मासूमियत खून से लथपथ: स्कूल में विवाद के बाद नौवीं के छात्र ने सहपाठी की हत्या की, सीने पर कई बार घोंपी कैंची
बादलगढ़ गांव में वीरवार रात एक नौवीं कक्षा के किशोर ने सहपाठी अरमान (14) की कैंची से वार कर हत्या कर दी। अरमान कबड्डी का खिलाड़ी था। आरोपी भी कबड्डी खेलता था और प्रतिद्वंद्विता के कारण द्वेष रखता था।
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हरियाणा के फतेहाबाद के गांव बादलगढ़ में वीरवार रात करीब 8 बजे नौवीं कक्षा के एक किशोर ने अपने सहपाठी के सीने पर कैंची से कई वार कर हत्या कर दी। मृतक कबड्डी का खिलाड़ी था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी भी कबड्डी खेलता था और सहपाठी से प्रतिद्वंद्विता के कारण द्वेष भावना रखता था। पुलिस ने आरोपी नाबालिग को अंबाला स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया है। वारदात में इस्तेमाल की गई कैंची बरामद कर ली है।
सदर थाना प्रभारी शीशपाल ने बताया कि गांव के ही सरकारी स्कूल में नौवीं का छात्र अरमान (14) पुत्र कुलविंद्र सिंह प्रतिभाशाली खिलाड़ी था। उसके साथ पढ़ने वाला आरोपी नाबालिग भी कबड्डी खेलता था। जांच में पता चला है कि अरमान अक्सर खेल में अच्छा प्रदर्शन करता था। इससे आरोपी किशोर उससे द्वेष रखता था।
मृतक के पिता कुलविंद्र सिंह ने शिकायत में बताया है कि दो दिन पहले स्कूल में किसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हो गई थी। आरोपी ने बेटे अरमान को देख लेने की धमकी दी थी। वीरवार शाम करीब 7.30 बजे अरमान और आरोपी नाबालिग गांव के चौक पर मिले और उनमें बहस हुई। उस वक्त लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया।
करीब आठ बजे आरोपी अपने आरएमपी पिता की क्लीनिक से कैंची उठाकर ले आया और चौक पर ही अरमान के सीने पर कैंची से कई वार किए। खून से लथपथ अरमान वहीं गिर पड़ा। परिजन उसे नागरिक अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
वारदात की जानकारी मिलते ही पुलिस गांव पहुंची और आरोपी को अभिरक्षा में ले लिया। मृतक के चाचा उदयदीप ने बताया कि अरमान छोटी उम्र में ही कबड्डी खेलने लगा था। उसका सपना अच्छा खिलाड़ी बनने का था।
किशोर की हत्या के आरोप में उसके सहपाठी नाबालिग को बाल सुधार गृह अंबाला भिजवा दिया है। दोनों में खेलने को लेकर प्रतिद्वंद्विता रहती थी। इस वजह से कई बार स्कूल में कहासुनी हो जाती थी। अरमान के शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। - मदन, पुलिस प्रवक्ता, फतेहाबाद
मोबाइल की लत बच्चों को बना रही चिड़चिड़ा
जिला नागरिक अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश ने बताया कि किशोरावस्था में बच्चों का मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं होता। इसलिए वे कई बार सही और गलत का परिपक्व आकलन नहीं कर पाते। आजकल मोबाइल पर उपलब्ध हिंसक गेम, उत्तेजक रील और अन्य डिजिटल सामग्री बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर रही है, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ रही है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उसकी समय रहते काउंसिलिंग करानी चाहिए। घर से बाहर जाकर बच्चे क्या करते हैं, उसके दोस्त कैसे हैं, इन पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों के बारे में स्कूल में भी शिक्षकों से फीडबैक लेना चाहिए।
पुलिस की मौजूदगी में किया अंतिम संस्कार
वारदात के बाद से गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सदर थाना प्रभारी शीशपाल पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में ही अरमान का अंतिम संस्कार कराया गया। पुलिस ने गांव के गण्यमान्य लोगों के साथ बैठक कर माहौल शांत करने में योगदान की अपील की।