{"_id":"69653c1d2b747e39e9091914","slug":"send-suggestions-for-the-conservation-of-the-historical-stepwell-fatehabad-news-c-127-1-shsr1019-146894-2026-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: ऐतिहासिक बावड़ी के संरक्षण के लिए भेजे सुझाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: ऐतिहासिक बावड़ी के संरक्षण के लिए भेजे सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 12 Jan 2026 11:53 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
टोहाना। वार्ड 19 में स्थित लगभग 600 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी के संरक्षण, पुनर्जीवन और इसे अधिसूचित धरोहर घोषित करने के लिए नागरिकों ने हरियाणा सरकार को सुझाव भेजे हैं। यह सुझाव उपमंडल अधिकारी टोहाना आकाश शर्मा के माध्यम से प्रधान सचिव, विरासत एवं पर्यटन विभाग को भेजे हैं।
सुझाव पत्र में बताया गया है कि शहर की यह बावड़ी प्राचीन काल में जीवनदायिनी जलधारा के रूप में कार्य करती रही है और प्राचीन भारत की जल संरक्षण प्रणाली का अहम उदाहरण है। सरकार ने 2 दिसंबर 2025 को गजट अधिसूचना जारी की थी। इसमें दो माह के भीतर ही 2 फरवरी 2026 तक आमजन से इस बावड़ी के संरक्षण पर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं।
सुझावों में प्रमुख रूप से बावड़ी की वास्तविक आयु और ऐतिहासिक महत्व का निर्धारण करने के लिए कार्बन डेटिंग और पुरातात्विक सर्वेक्षण करवाने की अपील की गई है। इसके अलावा बावड़ी को हरियाणा राज्य संरक्षित स्मारक घोषित करने, परिसर की सफाई सुनिश्चित करने, आसपास के अतिक्रमण को हटाने, और दीवारों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करने का सुझाव दिया गया है।
वर्षा जल संचयन और जल पुनर्जीवन योजना के माध्यम से जलधारा को पुनर्जीवित करने, बावड़ी को हेरिटेज वाटर साइट के रूप में विकसित करने और जन-जागरूकता केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा, स्थानीय नागरिकों, इतिहासकारों और पर्यावरणविदों को निगरानी समिति में शामिल कर दीर्घकालीन संरक्षण के लिए वार्षिक बजट का प्रावधान करने की अपील की गई है।
साहित्यकार और पूर्व पार्षद नवल सिंह, पूर्व पार्षद अमिता जैन, एडवोकेट रजनीश जैन और कानूनी सलाहकार राज वर्मा ने एसडीएम के माध्यम से सरकार को इन सुझावों को भेजा है। उनका कहना है कि यह बावड़ी केवल एक संरचना नहीं, बल्कि टोहाना की सांस्कृतिक और जल विरासत का अहम हिस्सा है। यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया, तो सदियों पुरानी यह धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है।
Trending Videos
सुझाव पत्र में बताया गया है कि शहर की यह बावड़ी प्राचीन काल में जीवनदायिनी जलधारा के रूप में कार्य करती रही है और प्राचीन भारत की जल संरक्षण प्रणाली का अहम उदाहरण है। सरकार ने 2 दिसंबर 2025 को गजट अधिसूचना जारी की थी। इसमें दो माह के भीतर ही 2 फरवरी 2026 तक आमजन से इस बावड़ी के संरक्षण पर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुझावों में प्रमुख रूप से बावड़ी की वास्तविक आयु और ऐतिहासिक महत्व का निर्धारण करने के लिए कार्बन डेटिंग और पुरातात्विक सर्वेक्षण करवाने की अपील की गई है। इसके अलावा बावड़ी को हरियाणा राज्य संरक्षित स्मारक घोषित करने, परिसर की सफाई सुनिश्चित करने, आसपास के अतिक्रमण को हटाने, और दीवारों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करने का सुझाव दिया गया है।
वर्षा जल संचयन और जल पुनर्जीवन योजना के माध्यम से जलधारा को पुनर्जीवित करने, बावड़ी को हेरिटेज वाटर साइट के रूप में विकसित करने और जन-जागरूकता केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा, स्थानीय नागरिकों, इतिहासकारों और पर्यावरणविदों को निगरानी समिति में शामिल कर दीर्घकालीन संरक्षण के लिए वार्षिक बजट का प्रावधान करने की अपील की गई है।
साहित्यकार और पूर्व पार्षद नवल सिंह, पूर्व पार्षद अमिता जैन, एडवोकेट रजनीश जैन और कानूनी सलाहकार राज वर्मा ने एसडीएम के माध्यम से सरकार को इन सुझावों को भेजा है। उनका कहना है कि यह बावड़ी केवल एक संरचना नहीं, बल्कि टोहाना की सांस्कृतिक और जल विरासत का अहम हिस्सा है। यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया, तो सदियों पुरानी यह धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है।