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Fatehabad News: पिता के त्याग से मिली सतबीर को मिलीं सांसें और खेलों में रच रहा इतिहास
Sun, 02 Aug 2026 10:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 02 Aug 2026 10:31 PM IST
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एथलीट सतबीर सिंह गिजरोइया
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फतेहाबाद। जिंदगी ने जब मुश्किल परीक्षा ली तो गांव सिरढ़ान निवासी सतबीर सिंह गिजरोइया ने हौसले से उसका सामना किया। किडनी खराब होने के बाद पिता के अंगदान से नया जीवन पाने वाले सतबीर ने हार नहीं मानी और आज ट्रांसप्लांट एथलीट के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं।
वर्ष 2018 में सतबीर की किडनी में परेशानी आई थी। उस समय उनके पिता ने अपनी किडनी देकर उन्हें जीवनदान दिया। इसके बाद सतबीर ने अपने जीवन को नई दिशा दी और खेलों को लक्ष्य बनाकर ट्रांसप्लांट एथलेटिक्स में कदम रखा। सतबीर अब पांडुचेरी में आयोजित पहली राष्ट्रीय पेंटाक चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच चुके हैं। उन्होंने हरियाणा के लिए स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद जताई है।
इससे पहले भी वह कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। मुंबई में वर्ष 2023 और 2024 में आयोजित राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट गेम्स में सतबीर ने स्वर्ण पदक जीते। बैंकॉक में हुई विश्व ट्रांसप्लांट चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण और कांस्य पदक हासिल किए। जर्मनी में आयोजित विश्व ट्रांसप्लांट गेम्स में भी उन्होंने एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।
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सतबीर का कहना है कि अंगदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अंग प्रत्यारोपण के बाद भी व्यक्ति स्वस्थ, सक्रिय और सफल जीवन जी सकता है। मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच से कठिन परिस्थितियों को भी नई उपलब्धियों में बदला जा सकता है।
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सतबीर उपलब्धियां एक नजर में
सतबीर सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ट्रांसप्लांट प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते हैं। मुंबई में राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट गेम्स में वर्ष 2023 और 2024 में स्वर्ण पदक हासिल किए। बैंकॉक विश्व ट्रांसप्लांट चैंपियनशिप में स्वर्ण और कांस्य पदक जीते। जर्मनी विश्व ट्रांसप्लांट गेम्स में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक अपने नाम किए। अब पांडुचेरी में पहली राष्ट्रीय पेंटाक चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक की तैयारी कर रहे हैं।
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वर्ष 2018 में सतबीर की किडनी में परेशानी आई थी। उस समय उनके पिता ने अपनी किडनी देकर उन्हें जीवनदान दिया। इसके बाद सतबीर ने अपने जीवन को नई दिशा दी और खेलों को लक्ष्य बनाकर ट्रांसप्लांट एथलेटिक्स में कदम रखा। सतबीर अब पांडुचेरी में आयोजित पहली राष्ट्रीय पेंटाक चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच चुके हैं। उन्होंने हरियाणा के लिए स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद जताई है।
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इससे पहले भी वह कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। मुंबई में वर्ष 2023 और 2024 में आयोजित राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट गेम्स में सतबीर ने स्वर्ण पदक जीते। बैंकॉक में हुई विश्व ट्रांसप्लांट चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण और कांस्य पदक हासिल किए। जर्मनी में आयोजित विश्व ट्रांसप्लांट गेम्स में भी उन्होंने एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।
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सतबीर का कहना है कि अंगदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अंग प्रत्यारोपण के बाद भी व्यक्ति स्वस्थ, सक्रिय और सफल जीवन जी सकता है। मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच से कठिन परिस्थितियों को भी नई उपलब्धियों में बदला जा सकता है।
सतबीर उपलब्धियां एक नजर में
सतबीर सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ट्रांसप्लांट प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते हैं। मुंबई में राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट गेम्स में वर्ष 2023 और 2024 में स्वर्ण पदक हासिल किए। बैंकॉक विश्व ट्रांसप्लांट चैंपियनशिप में स्वर्ण और कांस्य पदक जीते। जर्मनी विश्व ट्रांसप्लांट गेम्स में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक अपने नाम किए। अब पांडुचेरी में पहली राष्ट्रीय पेंटाक चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक की तैयारी कर रहे हैं।