{"_id":"697260285b28f4d3390d8968","slug":"ratiram-of-samain-endured-the-punishment-of-hanging-yet-the-name-of-the-azad-hind-fauj-warrior-is-not-included-in-the-administrations-list-of-freedom-fighters-fatehabad-news-c-127-1-ftb1001-147422-2026-01-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: काले पानी की सजा झेली, फिर भी सम्मान में गुमनाम रहे समैन के रतीराम, आजाद हिंद फौज के योद्धा का नाम प्रशासन की स्वतंत्रता सेनानी सूची में नहीं शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: काले पानी की सजा झेली, फिर भी सम्मान में गुमनाम रहे समैन के रतीराम, आजाद हिंद फौज के योद्धा का नाम प्रशासन की स्वतंत्रता सेनानी सूची में नहीं शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 22 Jan 2026 11:06 PM IST
विज्ञापन
आजाद हिंद फौजी के योद्धा रहे रतीराम।
विज्ञापन
बलजीत जांगड़ा
समैन। देश की आजादी की लड़ाई में टोहाना क्षेत्र के रणबांकुरों ने अपने साहस और बलिदान से इतिहास रचा। गांव समैन के रती राम गिल भी ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगुवाई में आजाद हिंद फौज में शामिल होकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। रती राम गिल ने 3 साल तक काले पानी की सजा भी काटी, लेकिन आज तक उनका नाम प्रशासन की सूची में शामिल नहीं किया गया है। उनका परिवार लघु सचिवालय में स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में नाम दर्ज कराने के लिए चक्कर तक काट चुका है।
1940 में आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए थे रती राम
परिजनों के अनुसार, रती राम का जन्म 1916 में एक किसान परिवार में हुआ था। देश की गुलामी के दौर में उन्होंने 24 वर्ष की उम्र में आज़ाद हिंद फौज में भर्ती होने का निर्णय लिया और 1940 में वह इस सेना का हिस्सा बने। उन्होंने सिंगापुर के युद्ध में भाग लिया और इस दौरान अंग्रेजों की हार के बाद जापान ने आज़ाद हिंद फौज के सभी फौजियों को बंदी बना लिया। 1943 में जब आईएनए का गठन हुआ तो रती राम ने वालिंटियर के रूप में अपनी सेवा दी।
रती राम ने नेहरू ब्रिगेड की आठवीं बटालियन में शामिल होकर बर्मा फ्रंट पर अंग्रेजों के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी। इसके बाद जब अंग्रेजों ने जापान को हराया तो उन्हें रंगून और जगर गच्चा की कुख्यात जेलों में बंदी बना लिया गया, जो आज भी काले पानी के नाम से जानी जाती है। 1946 में रिहा होने के बाद वे घर लौटे। भारत सरकार ने 1972 में उन्हें ताम्र पत्र और पेंशन से सम्मानित किया। शुरुआत में उन्हें केवल 100 रुपये की पेंशन दी गई, जिसे बाद में बढ़ाया गया। वर्तमान में उनकी पत्नी निंबो देवी को पेंशन मिल रही है। रती राम की पत्नी निंबो देवी ने बताया कि मुझे अपने पति पर गर्व है। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान की बाजी लगाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। संवाद
Trending Videos
समैन। देश की आजादी की लड़ाई में टोहाना क्षेत्र के रणबांकुरों ने अपने साहस और बलिदान से इतिहास रचा। गांव समैन के रती राम गिल भी ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगुवाई में आजाद हिंद फौज में शामिल होकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। रती राम गिल ने 3 साल तक काले पानी की सजा भी काटी, लेकिन आज तक उनका नाम प्रशासन की सूची में शामिल नहीं किया गया है। उनका परिवार लघु सचिवालय में स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में नाम दर्ज कराने के लिए चक्कर तक काट चुका है।
1940 में आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए थे रती राम
परिजनों के अनुसार, रती राम का जन्म 1916 में एक किसान परिवार में हुआ था। देश की गुलामी के दौर में उन्होंने 24 वर्ष की उम्र में आज़ाद हिंद फौज में भर्ती होने का निर्णय लिया और 1940 में वह इस सेना का हिस्सा बने। उन्होंने सिंगापुर के युद्ध में भाग लिया और इस दौरान अंग्रेजों की हार के बाद जापान ने आज़ाद हिंद फौज के सभी फौजियों को बंदी बना लिया। 1943 में जब आईएनए का गठन हुआ तो रती राम ने वालिंटियर के रूप में अपनी सेवा दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
रती राम ने नेहरू ब्रिगेड की आठवीं बटालियन में शामिल होकर बर्मा फ्रंट पर अंग्रेजों के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी। इसके बाद जब अंग्रेजों ने जापान को हराया तो उन्हें रंगून और जगर गच्चा की कुख्यात जेलों में बंदी बना लिया गया, जो आज भी काले पानी के नाम से जानी जाती है। 1946 में रिहा होने के बाद वे घर लौटे। भारत सरकार ने 1972 में उन्हें ताम्र पत्र और पेंशन से सम्मानित किया। शुरुआत में उन्हें केवल 100 रुपये की पेंशन दी गई, जिसे बाद में बढ़ाया गया। वर्तमान में उनकी पत्नी निंबो देवी को पेंशन मिल रही है। रती राम की पत्नी निंबो देवी ने बताया कि मुझे अपने पति पर गर्व है। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान की बाजी लगाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। संवाद

आजाद हिंद फौजी के योद्धा रहे रतीराम।