदर्शन के आधार पर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ क्लब टीमों के लिए बनाई गई है।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- इंटर मियामी ने 2024 का एमएलएस सपोर्टर्स शील्ड जीता था, जो नियमित लीग चरण में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाली टीम को दिया जाता है।
- हालांकि, एलए गैलेक्स ने प्लेऑफ जीतकर मेजर लीग सॉकर कप अपने नाम किया और आधिकारिक लीग चैंपियन बनी।
- इसके बावजूद फीफा क्लब विश्व कप के लिए मेजबान देश की ओर से इंटर मियामी का चयन किया गया।
- इस फैसले के चलते लियोनल मेसी को टूर्नामेंट के उद्घाटन मैच में अपने घरेलू मैदान हार्ड रॉक स्टेडियम में मिस्र के क्लब अल अहली के खिलाफ खेलने का अवसर मिला।
- यह फैसला उस समय भी काफी चर्चा और बहस का विषय बना था।
क्या सचमुच अर्जेंटीना को फायदा मिला?
यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। सच यह है कि कई फैसले बेहद विवादित रहे। मिस्र का गोल रद्द होना, पेनाल्टी अपील, मेसी को रेड कार्ड न मिलना, कम यलो कार्ड और आसान ड्रॉ, इन सभी वजहों से संदेह पैदा हुआ। लेकिन दूसरी तरफ अभी तक ऐसा कोई ठोस या आधिकारिक सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि फीफा ने जानबूझकर अर्जेंटीना या मेसी को फायदा पहुंचाया। अधिकांश आरोप परिस्थितियों, रेफरी के फैसलों और सांख्यिकीय तुलना पर आधारित हैं, जिनकी अलग-अलग व्याख्या की जा सकती है।
अर्जेंटीना का अभियान शानदार और विवादों में भी
- अर्जेंटीना का विश्व कप अभियान इस समय शानदार भी है और विवादों से घिरा भी। मिस्र के खिलाफ मैच के बाद रेफरिंग और VAR पर बहस पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है। आंकड़े कुछ सवाल जरूर खड़े करते हैं, लेकिन केवल आंकड़ों के आधार पर किसी साजिश या पक्षपात को साबित नहीं किया जा सकता।
- अब सबकी नजर क्वार्टर फाइनल पर होगी। अगर अर्जेंटीना आगे बढ़ता है तो यह बहस और तेज हो सकती है, लेकिन यदि रेफरिंग विवादों से दूर रहती है तो संभव है कि चर्चा फिर से फुटबॉल और मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर लौट आए।