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Charkhi Dadri News: दो महीने में तीन बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से लगातार कम हो रहा निर्माण सामग्री का कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 19 Jan 2026 02:18 AM IST
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काठ मंडी स्थित भवन निर्माण सामग्री की दुकान।
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चरखी दादरी। दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के चलते लगातार ग्रैप की पाबंदियों के कारण क्षेत्र में निर्माण सामग्री विक्रेताओं के कारोबार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। एक तरफ जहां निर्माण कार्य बंद हो जाते हैं वहीं निर्माण सामग्री के भाव भी बढ़ जाते हैं। लंबे समय तक सामग्री का भंडारण रहने से विक्रेताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय भवन निर्माण सामग्री विक्रेताओं ने सरकार से बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए गंभीरता के साथ विचार करने की मांग की है, जिससे आम आदमी पर ग्रैप की पाबंदियों का असर न पड़े और किसी का कारोबार प्रभावित न हो।
बता दें कि पिछले करीब दो महीनों के दौरान तीन बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से जिले में माइनिंग व क्रशर यूनिट्स बंद होने के साथ-साथ निर्माण कार्यों पर भी रोक लगती है। इस कारण बाजारों में स्थित निर्माण सामग्री की दुकानों में भी कारोबार लगभग बंद हो जाता है। विक्रेताओं का कहना है कि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वाहनों के आवागमन पर अंकुश लगना चाहिए। इसके अलावा सरकार को चाहिए कि वायु प्रदूषण फैलाने वाले मुख्य स्थानों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई करे।
ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू होने से निर्माण सामग्री विक्रेताओं के अलावा श्रमिकों, भराई करने वाले वाहन चालकों, राज मिस्त्री के काम पर काफी असर पड़ा है। यह वर्ग ऐसा है जो सुबह परिवार के भरण-पोषण के लिए घर से निकलता है लेकिन काम न मिलने के कारण खाली हाथ घर लौटने के लिए मजबूर होता है।
निर्माण सामग्री के दाम पर भी पड़ा असर
ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से पहले जहां क्रशर 110 रुपये क्विंटल बिकता था, वहीं अब इसके भाव 10 से 15 रुपये अधिक हो गए हैं। वहीं रेती 95 रुपये से बढ़कर 105 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। रोड़ी के भाव में उछाल आने से 95 रुपये से बढ़कर 100 रुपये तक पहुंच गए हैं।
क्या कहते हैं विक्रेता
बार-बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से कारोबार लगातार कम होता जा रहा है। बढ़ते रेट देख कर ग्राहक को संतुष्ट करना काफी मुश्किल होता है। काम कम होने से दुकान का किराया व श्रमिकों को वेतन देने के लिए मुश्किल हो रही है। सरकार से अनुरोध है कि वो प्रदूषण को नियंत्रित कर हमारा कारोबार शुरू करवाए।
-नवीन कुमार, भवन निर्माण सामग्री विक्रेता।
ग्रैप पाबंदी लागू होने से एक आदमी ही नहीं बहुत से लोगों का काम प्रभावित हो रहा है। सरकार को बढ़ते वायु प्रदूषण पर विराम लगाने के लिए ग्राउंड लेवल तक पहुंचने की जरूरत है, ताकि ग्रैप का प्रभाव आम आदमी पर नहीं पड़े। ग्रेप-4 लगने से ईंटों के भाव भी आसमान छू रहे हैं।
-विनोद कुमार, भवन निर्माण सामग्री सप्लायर।
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बता दें कि पिछले करीब दो महीनों के दौरान तीन बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से जिले में माइनिंग व क्रशर यूनिट्स बंद होने के साथ-साथ निर्माण कार्यों पर भी रोक लगती है। इस कारण बाजारों में स्थित निर्माण सामग्री की दुकानों में भी कारोबार लगभग बंद हो जाता है। विक्रेताओं का कहना है कि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वाहनों के आवागमन पर अंकुश लगना चाहिए। इसके अलावा सरकार को चाहिए कि वायु प्रदूषण फैलाने वाले मुख्य स्थानों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई करे।
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ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू होने से निर्माण सामग्री विक्रेताओं के अलावा श्रमिकों, भराई करने वाले वाहन चालकों, राज मिस्त्री के काम पर काफी असर पड़ा है। यह वर्ग ऐसा है जो सुबह परिवार के भरण-पोषण के लिए घर से निकलता है लेकिन काम न मिलने के कारण खाली हाथ घर लौटने के लिए मजबूर होता है।
निर्माण सामग्री के दाम पर भी पड़ा असर
ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से पहले जहां क्रशर 110 रुपये क्विंटल बिकता था, वहीं अब इसके भाव 10 से 15 रुपये अधिक हो गए हैं। वहीं रेती 95 रुपये से बढ़कर 105 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। रोड़ी के भाव में उछाल आने से 95 रुपये से बढ़कर 100 रुपये तक पहुंच गए हैं।
क्या कहते हैं विक्रेता
बार-बार ग्रैप की पाबंदियां लागू होने से कारोबार लगातार कम होता जा रहा है। बढ़ते रेट देख कर ग्राहक को संतुष्ट करना काफी मुश्किल होता है। काम कम होने से दुकान का किराया व श्रमिकों को वेतन देने के लिए मुश्किल हो रही है। सरकार से अनुरोध है कि वो प्रदूषण को नियंत्रित कर हमारा कारोबार शुरू करवाए।
-नवीन कुमार, भवन निर्माण सामग्री विक्रेता।
ग्रैप पाबंदी लागू होने से एक आदमी ही नहीं बहुत से लोगों का काम प्रभावित हो रहा है। सरकार को बढ़ते वायु प्रदूषण पर विराम लगाने के लिए ग्राउंड लेवल तक पहुंचने की जरूरत है, ताकि ग्रैप का प्रभाव आम आदमी पर नहीं पड़े। ग्रेप-4 लगने से ईंटों के भाव भी आसमान छू रहे हैं।
-विनोद कुमार, भवन निर्माण सामग्री सप्लायर।