{"_id":"696d420f9d7d80c9cc0cb620","slug":"brahma-was-a-strong-advocate-of-womens-empowerment-vasudha-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1010-150305-2026-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"नारी शक्ति के प्रबल हिमायती थे ब्रह्मा : वसुधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नारी शक्ति के प्रबल हिमायती थे ब्रह्मा : वसुधा
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 19 Jan 2026 01:56 AM IST
विज्ञापन
कार्यक्रम में श्रद्धांजलि देते हुए मौजूद सदस्य।
विज्ञापन
कादमा। त्याग, तपस्या, सेवा के साथ पवित्रता की प्रतिमूर्ति व नारी शक्ति के प्रबल हिमायती थे ब्रह्मा। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा में आयोजित कार्यक्रम में सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी वसुधा ने व्यक्त किए। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के संस्थापक ब्रह्मा बाबा की रविवार को 57 वीं पुण्य तिथि स्मृति दिवस विश्वभर में विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जा रही है।
ब्रह्माकुमारी वसुधा ने कहा कि नारी शक्ति का विश्व का सबसे बड़ा और विशाल संगठन की नींव रखने वाले ब्रह्मा बाबा ने बताया कि नारी नरक का द्वार नहीं सिर का ताज है, नारी अबला नहीं सबला है, वह तो शक्ति स्वरूपा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी के उत्थान के संकल्प के साथ उसे समाज में खोया सम्मान दिलाने, भारत माता, वंदे मातरम् की गाथा को सही अर्थों में चरितार्थ करने वर्ष 1937 में उस जमाने के हीरे-जवाहरात के प्रसिद्ध व्यापारी दादा लेखराज कृपलानी ने परिवर्तन की नींव रखी।
वसुधा बहन ने कहा कि नारी उत्थान को लेकर उनका दृढ़ संकल्प ही था कि उन्होंने अपनी सारी जमीन-जायजाद बेचकर एक ट्रस्ट बनाया और उसमें संचालन की जिम्मेदारी नारियों को सौंप दी। वहीं, झोझू कलां सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी ज्योति ने कहा कि संस्थान के इस समय विश्व के 140 देशों में पांच हजार से अधिक सेवाकेंद्र संचालित हैं। साथ ही 46 हजार ब्रह्माकुमारी बहनें समर्पित रूप से तन-मन-धन के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं। 20 लाख से अधिक लोग इसके नियमित विद्यार्थी हैं जो संस्थान के नियमित सत्संग मुरली क्लास में उपस्थित होते हैं। झोझूकलां-कादमा क्षेत्र के सैकड़ों ब्रह्माकुमार लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके पद चिह्नों पर चलकर समाज को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लिया।
Trending Videos
ब्रह्माकुमारी वसुधा ने कहा कि नारी शक्ति का विश्व का सबसे बड़ा और विशाल संगठन की नींव रखने वाले ब्रह्मा बाबा ने बताया कि नारी नरक का द्वार नहीं सिर का ताज है, नारी अबला नहीं सबला है, वह तो शक्ति स्वरूपा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी के उत्थान के संकल्प के साथ उसे समाज में खोया सम्मान दिलाने, भारत माता, वंदे मातरम् की गाथा को सही अर्थों में चरितार्थ करने वर्ष 1937 में उस जमाने के हीरे-जवाहरात के प्रसिद्ध व्यापारी दादा लेखराज कृपलानी ने परिवर्तन की नींव रखी।
विज्ञापन
विज्ञापन
वसुधा बहन ने कहा कि नारी उत्थान को लेकर उनका दृढ़ संकल्प ही था कि उन्होंने अपनी सारी जमीन-जायजाद बेचकर एक ट्रस्ट बनाया और उसमें संचालन की जिम्मेदारी नारियों को सौंप दी। वहीं, झोझू कलां सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी ज्योति ने कहा कि संस्थान के इस समय विश्व के 140 देशों में पांच हजार से अधिक सेवाकेंद्र संचालित हैं। साथ ही 46 हजार ब्रह्माकुमारी बहनें समर्पित रूप से तन-मन-धन के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं। 20 लाख से अधिक लोग इसके नियमित विद्यार्थी हैं जो संस्थान के नियमित सत्संग मुरली क्लास में उपस्थित होते हैं। झोझूकलां-कादमा क्षेत्र के सैकड़ों ब्रह्माकुमार लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके पद चिह्नों पर चलकर समाज को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लिया।