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Fatehabad News: खसरा की चपेट में बच्चे, भाई-बहन समेत तीन पॉजिटिव केस मिले
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 08 Apr 2026 11:55 PM IST
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में ब्लड सैंपल देते हुए मरीज संवाद
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फतेहाबाद। शहर में खसरा संक्रमण के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। भाई-बहन समेत तीन बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिससे स्वास्थ्य विभाग के साथ क्षेत्रवासियों में चिंता बढ़ गई है। सभी मामलों में एक समान तथ्य यह सामने आया है कि संक्रमित बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ था।
स्वास्थ्य टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संक्रमित बच्चों के संपर्क में आए अन्य बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। संदिग्ध मामलों पर नजर रखते हुए दो बच्चों के सैंपल भी लिए गए हैं। विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य जांच में सामने आया कि चार मरला कॉलोनी में रहने वाले डेढ़ वर्षीय बच्चे और उसकी पांच वर्षीय बहन को बुखार और शरीर पर लाल दाने की शिकायत थी।
इसके बाद दोनों में खसरा संक्रमण की पुष्टि हुई। ये बच्चे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। रिपोर्ट आने के बाद आसपास के बच्चों की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक अन्य मामला सिरसा रोड क्षेत्र से सामने आया। यहां आठ वर्षीय बच्ची में खसरा की पुष्टि हुई है। बच्ची का परिवार राजस्थान से संबंधित है और फिलहाल यहीं रह रहा है। इस मामले में भी करीब 100 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार खसरा से बचाव के लिए 9 माह और डेढ़ वर्ष की उम्र में टीकाकरण जरूरी है। इन मामलों के बाद टीकाकरण जागरूकता और निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों का समय पर टीकाकरण जरूर करवाएं ताकि संक्रमण फैलाव रोका जा सके।
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जिले में 93 फीसदी टीकाकरण
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सन्नी का कहना है कि जिले में बच्चों का टीकाकरण 93 प्रतिशत है। जो बच्चे खसरा पीड़ित मिले हैं वह दूसरे राज्यों से हैं। हालांकि विभाग की तरफ से पीड़ित मिले बच्चों के संपर्क में आए बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है। लोगों को भी बच्चों का टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके।
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14 दिन तक किया जाता है आइसोलेट
विशेषज्ञों के अनुसार खसरे में शरीर पर दाने हो जाते हैं और बुखार रहता है। संपर्क में आने वाले बच्चों को भी बीमारी होने का खतरा रहता है। ऐसे में बच्चों को 14 दिन तक आइसोलेट रहने की सलाह दी जाती है। अगर कोई संबंधित बीमारी से ग्रस्त है तो मरीज को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें। मरीज के गिलास का इस्तेमाल न करें, इसका वायरस हवा में रहता है, ऐसे में नाक व मुंह को ढक कर रखें।
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बच्चे का ये किया जाता है टीकाकरण
जन्म के समय : बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटिस बी।
छह सप्ताह पर : ओपीवी पहली, पेंटावेलेंट पहली, आईपीवी पहली, रोटा पहली और पीसीवी पहली डोज।
10 सप्ताह पर : ओपीवी दूसरी, पेंटावेलेंट और रोटा की दूसरी डोज।
14 सप्ताह पर : ओपीवी तीसरी, पेंटावेलेंट तीसरी, आईपीवी, रोटा तीसरी और पीसीवी दूसरी डोज।
9 से 12 माह : एमआर पहली डोज, पीसीवी बूस्टर, जेई।
16 से 24 माह : एमआर दूसरी डोज, डीपीटी बी, ओपीवी बी, जेई।
5 से 6 साल : डीपीटी बूस्टर डोज।
10 और 16 साल : टीडी।
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स्वास्थ्य टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संक्रमित बच्चों के संपर्क में आए अन्य बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। संदिग्ध मामलों पर नजर रखते हुए दो बच्चों के सैंपल भी लिए गए हैं। विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य जांच में सामने आया कि चार मरला कॉलोनी में रहने वाले डेढ़ वर्षीय बच्चे और उसकी पांच वर्षीय बहन को बुखार और शरीर पर लाल दाने की शिकायत थी।
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इसके बाद दोनों में खसरा संक्रमण की पुष्टि हुई। ये बच्चे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। रिपोर्ट आने के बाद आसपास के बच्चों की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक अन्य मामला सिरसा रोड क्षेत्र से सामने आया। यहां आठ वर्षीय बच्ची में खसरा की पुष्टि हुई है। बच्ची का परिवार राजस्थान से संबंधित है और फिलहाल यहीं रह रहा है। इस मामले में भी करीब 100 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार खसरा से बचाव के लिए 9 माह और डेढ़ वर्ष की उम्र में टीकाकरण जरूरी है। इन मामलों के बाद टीकाकरण जागरूकता और निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों का समय पर टीकाकरण जरूर करवाएं ताकि संक्रमण फैलाव रोका जा सके।
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जिले में 93 फीसदी टीकाकरण
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सन्नी का कहना है कि जिले में बच्चों का टीकाकरण 93 प्रतिशत है। जो बच्चे खसरा पीड़ित मिले हैं वह दूसरे राज्यों से हैं। हालांकि विभाग की तरफ से पीड़ित मिले बच्चों के संपर्क में आए बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है। लोगों को भी बच्चों का टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके।
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14 दिन तक किया जाता है आइसोलेट
विशेषज्ञों के अनुसार खसरे में शरीर पर दाने हो जाते हैं और बुखार रहता है। संपर्क में आने वाले बच्चों को भी बीमारी होने का खतरा रहता है। ऐसे में बच्चों को 14 दिन तक आइसोलेट रहने की सलाह दी जाती है। अगर कोई संबंधित बीमारी से ग्रस्त है तो मरीज को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रखें। मरीज के गिलास का इस्तेमाल न करें, इसका वायरस हवा में रहता है, ऐसे में नाक व मुंह को ढक कर रखें।
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बच्चे का ये किया जाता है टीकाकरण
जन्म के समय : बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटिस बी।
छह सप्ताह पर : ओपीवी पहली, पेंटावेलेंट पहली, आईपीवी पहली, रोटा पहली और पीसीवी पहली डोज।
10 सप्ताह पर : ओपीवी दूसरी, पेंटावेलेंट और रोटा की दूसरी डोज।
14 सप्ताह पर : ओपीवी तीसरी, पेंटावेलेंट तीसरी, आईपीवी, रोटा तीसरी और पीसीवी दूसरी डोज।
9 से 12 माह : एमआर पहली डोज, पीसीवी बूस्टर, जेई।
16 से 24 माह : एमआर दूसरी डोज, डीपीटी बी, ओपीवी बी, जेई।
5 से 6 साल : डीपीटी बूस्टर डोज।
10 और 16 साल : टीडी।