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अल्कोहल की मौजूदगी मात्र से क्लेम खारिज नहीं : उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 30 लाख भुगतान के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 02 May 2026 12:47 AM IST
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल शरीर में एथिल अल्कोहल की मौजूदगी या शराब की गंध का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति नशे में था या स्वयं की देखभाल करने में असमर्थ था। आयोग ने कहा कि कंपनियां ग्राहकों को लुभावने फायदे दिखाकर पॉलिसी बेचती हैं परंतु क्लेम के समय तकनीकी आधारों पर उन्हें परेशान किया जाता है। इसके साथ ही आयोग ने निजी बैंक और बीमा कंपनी को मृतक खाताधारक के पिता को 30 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा क्लेम, ब्याज और मुआवजे के साथ अदा करने के आदेश दिए हैं।
यह था मामला
जिले के गांव मिसरी निवासी कपूर सिंह ने आयोग में मामला दायर किया था। उनके बेटे विकास कुमार की 20 जून 2020 की रात को सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। मृतक के पास एचडीएफसी बैंक का प्लेटिनम डेबिट कार्ड था जिसके तहत वह 30 लाख रुपये के व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के लिए पात्र था। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट में एथिल अल्कोहल पाया गया था जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
आयोग की टिप्पणी और वैज्ञानिक विश्लेषण
आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के तर्कों को अवैध और मनमाना करार दिया। आयोग ने फोरेंसिक रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया जिसमें मृतक के रक्त में अल्कोहल की मात्रा 34.50 मिलीग्राम प्रतिशत पाई गई थी। चिकित्सा न्यायशास्त्र और मानक पाठ्यपुस्तकों का हवाला देते हुए आयोग ने रेखांकित किया कि 100 मिलीग्राम से कम अल्कोहल स्तर होने पर व्यक्ति को नशे की स्थिति में या वाहन चलाने के लिए अयोग्य नहीं माना जाता। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि दुर्घटना या मृत्यु का मुख्य कारण शराब का सेवन ही था।
आयोग ने यह सुनाया फैसला
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 30 लाख रुपये की बीमा राशि, दावे के खारिज होने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करे। इसके अतिरिक्त, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। आदेशों में कहा गया है कि यदि 45 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी जाएगी।
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यह था मामला
जिले के गांव मिसरी निवासी कपूर सिंह ने आयोग में मामला दायर किया था। उनके बेटे विकास कुमार की 20 जून 2020 की रात को सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। मृतक के पास एचडीएफसी बैंक का प्लेटिनम डेबिट कार्ड था जिसके तहत वह 30 लाख रुपये के व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के लिए पात्र था। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट में एथिल अल्कोहल पाया गया था जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
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आयोग की टिप्पणी और वैज्ञानिक विश्लेषण
आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के तर्कों को अवैध और मनमाना करार दिया। आयोग ने फोरेंसिक रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया जिसमें मृतक के रक्त में अल्कोहल की मात्रा 34.50 मिलीग्राम प्रतिशत पाई गई थी। चिकित्सा न्यायशास्त्र और मानक पाठ्यपुस्तकों का हवाला देते हुए आयोग ने रेखांकित किया कि 100 मिलीग्राम से कम अल्कोहल स्तर होने पर व्यक्ति को नशे की स्थिति में या वाहन चलाने के लिए अयोग्य नहीं माना जाता। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि दुर्घटना या मृत्यु का मुख्य कारण शराब का सेवन ही था।
आयोग ने यह सुनाया फैसला
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 30 लाख रुपये की बीमा राशि, दावे के खारिज होने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करे। इसके अतिरिक्त, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। आदेशों में कहा गया है कि यदि 45 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी जाएगी।
