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Charkhi Dadri News: यमुना का जलस्तर कम होने से जिले को इस बार कम मात्रा में पानी मिलने की संभावना, पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से नदियों में जमा पानी, 900 क्यूसेक की जरूरत
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दादरी जिले से गुजरने वाली खाली नहर। फाइल फोटो
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चरखी दादरी। पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी से नदियां जमने पर यमुना में पानी की कमी हो गई है। ऐसे में नहरी पानी का संकट गहराने लगा है। जिले की नहरों में 19 जनवरी को खुबडू हेड से पानी छोड़ा जाना है। इस बार पानी कम मात्रा में मिलने की संभावना है। जिले की जरूरत 900 क्यूसेक पानी है। पिछली बारी में 450 क्यूसेक पानी मिला था।
इस समय जिले के जलघरों में पर्याप्त पानी नहीं बचा है। सिंचाई के लिए भी पानी की जरूरत बनी हुई है। पिछली टर्न में जलघरों में ठीक प्रकार से पानी नहीं भरा जा सका था। 26 दिसंबर को जिले की नहरों में पानी बंद हुआ था। अब 15 दिन बीत गए है, जलघरों में पर्याप्त पानी नहीं है। पहाड़ों पर बर्फबारी की वजह से नदियां जमने पर पानी की कमी बनी हुई है। इस समय नहरी पानी की सख्त जरूरत बनी हुई है।
पेयजल के लिहाज से पानी की जरूरत ज्यादा बनी हुई है। जलघरों में पानी नहरों के जरिये ही डाला जाता है। शहर के मुख्य जलघर बधवाना और लोहारू नहर के जरिये भरे जाते हैं। बधवाना नहर से शहर का कपूरी जलघर जोड़ रखा है और मेन चंपापुरी जलघर को लोहारू नहर से भरा जाता है। सरकारी मोगे व पंप सिस्टम के जरिए नहरों से जलघरों में पानी डाला जाता है।
दादरी जिले में एक लाख एकड़ क्षेत्र में गेहूं की फसल खड़ी है। सरसों में सिंचाई की केवल रेतीले भागों में ज्यादा जरूरत बनी हुई है। नहरों के साथ तराई भागों में सिंचाई की जरूरत इतनी नहीं है। जिले में सरसों की बिजाई एक लाख 55 हजार एकड़ क्षेत्र में कर रखी है। इसी प्रकार जौ का रकबा भी करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र है। बोरिंग ट्यूबवेल से जमीनी पानी का स्तर घट रहा है।
इस बार जिले को 900 क्यूसिक पानी की जरूरत है तब जाकर जलघर भरने व सिंचाई का काम पूरा हो सकता है। बधवाना नहर में 15 दिन पानी छोड़े जाने की जरूरत है ताकि शहर के कपूरी जलघर के अलावा करीब 15 गांवों के वाटर टैंक भरे जा सकें।
पेयजल उपभोक्ता सोमवीर शर्मा, राजेंद्र सिंह, पूर्व सैनिक धर्मबीर सिंह व संतोष ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। जब भी आपूर्ति की जाती है तो खराब पानी मिलता है। यह पानी पीने लायक नहीं है। नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ना चाहिए ताकि जलघर ठीक प्रकार से भरे जा सकें।
वर्जन :
नदियों में पानी की मात्रा कम होने की वजह से इसका असर सभी नहरों में आपूर्ति पर पड़ना स्वाभाविक है। पूरे पानी को एक तरफ डायवर्ट करके बारी-बारी से छोड़ना पड़ता है। पानी की पूर्ति करने का पूरा प्रयास किया जाता है। ऊपर इंडेंट भेजने पर ही पानी की उपलब्धता का सही पता चल सकेगा।- एसडीओ हरवीर सिंह, सिंचाई विभाग, दादरी।
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इस समय जिले के जलघरों में पर्याप्त पानी नहीं बचा है। सिंचाई के लिए भी पानी की जरूरत बनी हुई है। पिछली टर्न में जलघरों में ठीक प्रकार से पानी नहीं भरा जा सका था। 26 दिसंबर को जिले की नहरों में पानी बंद हुआ था। अब 15 दिन बीत गए है, जलघरों में पर्याप्त पानी नहीं है। पहाड़ों पर बर्फबारी की वजह से नदियां जमने पर पानी की कमी बनी हुई है। इस समय नहरी पानी की सख्त जरूरत बनी हुई है।
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पेयजल के लिहाज से पानी की जरूरत ज्यादा बनी हुई है। जलघरों में पानी नहरों के जरिये ही डाला जाता है। शहर के मुख्य जलघर बधवाना और लोहारू नहर के जरिये भरे जाते हैं। बधवाना नहर से शहर का कपूरी जलघर जोड़ रखा है और मेन चंपापुरी जलघर को लोहारू नहर से भरा जाता है। सरकारी मोगे व पंप सिस्टम के जरिए नहरों से जलघरों में पानी डाला जाता है।
दादरी जिले में एक लाख एकड़ क्षेत्र में गेहूं की फसल खड़ी है। सरसों में सिंचाई की केवल रेतीले भागों में ज्यादा जरूरत बनी हुई है। नहरों के साथ तराई भागों में सिंचाई की जरूरत इतनी नहीं है। जिले में सरसों की बिजाई एक लाख 55 हजार एकड़ क्षेत्र में कर रखी है। इसी प्रकार जौ का रकबा भी करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र है। बोरिंग ट्यूबवेल से जमीनी पानी का स्तर घट रहा है।
इस बार जिले को 900 क्यूसिक पानी की जरूरत है तब जाकर जलघर भरने व सिंचाई का काम पूरा हो सकता है। बधवाना नहर में 15 दिन पानी छोड़े जाने की जरूरत है ताकि शहर के कपूरी जलघर के अलावा करीब 15 गांवों के वाटर टैंक भरे जा सकें।
पेयजल उपभोक्ता सोमवीर शर्मा, राजेंद्र सिंह, पूर्व सैनिक धर्मबीर सिंह व संतोष ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। जब भी आपूर्ति की जाती है तो खराब पानी मिलता है। यह पानी पीने लायक नहीं है। नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ना चाहिए ताकि जलघर ठीक प्रकार से भरे जा सकें।
वर्जन :
नदियों में पानी की मात्रा कम होने की वजह से इसका असर सभी नहरों में आपूर्ति पर पड़ना स्वाभाविक है। पूरे पानी को एक तरफ डायवर्ट करके बारी-बारी से छोड़ना पड़ता है। पानी की पूर्ति करने का पूरा प्रयास किया जाता है। ऊपर इंडेंट भेजने पर ही पानी की उपलब्धता का सही पता चल सकेगा।- एसडीओ हरवीर सिंह, सिंचाई विभाग, दादरी।