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हरियाणा में हर चौथा बिजली उपभोक्ता डिफाल्टर: घरेलू कनेक्शनों पर सबसे ज्यादा बकाया, सरकारी विभागों की राशि अटकी
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: नवीन दलाल
Updated Sun, 11 Jan 2026 09:14 AM IST
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सार
आठ जनवरी को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग नई बिजली दरों को लेकर जन सुनवाई कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आयोग दरें बढ़ाने से पहले बकाया वसूली को लेकर बिजली निगमों को सख्त और स्पष्ट दिशानिर्देश देगा या फिर बोझ आम उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।
मंत्री अनिल विज
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन इसके साथ ही बिजली बिलों का बकाया भी गंभीर संकट का रूप लेता जा रहा है। राज्य में लगभग हर चौथा बिजली उपभोक्ता डिफाल्टर की श्रेणी में आ चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 83.40 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन हैं। इनमें से 22.50 लाख उपभोक्ताओं पर 7,742 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है।
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अक्तूबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार डिफाल्टर उपभोक्ताओं में 15.98 लाख कनेक्टेड हैं। इन पर 3,873.98 करोड़ रुपये बकाया है जबकि 6.52 लाख डिस्कनेक्टेड उपभोक्ताओं पर 3,868.17 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इसका सीधा अर्थ है कि बड़ी संख्या में कनेक्शन काटने के बावजूद बकाया राशि की वसूली नहीं हो पा रही है।
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डीएचबीवीएन पर सबसे ज्यादा दबाव
वितरण निगमों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) पर सबसे अधिक बकाया है। डीएचबीवीएन के 12.95 लाख डिफाल्टर उपभोक्ताओं पर 4,817.81 करोड़ रुपये लंबित हैं। वहीं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) में 9.55 लाख डिफाल्टरों पर 2,924.32 करोड़ रुपये का बिल बकाया है।
ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता सबसे बड़े डिफाल्टर
श्रेणीवार आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा बकाया घरेलू ग्रामीण उपभोक्ताओं पर है। ग्रामीण घरेलू श्रेणी के 11.17 लाख उपभोक्ताओं पर अकेले 4,282.12 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके मुकाबले घरेलू शहरी उपभोक्ताओं पर 959.07 करोड़ रुपये, औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 1,087.78 करोड़ रुपये और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर 749.98 करोड़ रुपये बकाया है। कृषि उपभोक्ताओं पर 200.59 करोड़ रुपये और सरकारी विभागों के 23,672 कनेक्शनों पर भी 418.06 करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है।
बिजली निगमों की सेहत पर असर
इतनी बड़ी डिफाल्टिंग राशि से बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इसका असर बिजली ढांचे के सुधार, नए निवेश और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बकाया वसूली के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई तो नुकसान अंततः ईमानदार उपभोक्ताओं पर बढ़ी हुई दरों के रूप में पड़ेगा।
दरें तय करने से पहले चुनौती
गौरतलब है कि आठ जनवरी को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग नई बिजली दरों को लेकर जन सुनवाई कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आयोग दरें बढ़ाने से पहले बकाया वसूली को लेकर बिजली निगमों को सख्त और स्पष्ट दिशानिर्देश देगा या फिर बोझ आम उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।
बिजली बकाया से जुड़े कई मामले न्यायालयों में भी लंबित हैं और इन पर तेजी से कार्रवाई के लिए विभाग को निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकारी भवनों और संस्थानों में बकाया राशि के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकारी व अन्य सभी भवनों में बिजली की बकाया राशि की वसूली सख्ती से की जाएगी और भुगतान में आनाकानी होने पर कानून अनुसार कार्रवाई होगी। -अनिल विज, ऊर्जा मंत्री, हरियाणा।