{"_id":"69f7ac890428f8c35c03e3c8","slug":"minor-alcohol-consumption-is-not-a-ground-for-rejecting-an-insurance-claim-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1009-154708-2026-05-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: शराब की ली गई मामूली मात्रा बीमा क्लेम खारिज करने का आधार नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: शराब की ली गई मामूली मात्रा बीमा क्लेम खारिज करने का आधार नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 04 May 2026 01:44 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
चरखी दादरी। दादरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्लेम के एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि शरीर में अल्कोहल की मामूली मौजूदगी को नशा नहीं माना जा सकता और न ही इसके आधार पर बीमा दावा खारिज किया जा सकता है।
आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये का दुर्घटना मृत्यु बीमा क्लेम नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने के भी आदेश दिए गए हैं।
यह था मामला
दादरी जिले के गांव आदमपुर निवासी सुमित्रा ने आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उनका बेटा अजीत सिंह भारतीय वायु सेना में कार्यरत था और उसका भारतीय स्टेट बैंक में डिफेंस सर्विंग पर्सनल खाता था। इस खाते के तहत 10 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना मृत्यु बीमा कवर प्रदान किया जाता है। नवंबर 2021 में छुट्टी के दौरान एक सड़क दुर्घटना में अजीत सिंह का निधन हो गया था और उनका शव घिकाड़ा पंप हाउस से बरामद हुआ था। जब सुमित्रा ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पोस्टमार्टम के दौरान विसरा रिपोर्ट में 69 मिलीग्राम प्रतिशत एथिल अल्कोहल पाया गया था जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
69 मिलीग्राम अल्कोहल की मात्रा से सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित नहीं होती
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और फोरेंसिक चिकित्सा के विभिन्न मानकों का अध्ययन करने के बाद पाया कि चिकित्सा न्यायशास्त्र और मानक पाठ्यपुस्तकों के अनुसार, जब तक रक्त में अल्कोहल की मात्रा 100 से 150 मिलीग्राम से अधिक न हो, तब तक व्यक्ति को नशे की स्थिति में या खुद पर नियंत्रण खोया हुआ नहीं माना जा सकता। आयोग ने स्पष्ट किया कि 69 मिलीग्राम अल्कोहल की मात्रा इतनी कम है कि यह व्यक्ति के रिफ्लेक्सिस या सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित नहीं करती।
फैसले में यह भी रेखांकित किया गया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि मृत्यु का सीधा संबंध शराब के सेवन से था। आदेश में कहा गया है कि यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो कंपनी को 12 प्रतिशत की बढ़ी हुई दर से ब्याज देना होगा।
Trending Videos
आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये का दुर्घटना मृत्यु बीमा क्लेम नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने के भी आदेश दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह था मामला
दादरी जिले के गांव आदमपुर निवासी सुमित्रा ने आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उनका बेटा अजीत सिंह भारतीय वायु सेना में कार्यरत था और उसका भारतीय स्टेट बैंक में डिफेंस सर्विंग पर्सनल खाता था। इस खाते के तहत 10 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना मृत्यु बीमा कवर प्रदान किया जाता है। नवंबर 2021 में छुट्टी के दौरान एक सड़क दुर्घटना में अजीत सिंह का निधन हो गया था और उनका शव घिकाड़ा पंप हाउस से बरामद हुआ था। जब सुमित्रा ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पोस्टमार्टम के दौरान विसरा रिपोर्ट में 69 मिलीग्राम प्रतिशत एथिल अल्कोहल पाया गया था जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
69 मिलीग्राम अल्कोहल की मात्रा से सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित नहीं होती
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और फोरेंसिक चिकित्सा के विभिन्न मानकों का अध्ययन करने के बाद पाया कि चिकित्सा न्यायशास्त्र और मानक पाठ्यपुस्तकों के अनुसार, जब तक रक्त में अल्कोहल की मात्रा 100 से 150 मिलीग्राम से अधिक न हो, तब तक व्यक्ति को नशे की स्थिति में या खुद पर नियंत्रण खोया हुआ नहीं माना जा सकता। आयोग ने स्पष्ट किया कि 69 मिलीग्राम अल्कोहल की मात्रा इतनी कम है कि यह व्यक्ति के रिफ्लेक्सिस या सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित नहीं करती।
फैसले में यह भी रेखांकित किया गया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि मृत्यु का सीधा संबंध शराब के सेवन से था। आदेश में कहा गया है कि यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो कंपनी को 12 प्रतिशत की बढ़ी हुई दर से ब्याज देना होगा।
