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Charkhi Dadri News: फसल अवशेषों में लगी आग हरियाली के लिए बनी अभिशाप
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 04 May 2026 01:36 AM IST
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दादरी-रोहतक रोड पर बौंद डिस्ट्रीब्यूटरी के पास जलते सूखे पेड़।
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चरखी दादरी। करीब एक सप्ताह पहले गांव भागेश्वरी स्थित खेतों में लगी आग फैलकर एनएच 152-डी तक पहुंच गई थी। आग फैलने से वन विभाग की ओर से रोपित 4 हजार पौधे झुलस गए। इसके साथ ही माइनरों पर खड़े 150 से अधिक सूखे पेड़ जल कर राख होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
आग लगने की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने दमकल विभाग को इसकी सूचना दी गई। मौके पर पहुंची दमकल विभाग की टीम और वन विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
गौरतलब है कि इन दिनों जिले में फसल अवशेष जलाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। खेतों में बढ़ती आगजनी की घटनाएं हरियाली को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा रही है, वहीं पर्यावरण को भी क्षति पहुंचाने के काम कर रही है। पिछले दिनों गांव भागेश्वरी के खेतों में लगी आग साथ लगते एनएच 152-डी तक पहुंच गई थी।
जहां वन विभाग ने लगभग 5 हजार पौधे लगाए गए थे। जहां लगभग दो हजार पौधों के झुलसने व जलने का मामला सामने आया है। वहीं दादरी डिस्ट्रीब्यूटरी, अचिना से भागवी रोड, सांजवास से भिवानी रोड, बौंद डिस्ट्रीब्यूटरी व दादरी स्थित मियावाकी वन क्षेत्र का कुछ हिस्सा भी आगजनी की चपेट में आया है।
आगजनी के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक पौधे और सूखे पेड़ जल गए। वन विभाग के अधिकारियों ने आग से जले पौधों की जांच करवाने के लिए संबंधित थानों में प्राथमिक दर्ज करवाई है। वहीं स्वयं भी जांच करने में लगे हैं ताकि आगजनी फैलाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।
कड़ी मेहनत के बाद तैयार होते है पौधे
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हमारे कर्मचारी जिले को हरा भरा बनाने के लिए हर साल लाखों की संख्या में पौधरोपित करते हैं ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ वातावरण में साफ व स्वच्छ हवा का प्रवाह हो सके। लेकिन हर साल खेतों में फाने जलाने के फेर में वन विभाग के हजारों पौधे झुलस जाते हैं।
मिट्टी की उपजाऊ शक्ति हो रही है नष्ट
जिला कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि खेतों में फाने जलाने के कारण लाभदायक सूक्ष्मजीव मर जाते हैं, वायु प्रदूषण बढ़ता है व पेड़ों को भारी मात्रा में नुकसान होता है। इससे कार्बन उत्सर्जन और कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ने का अंदेशा बना रहता है। वहीं आग से मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं।
हर साल लगाए जाते हैं लाखों पौधे
वन विभाग जिले को हरा-भरा बनाने के लिए हर साल लाखों पौधे लगाने के अलावा समाजसेवी संस्थाओं, स्कूलों व ग्राम पंचायतों में निशुल्क वितरित करता है ताकि जिले को पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सके। लेकिन आगजनी की घटनाओं में हर साल हजारों की संख्या में पेड़-पौधों झुलसना पड़ता है।
जिले में फाने व अवशेष जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसके चलते हमारी टीमें संबंधित क्षेत्रों में लगातार गश्त करती हैं। वहीं आगजनी की सूचना मिलने के साथ ही टीमें मौके पर पहुंच काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर दमकल विभाग की भी सहायता लेनी पड़ रही है।
- हेमंत पारिक, वन राजिक अधिकारी
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आग लगने की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने दमकल विभाग को इसकी सूचना दी गई। मौके पर पहुंची दमकल विभाग की टीम और वन विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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गौरतलब है कि इन दिनों जिले में फसल अवशेष जलाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। खेतों में बढ़ती आगजनी की घटनाएं हरियाली को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा रही है, वहीं पर्यावरण को भी क्षति पहुंचाने के काम कर रही है। पिछले दिनों गांव भागेश्वरी के खेतों में लगी आग साथ लगते एनएच 152-डी तक पहुंच गई थी।
जहां वन विभाग ने लगभग 5 हजार पौधे लगाए गए थे। जहां लगभग दो हजार पौधों के झुलसने व जलने का मामला सामने आया है। वहीं दादरी डिस्ट्रीब्यूटरी, अचिना से भागवी रोड, सांजवास से भिवानी रोड, बौंद डिस्ट्रीब्यूटरी व दादरी स्थित मियावाकी वन क्षेत्र का कुछ हिस्सा भी आगजनी की चपेट में आया है।
आगजनी के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक पौधे और सूखे पेड़ जल गए। वन विभाग के अधिकारियों ने आग से जले पौधों की जांच करवाने के लिए संबंधित थानों में प्राथमिक दर्ज करवाई है। वहीं स्वयं भी जांच करने में लगे हैं ताकि आगजनी फैलाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।
कड़ी मेहनत के बाद तैयार होते है पौधे
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हमारे कर्मचारी जिले को हरा भरा बनाने के लिए हर साल लाखों की संख्या में पौधरोपित करते हैं ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ वातावरण में साफ व स्वच्छ हवा का प्रवाह हो सके। लेकिन हर साल खेतों में फाने जलाने के फेर में वन विभाग के हजारों पौधे झुलस जाते हैं।
मिट्टी की उपजाऊ शक्ति हो रही है नष्ट
जिला कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि खेतों में फाने जलाने के कारण लाभदायक सूक्ष्मजीव मर जाते हैं, वायु प्रदूषण बढ़ता है व पेड़ों को भारी मात्रा में नुकसान होता है। इससे कार्बन उत्सर्जन और कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ने का अंदेशा बना रहता है। वहीं आग से मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं।
हर साल लगाए जाते हैं लाखों पौधे
वन विभाग जिले को हरा-भरा बनाने के लिए हर साल लाखों पौधे लगाने के अलावा समाजसेवी संस्थाओं, स्कूलों व ग्राम पंचायतों में निशुल्क वितरित करता है ताकि जिले को पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सके। लेकिन आगजनी की घटनाओं में हर साल हजारों की संख्या में पेड़-पौधों झुलसना पड़ता है।
जिले में फाने व अवशेष जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसके चलते हमारी टीमें संबंधित क्षेत्रों में लगातार गश्त करती हैं। वहीं आगजनी की सूचना मिलने के साथ ही टीमें मौके पर पहुंच काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर दमकल विभाग की भी सहायता लेनी पड़ रही है।
- हेमंत पारिक, वन राजिक अधिकारी
